आरएसएस कार्यकर्ता
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डॉ. भागवत ने हिंदुत्व का एजेंडा भी प्रमुखता से रखा। लेकिन इस हिंदुत्व में उन्होंने धार्मिक भावनाओं को बिल्कुल दरकिनार कर उसे राष्ट्रीयता और संस्कृति जोड़ने की कोशिश की। साफ कहा कि हम हिंदू है और यह गर्व की बात है। ऐसे में साफ हो गया कि संघ अपने हिंदुत्व के एजेंडे पर कायम है। लेकिन अब उसे दलित, अति पिछड़ा, बौद्ध, जैन आदि धर्मां तक ले जाना चाहता है।