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जैसी डिमांड वैसा हथियार यहां हो जाता है तैयार, देखें आखिर क्यों बदनाम है यूपी का ये गांव 

Thu, 10 Jan 2019 01:34 PM IST
दुष्यंत शर्मा डिम्पल सिरोही, अमर उजाला, मेरठ
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राधना गांव
यूपी के मेरठ जिले का किठौर क्षेत्र इन दिनों काफी चर्चाओं में हैं। इसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि यहां पकड़े गए कुछ ऐसे संदिग्ध हैं जिनका कनेक्शन आईएसआईएस से बताया जा रहा है। बीते दिनों 26 दिसंबर को इसी क्षेत्र के राधना गांव में नेशनल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी NIA ने संदिग्ध 'नईम' की तलाश में छापेमारी की जिसके बाद से ये गांव सुर्खियों में है।
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राधना गांव
इससे पहले भी इस गांव में पुलिस अक्सर अवैध हथियार तस्करों की तलाश में दबिश देती रही है लेकिन आलम ये है कि यहां अवैध असलाह की कारीगरी और तस्करी का कारोबार लगातार जारी है।

आइए एक नजर डालते हैं आखिर क्यों बदनाम है ये गांव :-
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राधना गांव
कहा जाता है कि यदि कोई अपराधी अपराध करने के बाद इस गांव में पहुंच जाए तो समझा जाता है कि वह पुलिस की पकड़ से दूर है। ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस यहां दिन के उजाले में भी कदम रखने से डरती है और इसकी बड़ी वजह है कि यहां दबिश देने गई पुलिस पर अब तक न जाने कितनी ही बार हमले हो चुके हैं।

 

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police
पुलिस जब भी इस गांव में दबिश के लिए पहुंचती है तो अपराधियों को इसकी भनक लग जाती है और वे फरार हो चुके होते हैं। यही कारण है कि पुलिस पहली बार में अक्सर यहां से खाली हाथ लौटती है। हाल ही में गिरफ्तार नईम को लेकर जब एनआईए राधना पहुंची तो उसके घर पर ताला लगा हुआ था और परिजन घर छोड़कर जा चुके थे। वहीं घर में तकरीबन एक दर्जन प्यालों में आधी आधी चाय मिली, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा था कि घरवालों को NIA के आने की सूचना पहले ही मिल चुकी थी।

 
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राधना गांव
अवैध हथियारों का गढ़ माना जाने वाला राधना यूपी सहित कई राज्यों में बदनाम है। यहां अवैध हथियारों को बनाने और बेचने का काम बड़े पैमाने पर किया जाता है वह भी पुलिस की नाक के नीचे। दरअसल, यहां गोपनीय रूप से खेतों और घरों में चलती हैं तमंचे बनाने की फैक्ट्री। आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये हथियार कैसे बनाए जाते हैं तो हम आपकों बता दे कि इस काले कारोबार को रात के अंधेरे में अंजाम दिया जाता है। सुदूर इलाकों के ईख के खेतों में कारीगर टॉर्च और एलईडी लाइटों की रोशनी में रातों रात अवैध हथियारों का जखीरा तैयार करते हैं।  
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राधना गांव
राधना में अवैध हथियारों का कारोबार इतना बढ़ चुका है कि दूसरे राज्यों के बदमाश भी अब यहां का रुख कर रहे हैं, खास तौर पर मुंगेरी तमंचे और विशेष प्रकार के कारतूस के लिए। बताया जाता है कि बिहार के मुंगेर से लाए गए अवैध हथियारों की यहां फिनिशिंग की जाती है। महिलाएं और बच्चे भी इस काम में कारीगरों की मदद करते हैं। 

 
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राधना गांव
सुरक्षा एजेंसियां पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हथियार सप्लायरों के जरिये आईएसआईएस का नेटवर्क खंगालने में जुटी हैं। इस संगठन का कनेक्शन वेस्ट में हथियार सप्लाई करने में बदनाम राधना गांव से जुड़ने पर एनआईए व एटीएस अलर्ट पर हैं। नईम और हापुड़ के साकिब का कनेक्शन राधना से जुड़ा पाया गया तो सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं।  

 

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राधना गांव
नईम राधना गांव का है, जहां से वेस्ट यूपी में लंबे समय से हथियार सप्लाई होते रहे हैं। इसकी जानकारी पुलिस अधिकारियों को भी है। इसे गंभीरता से लेने के बाद जब अभियान चला तो एक दिन में ही 66 तमंचे पकड़ लिए गए। राधना के अलावा जड़ौदा, ललियाना गांव भी इस काले कारोबार में शामिल हैं जहां अवैध हथियार बनाए और सप्लाई किए जाते है।

 
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राधना गांव
अब नई बात यह भी है कि यहां हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी चोरी चुपके दी जा रही है लेकिन पुलिस प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। जी हां इसका खुलासा NIA द्वारा अमरोहा से गिरफ्तार संदिग्ध सुहेल ने किया। सुहेल के मुताबिक उसने किठौर के बाग में ट्रेनिंग ली। यह बाग राधना निवासी महबूब का बताया गया।

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