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मां देख तिरंगा मेरे तन पर कितना सुंदर खिलता है.., शान से अंतिम यात्रा पर रवाना हुआ भारत मां का बेटा 

Wed, 20 Feb 2019 11:28 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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martyr ajay kumar
मां देख तिरंगा मेरे तन पर, कितना सुंदर खिलता है। ऐसा कफन मेरी मां बस, किस्मत वालों को मिलता है। देकर समर्पण मातृभूमि को, गर्व से मैं इठलाता हूं। मैं तेरा बेटा बनकर आया, इस दुनिया में मां, लेकिन भारत मां का बेटा बनकर इस दुनिया से जाता हूं। आपके हवाले वतन... मैं चला अंतिम यात्रा पर...

 
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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
देश की सेवा करने का जज्बा लिए अजय कुमार विदा हो गए। अपने साथियों को इस देश का जिम्मा देकर अंतिम यात्रा पर निकल गए। मंगलवार सुबह शहीद अजय कुमार को छावनी स्थित मिलिट्री अस्पताल में सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई। सेना के अधिकारियों ने पुष्प चक्र अर्पित किए। पश्चिम यूपी सब एरिया कमांडर मेजर जनरल पीके साई ने बैंड की धुन पर शहीद को सलामी दी।

 
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martyr ajay kumar
मिलिट्री अस्पताल के कमांडेंट ब्रिगेडियर एससी गुप्ता और 18 गढ़वाल के कमान अधिकारी ने शहीद को पुष्प चक्र अर्पित किए।  सोमवार देर रात पहुंचे अजय के पार्थिव शरीर को मिलिट्री अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया।
मंगलवार सुबह पार्थिव शरीर को फूलों से सजे सेना वाहन से पैतृक गांव बसा टीकरी के लिए ले जाया गया। सैन्य सम्मान के साथ पार्थिव शरीर को वाहन में रखा गया। गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों ने कंधा देकर शहीद अजय के पार्थिव  शरीर को भारत माता की जय के साथ रवाना किया।

 

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martyr ajay kumar
सोमवार 
सुबह 8:30 बजे अजय कुमार के शहीद होने की खबर आई
रात  9:30 बजे  पार्थिव शरीर में आर्मी हॉस्पिटल में आया 
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martyr ajay kumar
मंगलवार 
सुबह 8:15 बजे पार्थिव शरीर को लेकर हॉस्पिटल से गांव के लिए रवाना हुए सेना के जवान 
सुबह 11:30 बजे बसा टीकरी गांव में पहुंचा शहीद का पार्थिव शरीर 
सुबह 11:50 बजे घर से अंतिम यात्रा शुरू 
दोपहर 12:40 बजे आईटीआई कॉलेज के मैदान में पहुंचा, सैन्य सम्मान के साथ दी गई मुखाग्नि 
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martyr ajay kumar
18 गढ़वाल रेजीमेंट को मिली जिम्मेदारी
शहीद अजय के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी 18 गढ़वाल रेजीमेंट को दी गई। फूलों से सजे वाहन के आगे सैन्य और सिविल पुलिस के अधिकारियों का काफिला चल रहा था। रेजीमेंट के जवानों ने शस्त्रों द्वारा सलामी दी। इसके बाद पाइप बैंड द्वारा अजय को विदाई दी गई। 
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martyr ajay kumar
सेल्फी लेते रहे, लगते रहे नारे
पार्थिव शरीर के काफिले को देखकर औघड़नाथ मंदिर पर कई लोग हाथ जोड़कर खड़े हो गए। इसके अलावा चौराहों पर लोगों ने काफिले को अपने कैमरे में कैद किया और सेल्फी भी ली। वहीं, चौराहों पर लोगों ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। भारत माता के नारे और अजय कुमार अमर रहें के साथ काफिला आगे बढ़ता गया।
 

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सेना को खुली छूट
सरकार ने सेना को खुली छूट दी है। सेना सख्त कार्रवाई कर कर रही है। शहीद परिवार और लोगों की तरफ से जो मांग रखी गई हैं, उनको पूरा कराएंगे। दुख की इस घड़ी में हम सब परिवार के साथ खड़े हैं। - सत्यपाल सिंह, केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री 

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हंगामे पर डीआईजी ने संभाली व्यवस्था 
अंतिम संस्कार के दौरान एक युवक बार-बार हंगामा कर जूते पहने लोगों से हाथापाई को उतारू हो रहा था। कई बार पुलिस अधिकारियों ने उसे समझाया कि शहीद के अंतिम संस्कार के समय ऐसा न करे। लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुआ। हालात इस कदर खराब थे कि उक्त युवक बार- बार नेताओं से गालीगलौज कर रहा था। उक्त युवक से नेता भी डरे थे कि कहीं वह कोई गलत हरकत न कर दे।
 

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स्थिति को भांपते हुए डीआईजी अखिलेश कुमार ने व्यवस्था संभाली और उक्त युवक को पकड़कर उसे वहां से बाहर निकाला। तब जाकर नेताओं ने शहीद को पुष्प अर्जित कर श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने डीआईजी से कहा भी कि जिस युवक को वहां से खदेड़ा है, वही सबसे ज्यादा बखेड़ा कर रहा था।

 

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अंतिम यात्रा के रूट को लेकर रही जद्दोजहद  
शहीद अजय की अंतिम यात्रा के दौरान रूट को लेकर जमकर हंगामा हुआ। मिलिट्री अस्पताल से शुरू हुई अंतिम यात्रा के समय अजय के तहेरे भाई अमित कुमार की एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी से तीखी बहस हो गई।
परिजन मोदीनगर की तरफ से अंतिम यात्रा को ले जाने की मांग कर रहे थे। जबकि पुलिस अधिकारी जानी गंगनहर पटरी से अंतिम यात्रा निकालने के पक्ष में थे। बाद में सेना द्वारा तय रूट जानी गंगनहर पटरी मार्ग से ही अंतिम यात्रा निकली।

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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार सुबह सैनिक अधिकारियों द्वारा शहीद को श्रद्धांजलि देने के बाद रूट को लेकर जद्दोजहद शुरू हो गई। पुलिस और परिजनों के बीच बहस को लेकर अंतिम यात्रा को कई बार रोकना पड़ा। परिजनों ने कह दिया कि पुलिस ने अंतिम यात्रा के लिए जो रूट तय किया, वह हमें मंजूर नहीं है। एक घंटे से अधिक चले हंगामे के बाद सेना ने रूट तय किया।

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कंधे पर ले जाऊंगा भाई को
तहेरे भाई अमित कुमार ने कंधे पर रखकर भाई के पार्थिव शरीर को गांव तक ले जाने की चेतावनी दे दी। लेकिन सेना के अधिकारियों ने कहा कि पार्थिव शरीर हमारे पास है। अमित का कहना था कि मोदीनगर में हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए सड़क पर खड़े हैं। जिस पर एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी का कहना था कि मोदीनगर से अंतिम यात्रा के जाने पर जाम लगेगा। हमारी व्यवस्था जानी गंगनहर मार्ग की तरफ ले जाने के लिए की गई है। गंगनहर मार्ग को खाली करा दिया गया है। कई जगह बेरिकेडिंग भी की गई है।  

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पिता ने किया फोन
शहीद के पिता वीरपाल सिंह ने एसपी ट्रैफिक को फोन कर अंतिम यात्रा वाहन जानी गंगनहर की तरफ से लाने के लिए कहा। इस दौरान अंतिम यात्रा को कंकरखेड़ा बाईपास स्थित कैलाशी अस्पताल के पास रोककर एसपी ट्रैफिक ने अपने फोन से तहेरे भाई अमित की बात उसके चाचा से कराई। लेकिन, अमित सहित अन्य परिजन जानी गंगनहर रूट को लेकर राजी नहीं हुए। 
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एमआईटी कॉलेज के सामने  रुकी यात्रा
वहीं जानी इंस्पेक्टर सुभाष अत्री परिजनों को साथ लेकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने अंतिम यात्रा वाहन को एमआईटी के सामने रुकवाया। इस दौरान गांव से आए परिजनों और अंतिम यात्रा के साथ चल रहे परिजनों में बहस हो गई। सेना के अधिकारियों ने जानी गंगनहर मार्ग से ही अंतिम यात्रा को ले जाने का निर्णय लिया। इसके बाद परिजन माने। 
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