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कौन थे सेना के बहादुर अजय, जिन्होंने कई आतंकियों को किया ढेर, जांबाज की इस खूबी पर फिदा थे अफसर

Tue, 19 Feb 2019 06:20 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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martyr ajay kumar
पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने हर किसी को हिला कर रख दिया। सैनिकों की शहादत के उस मंजर को देखकर हर किसी की आंख भर आई। हर किसी का खून खौल उठा। हालांकि हमले के चंद घंटों के बाद ही हमले के मास्टरमाइंड को मौत के घाट उतार दिया गया। इस हमले में मेरठ के जांबाज शेर अजय कुमार ने भी आतंकियों से लोहा लेते हुए वीरगति प्राप्त की। वह उन जांबाजों में शामिल थे जिन्हें इस स्पेशल ऑपरेशन के लिए चुना गया था। आगे पढ़िए सेना के इस शेर की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी :-
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martyr ajay kumar
पुलवामा हमले के बाद देश भर में पाकिस्तान को उसकी इस कायराना हरकत का सबक सिखाने की मांग उठी और इसी बीच क्रांतिधरा के लाल अजय कुमार को आतंकियों से अपने साथियों की मौत का बदला लेने का मौका मिला। वह उस टीम का हिस्सा बने जो पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड का खात्मा करने के लिए बनाई गई थी। 

 
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martyr ajay kumar
अपने साथियों की शहादत का बदला लेने के लिए बैचेन अजय को स्पेशल ऑपरेशन पर जाने के लिए बेकरार थे। इसके बाद अजय ने रविवार रात को अपने परिवार में मां-पिता और पत्नी से बात की थी। एक तरफ वह उनसे दबे मन से कह रहे थे कि फिक्र मत करना, दूसरी और वह जानते थे कि अब जान हथेली पर रखकर दुश्मन का सामना करना है चाहे कुर्बान ही क्यों न होना पड़े लेकिन परिवार को उनकी फिक्र न हो इसलिए सुबह फोन करने की बात कहकर फोन रख दिया। 

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martyr ajay kumar
अजय ऑपरेशन पर जाने के लिए तैयार थे। अब बस आतंकियों को ठिकाने लगाना था। टीम के इस जांबाज ने आतंकियों से साथियों की मौत का बदला तो ले लिया लेकिन इसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
अजय का परिवार इस बात से अनजान था कि उनका बेटा पूरी रात दुश्मन से दो दो हाथ करता रहा। हालांकि परिवार की वह रात किस बेकरारी में गुजरी होगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। किसी तरह दिल को समझाकर परिजन रात में सो तो गए लेकिन जब सुबह हुई तो बेटे की शहादत की खबर ने घर में कोहराम मचा दिया।  

 
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martyr ajay kumar
अजय पहले भी सेना के कई विशेष अभियानों का हिस्सा रह चुके थे। बताया जाता है कि उनका निशाना इतना अचूक था कि दुश्मन का उनसे बच पाना मुश्किल ही थी। उनकी इसी खूबी के लिए उन्हें आतंकी गाजी की घेराबंदी कर उसका सफाया करने वाली टीम में शामिल किया गया था। उनके दोस्त अनिल ने बताया कि वह बारह से भी ज्यादा ऑपेरशनों को हिस्सा रह चुके थे। वह कहते हैं कि अजय शेर था उसे धोखे से गोली मारी गई। 
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शहीद अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
ऑपरेशन के दौरान दोनों आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया। लेकिन इसी दौरान दुश्मन की एक गोली अजय के सीने को छलनी करते हुए निकल गई और सेना का ये शेर वहीं शहीद हो गया। अजय की शहादत की खबर सबसे पहले अजय के जिगरी दोस्त को अनिल को ही मिली जो उस वक्त गांव में ही मौजूद थे।

वह बताते हैं कि पहले तो इस असमंजस में था कि आखिर परिजनों को कैसे इसकी खबर दे लेकिन फिर लगा कि ये परिवार नहीं पूरे देश का लाल है जो देश के लिए शहीद हो गया है। अब तो बताना पड़ेगा।
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martyr ajay kumar - फोटो : अमर उजाला
अजय के पिता वीरपाल सिंह भी सेना से रिटायर्ड हैं। अपने पिता को वर्दी में देखते हुए दोनों बेटे बड़े हुए। सैनिक भर्ती में जब यूनिट चुनने का मौका मिला तो अजय ने पहली पसंद 20 ग्रेनेडियर्स का चयन किया। अपने पिता के ही नक्शे कदम पर चलते हुए अपनी यूनिट का मान बढ़ाया। 
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martyr ajay kumar
सेना में भर्ती होने के बाद पहली तैनाती ग्लेश्यिर में हुई थी। इसके बाद अंडमान निकोबार द्वीप समुह पर भी तैनात रहे। अब 55 राष्ट्रीय राइफल्स में शामिल होकर जम्मू कश्मीर में तैनात थे। उनके पिता भी इसी यूनिट में तैनात थे।
इसलिए वह अक्सर अपने पिता से उनके अनुभव बांटते रहते। आज अजय के पिता को अपने बेटे की शहादत पर गर्व है लेकिन वह उनकी आंखों का तारा और परिवार का इकलौता सहारा उन्हें इतनी जल्दी अलविदा कह जाएगा। इसका उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था। 
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