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पितृपक्ष 2019: पितरों को खुश करने के लिए इन तरीकों से दें विदाई, हमेशा बना रहेगा आशीर्वाद

Thu, 26 Sep 2019 02:36 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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पितृपक्ष 2019 - फोटो : गूगल
धरती पर पितृ आशीर्वाद देने आ चुके हैं। धार्मिक घाटों पर पितृ कर्म किए जा रहे हैं, लेकिन ये तभी खुश होंगे जब उन्हें आप श्रद्धा भाव से विदाई देंगे। माना जाता है कि यदि पितरों को श्राद्ध समापन के दौरान सही ढंग से विदाई दी जाती है तो वे खुश रहते हैं और उनका आशीर्वाद आप पर हमेशा बना रहेगा। आगे जानें आखिर पूर्वजों को विदा करने की क्या हैं सही विधियां: -
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पितृपक्ष - फोटो : SOCIAL MEDIA
पितृ कार्यों में सर्वोत्तम होता है अमावस्या काल
जब सूर्य चन्द्रमा एक राशि पर हों या एक ही नक्षत्र पर हों तो वह समय अमावस्या काल कहा जाता है। यह काल पितृ कार्यों में सर्वोत्तम होता है। विशेष रूप से जब कन्या राशि में सूर्य-चन्द्रमा की युति होती हो तो उसे अमावस्या श्राद्धपक्ष या अमावस्या अश्विन या अमावस्या कन्यागत कहा जाता है। इस दिन पितृ अपने लोक से चलकर अपने बेटे, पौत्र के घर पर आकर बैठ जाते हैं तथा श्राद्ध काल में श्राद्ध स्थल पर उपस्थित होकर ब्राह्मणों के साथ वायु रूप में भोजन करते हैं। 
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पितृपक्ष में सोरों के हरिपदी में पहुंचे श्रद्घालु - फोटो : अमर उजाला
फल पुष्प जल से पितरों को करें तृप्त
अश्विन अमावस्या से मध्यान्ह काल में वह दरवाजे पर आकर बैठ जाते हैं। उस दिन यदि श्राद्ध नहीं किया जाता तो वह श्राप देकर लौट जाते हैं। अत: अमावस्या के दिन पत्र, पुष्प, फल, जल तर्पण से यथाशक्ति उनको तृप्त करना चाहिए। श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता एवं ज्योतिषाचार्य पंडित रोहित वशिष्ठ ने बताया कि श्रद्धा भाव से 28 सितंबर को अमावस्या पर पितृं को विदाई दें। इसके बाद 29 सितंबर से नवरात्र का पूजन शुरू होगा। 

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पितृ पक्ष पर श्राद्ध करते लोग - फोटो : अमर उजाला
ऐसें दें पितरों को विदाई
धरती से पितरों को विदा करने के लिए 28 सितंबर को पितृ अमावस्या के दिन अमावस्या की संध्याकाल में किसी भी नदी किनारे तीस घी की बत्तियां बनाकर किसी भी दोने में रखकर प्रवाहित करें तथा अपने पितृं या पितृ अमावस्या पर करते हुए उन्हें विदाई दें। उनसे अपने परिवार की कुशलक्षेम का आशीर्वाद लें तथा फिर अगले वर्ष आने का निमंत्रण दें। 
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पितृ पक्ष पर श्राद्ध करते लोग - फोटो : अमर उजाला
क्या आपने सार्वजनिक भूमि पर किया है श्राद्ध 
हालांकि श्राद्ध पक्ष 28 सितंबर को खत्म हो जाएगा। फिर भी जिनके परिजनों ने अब तक श्राद्ध नहीं किया है, वे एक बात विशेष ध्यान रखें कि श्राद्ध दूसरे के घर में, दूसरे की भूमि में, कभी नहीं करना चाहिए। जिस भूमि पर किसी का स्वामित्व ना हो या सार्वजनिक हो उस स्थान पर श्राद्ध किया जा सकता है। 
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श्राद्ध में जुटे लोग
दूसरे के घर श्राद्ध करने से पूर्वजों को नहीं मिलता हिस्सा
दूसरे के घर में जो श्राद्ध किया जाता है, उसमें श्राद्ध करने वाले पितृं को कुछ नहीं मिलता है। कुछ लोग नाना, नानी या किसी परिवार के बुर्जुग की मृत्यु के पश्चात सम्पत्ति बेच डालते हैं तथा फिर अपने पिता के यहां अमावस्या का श्राद्ध करते हैं। नाना, नानी को ऐसे श्राद्ध का हिस्सा कभी नहीं मिलता है। 
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धर्मकूप, मणिकर्णिका और दशाश्वमेध पर तर्पण-अर्पण और पिंडदान के लिए उमड़ेंगे वंशज - फोटो : अमर उजाला
अमावस्या के दिन जो श्राद्ध किया जाता है उसका बहुत महत्व कहा गया है। इस दिन जो भी आपके पितरों का नाम, गौत्र सहित उच्चारण करके दक्षिण दिशा की ओर मुख करके श्राद्ध करता है तथा श्रद्धापूर्वक जो भी अन्न, जल इत्यादि ब्राह्मणों को देता है तो वह उनको प्राप्त हो जाता है। 

देव लोक में उपस्थित पितृ अमृत के रूप में, गन्धर्व योनि में उपस्थित पितृं को भोग्य रूप में, पशु योनि में तृण रूप में, सर्प योनि में वायु रूप में, यक्ष योनि में पेय रूप में, दानव योनि में मास रूप में, प्रेत योनि में रूधिर रूप में, मानव योनि में अन्न रूप में वह उपलब्ध हो जाता है। 
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