धर्मकूप, मणिकर्णिका और दशाश्वमेध पर तर्पण-अर्पण और पिंडदान के लिए उमड़ेंगे वंशज
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अमावस्या के दिन जो श्राद्ध किया जाता है उसका बहुत महत्व कहा गया है। इस दिन जो भी आपके पितरों का नाम, गौत्र सहित उच्चारण करके दक्षिण दिशा की ओर मुख करके श्राद्ध करता है तथा श्रद्धापूर्वक जो भी अन्न, जल इत्यादि ब्राह्मणों को देता है तो वह उनको प्राप्त हो जाता है।
देव लोक में उपस्थित पितृ अमृत के रूप में, गन्धर्व योनि में उपस्थित पितृं को भोग्य रूप में, पशु योनि में तृण रूप में, सर्प योनि में वायु रूप में, यक्ष योनि में पेय रूप में, दानव योनि में मास रूप में, प्रेत योनि में रूधिर रूप में, मानव योनि में अन्न रूप में वह उपलब्ध हो जाता है।