मेरठ के औद्योगिक एरिया में स्थित गणपति पेट्रो और पारस केमिकल फैक्टरी में मिलावटी तेल के हुए भंडाफोड़ को सोमवार को 90 दिन पूरे हो गए3
हैं। अफसर बड़े-बड़े दावे करते रहे। इसकी गूंज लखनऊ तक पहुंची। लेकिन इस चर्चित प्रकरण में कार्रवाई अंजाम तक पहुंचनी तो दूर, अभी तक उसकी जांच में ही लीपापोती होती रही।
शहर के कई बड़े तेल व केमिकल कारोबारियों से मिलीभगत के आरोप लगे और शासन स्तर से ही कार्रवाई की बात कही जाती रही। लेकिन तीन माह में नतीजा शून्य ही रहा। पुलिस ने मौके पर दावा किया था कि भूमिगत टैंकों में 2.20 लाख लीटर केमिकल/मिलावटी तेल है। लेकिन आज तक इन भूमिगत टैंकों की खोदाई तो दूर, जांच तक नहीं हुई कि आखिर इन टैंकों में क्या भरा है और उसकी मात्रा क्या है।
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नकली ऑयल
- फोटो : अमर उजाला
दोनों केमिकल फैक्टरी परतापुर और टीपीनगर थाना क्षेत्र में हैं। आईजी के निर्देश पर मिलावटी तेल का भंडाफोड़ 20 अगस्त को किया गया तो थाना पुलिस कार्रवाई से दूर रही। जिसका नतीजा यह हुआ कि अगले दिन टीपीनगर और परतापुर थाना प्रभारी व आपूर्ति विभाग के दो एआरओ हटाए गए।
तेल प्रकरण की जांच के लिए आईपीएस अविनाश पांडेय के नेतृत्व में एसआईटी बनाई गई। जिसमें दो इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। कार्रवाई के समय मौके से गिरफ्तार कारोबारी राजीव जैन समेत दस लोगों को गिरफ्तार किया गया। जिससे पूछताछ में सामने आया कि मेरठ, बागपत, बिजनौर और हरियाणा के पेट्रोल पंपों पर मिलावटी तेल सप्लाई किया जाता था।
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पेट्रोल पंप
- फोटो : अमर उजाला
मिलावटी तेल में डीजल/ पेट्रोल को केमिकल से बनाया जाता था और फिर टैंकरों से भेजा जाता था। जहां कार्रवाई हुई वहां भूमिगत टैंक हैं। सभी में केमिकल/मिलावटी तेल भरा है। सभी टैंकों में तेल निकालने के लिए पंपिंग सेट व नॉजेल लगे हुए हैं।
कार्रवाई के समय यहां दो सिपाहियों की ड्यूटी लगाई गई। रविवार को भी मौके पर एक पुलिसकर्मी तैनात था। पुलिस जल्द ही आरोपियों पर चार्जशीट लगाने की बात कह रही है। लेकिन अभी तक भूमिगत टैंकों की खोदाई तक नहीं हुई।
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पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी
- फोटो : अमर उजाला
तेल डिपो पर मिला था स्टॉक
मिलावटी तेल के पकड़े जाने के बाद प्रशासन की टीम ने सात सितंबर को संजय कुमार के रतिराम खूबचंद तेल डिपो पर छापा मारा था। जिसके बाद तेल कारोबारियों में खलबली मच गई। जिसमें 71 हजार लीटर केेरोसिन का स्टॉक अधिक पाया गया। यहां भी भूमिगत टैंकों में केरोसिन भरा बताया गया।
पीछे हट गए थे अफसर
21 अगस्त को पुलिस ने शहर के तीन पेट्रोल पंपों पर सील लगाई थी। आरोप थे कि इन पेट्रोल पंपों पर मिलावटी तेल सप्लाई होता था। लेेकिन सात घंटे में ही अफसर पीछे हट गए थे। तीनों पेट्रोल पंपों पर पुलिस द्वारा लगाई गई सील को डीएसओ के निर्देश पर खोल दिया गया था। जिसको लेकर अफसरों की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे।
मुकदमे पर मांगी जाएगी रिपोर्ट
शासन के वरिष्ठ अधिकारी इस पर जांच करेंगे कि आवश्यक वस्तु अधिनियम का केस जिलाधिकारी की अनुमति पर ही दर्ज किया जाता है। ऐसे में पुलिस ने यह केस कब दर्ज किया। एक मुकदमे में छापा मारने में इंस्पेक्टर प्रशांत कपिल वादी हैं, जबकि दूसरे मुकदमे में इंस्पेक्टर आशुतोष कुमार वादी हैं। प्रशांत कपिल सपा सरकार में टीपीनगर सहित कई थानों में प्रभारी रह चुुके हैं। वहीं आशुतोष कुमार बसपा सरकार में कई थानों में एसओ रह चुुके हैं।
सैंपल रिपोर्ट को लेकर सवाल
जिन तीन पेट्रोल पंपों पर डीजल व पेट्रोल के सैंपल लिए ग्रए, इन सैंपलों को आपूर्ति विभाग ने फोरेंसिक लैब निवाड़ी गाजियाबाद भेजा था। जबकि केमिकल के सैंपल एफएसएल गाजियाबाद दिल्ली भेजे गए। एफएसएल रिपोर्ट ओके बताई गई। बाद में केमिकल के सैंपल आईआईटी रुड़की भेजे गए। आईआईटी से केमिकल के रासानियक घटक अलग-अलग मात्रा में बताए और बिंदुवार रिपोर्ट मेरठ पुलिस को भेज दी गई थी।