सुमन बताती हैं, पीरियड आज भी छुआछूत है। इसको लेकर समाज में कई भ्रांतियां फैली हुई हैं। बाहर जाने वाली लड़कियां, महिलाएं पैड यूज करती हैं। 30 वर्ष से आगे बढ़कर महिलाएं कपड़े पर आ जाती हैं। हर महिला इस तकलीफ को झेल रही है। उन्हें यह सोचना होगा, हमें अपनी जरूरत खुद भी तो है। खुद से प्यार करना जरूरी है।
हम लोग उन गांवों में ज्यादा काम करते हैं, जो शहर से 10-20 किमी दूर हैं। अब हम न पैड की बात करते हैं और न कपड़े की। हमारा मुख्य मुद्दा स्वच्छता रहता है। निम्न मध्यम वर्ग के पास पैड के लिए पैसे नहीं हैं। ऐसे में उनके पास जो उपलब्ध है, उसे बेहतर तरीके से कैसे इस्तेमाल कर सकती हैं, ये उन्हें बताते हैं।