मेरठ जनपद में सरूरपुर क्षेत्र का गांव धनवालगढ़ उर्फ धनवाली खेड़ा के बारे में बताया जाता है कि हजारों वर्ष पूर्व आए भूचाल के कारण जमीन पलट गई थी। जिसके चलते गांव की जगह पर पेड़ व घासफूस उग आए थे। पुराने लोग बताते थे कि कुछ दिनों बाद महाभारत काल में पांचों पांडव वनवास के दौरान वनों में स्थित बरगद के पेड़ पर धनुर्धारी अर्जुन अपने धनुष बाण रखकर वनों में अपने भाइयों के साथ चले गए थे।
करीब 40 साल से उज्जड़ खेड़ा के आश्रम में रहने वाले मौनी बाबा बताते हैं कि किवदंती के अनुसार हजारों वर्ष पूर्व एक भूचाल आया था, जिसमें सब कुछ बर्बाद और तहस नहस हो गया था। सरकारी अभिलेखों में गांव धनवाली खेड़ा के नाम से रकबा देखा गया।