हरियाणा और पंजाब की अर्थव्यवस्था को अपने पसीने से सींचने वाले बिहार और पूर्वांचल के मजदूरों का दुख किसी को नहीं दिखा। वे मालिकान, जिनके लिए रात-दिन एक कर दिया, उनके लिए दो माह की रोटी का भी इंतजाम न कर पाए। सरकारों ने भी साथ न दिया तो खुद के भरोसे निकल पड़े हजारों किलोमीटर के सफर पर, लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि इस सफर में खून भी बहाना पड़ेगा।