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अनोखी दोस्ती: 12 साल से नेवलों की महंत से है मित्रता, कभी कोबरा से बचाई थी साधु की जान, अब रहते हैं साथ

Sat, 14 Jan 2023 08:00 AM IST
Dimple Sirohi रविंद्र चौहान, अमर उजाला, मेरठ/हस्तिनापुर
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महंत व नेवले - फोटो : अमर उजाला
कहते हैं प्यार कभी जाति-पाति ऊंच-नीच के आधार पर नहीं होता, जिस पर दिल आ जाए उसी से प्यार हो जाता है। इसमें पशु पक्षी और जानवर भी शामिल होते हैं। ऐसी ही एक अद्भुत कहानी है मेरठ से सटे हस्तिनापुर की। जहां खादर क्षेत्र के गांव तारापुर में स्थित सागर कुटी के महंत सागर गिरी महाराज की जो पिछले 12 वर्षों से नेवलों से प्यार करते हैं और नेवले भी उनके शिष्य की तरह उनकी हिफाजत करते हैं। महंत और नेवलों की ये अनोखी दोस्ती इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। आइए जानते हैं गुरु शिष्य की यह अद्भुत कहानी। 
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नेवले - फोटो : Amar ujala
हस्तिनापुर खादर क्षेत्र के गांव तारापुर में सागर कुटी स्थित है। जहां पर श्री श्री 108  सागर गिरी जूना अखाड़ा महंत स्थित है, जो पिछले 15 वर्षों से यहां पर कुटी बनाकर रहते हैं। उन्होंने  एक अद्भुत और आश्चर्यचकित कर देने वाली कहानी बताई जो हर किसी को रोमांचित कर रही है।
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Mongoose - फोटो : Amar ujala
महंत ने जंगल में रहने वाले दुर्लभ प्रजाति के नेवलों की कहानी बताई। उन्होंने बताया कि 2010 में खादर क्षेत्र में गंगा की भीषण बाढ़ आई, इस कारण लोग छतों पर चढ़ गए। खादर क्षेत्र के तीन दर्जन से भी ज्यादा गांव में पानी भर गया था। लोगों की मदद के लिए सेना लगाई गई थी।

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Mongoose - फोटो : Amar ujala
महंत ने बताया कि जंगली जीव भी जान बचाने के लिए उधर-उधर भटक रहे थे। उन्होंने बताया कि उनकी कुटी के चारों ओर चार से पांच फीट पानी भरा हुआ था। उसी समय करीब आधा दर्जन नेवले पानी में बहते हुए उनकी कुटी के पास पहुंचे, जिन्हें देखते हुए महंत ने उन्हें अपनी कुटी में शरण दी और उन्हें भोजन दिया।
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Mongoose - फोटो : Amar ujala
महंत के मुताबिक पानी कम होने तक नेवले कुटी में ही रुके। उसके बाद गंगा का पानी उतर गया और नेवले वापस जंगल में चले गए  लेकिन महंत खुद उस वक्त हैरान रह गए जब नेवले अगले ही दिन वापस आ गए। महंत ने उन्हें फिर से भोजन दिया और उसके बाद से करीब 12 वर्षों से यह सिलसिला चल रहा है।
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Mongoose - फोटो : Amar ujala
महंत ने बताया कि नेवले आज भी कुटी के आसपास रहते हैं, जिन्हें दिन में दो बार वह भोजन भी कराते हैं। महंत नेवलों को अपना शिष्य मानकर उनकी खातिरदारी और सुरक्षा करते हैं तो वहीं नेवले भी अपने गुरु की एक आवाज पर दौड़े चले आते हैं। 
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नेवले - फोटो : अमर उजाला
नेवलों ने कोबरा से बचाई थी महंत की जान
महंत ने बताया कि कुछ दिन पहले एक विशाल कोबरा उनकी कुटी में आ पहुंचा जिसे देखकर वह पूरी तरह भयभीत हो गए। उन्होंने अपने शिष्य नेवलों को आवाज लगाई। उनकी एक आवाज पर हर रोज की तरह नेवले दौड़कर चले आए और विशाल कोबरा को लहूलुहान कर कुटी से भगा दिया। उसके बाद महंत ने राहत की सांस ली, जिसके बाद से महंत भी नेवलों को अपने शिष्यों की तरह रखते हैं।
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नेवले - फोटो : अमर उजाला
बेहद चौकन्ना होता है नेवला
नेवला बेहद चौकन्ना होता है वह कभी भी किसी भी व्यक्ति को नजदीक नहीं आने देता और न किसी के नजदीक जाता है। लेकिन यहां नजारा अलग ही है। वहीं महंत इन नेवलों के इस प्यार को देखने के लिए दूर-दूर से लोग उनकी कुटी पर पहुंचते हैं।

आओ-आओ की आवाज पर दौड़ कर आते हैं नेवले
महंत सागर गिरी महाराज ने बताया कि नेवले जंगल में चाहे कितनी भी दूर चले जाएं। जब भी वह आओ-आओ की आवाज देते हैं तो वे अपने गुरु के एक ही आदेश पर तुरंत कुटी पर हाजिर हो जाते हैं। यकीनन यह आश्चर्यचकित कर देने वाला गुरु शिष्य का प्यार अद्भुत नजर आ रहा है।
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