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रविता-अमरदीप को मृत्युदंड: 86 दिन में 703 बार बात, ऐसे हुई दोस्ती; अब रविता का कैदी नंबर 399 और अमरदीप का 400

Sat, 17 Oct 2026 11:12 AM IST
Sharukh Khan दिशांत त्रिवेदी, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ

सार

मेरठ के अमित कश्यप हत्याकांड में 553 दिन के इंतजार के बाद इंसाफ मिला है। 87 तारीखें और 12 गवाहों की गवाही ने दोषियों को फांसी के सजी मिली है। रविता और अमरदीप के खिलाफ अमित के परिजन और एडीजीसी लगातार पैरवी करते रहे। मां-भाई और सपेरे की गवाही ने दोषियों को फंदे तक पहुंचाया। यह हत्याकांड 13 अप्रैल 2025 को हुआ था।
 
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meerut murder - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
मेरठ के अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत द्वारा दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) सुनाए जाने के बाद मृतक के परिजनों को आखिरकार सुकून मिला है। 12 अप्रैल 2025 से शुरू होकर शुक्रवार को आए फैसले तक कुल 553 दिन लगे और 87 तारीखों की सुनवाई हुई। विशेष लोक अभियोजक (एडीजीसी) फरजाना मकसूद के नेतृत्व में अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए। 

पुलिस द्वारा जुटाए गए अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों की अचूक कड़ियों के कारण दोषी पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को कानून से कोई मदद नहीं मिल सकी। इस पूरे मुकदमे की नींव मुख्य रूप से तीन गवाहियों (अमित की मां, भाई और सपेरा) पर टिकी रही, जिन्हें अदालत ने सबसे अहम माना।
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रविता, उसका प्रेमी अमरदीप। पति अमित की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
मां ने रविता और अमरदीप को आपत्तिजनक हालत में पकड़ा था
मां मुनेश देवी और भाई मोनू

दोनों इस केस के मुख्य गवाह रहे। उन्होंने अदालत के सामने गवाही दी कि हत्या वाली रात उन्होंने अमरदीप को अपने घर में प्रवेश करते हुए देखा था। एडीजीसी ने कोर्ट में दलील दी कि वारदात से कुछ समय पहले मां मुनेश देवी ने ही रविता और अमरदीप को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा था जिसके बाद से अमित दोनों के अवैध संबंधों का कड़ा विरोध करने लगा था।

 
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अमरदीप और रविता। - फोटो : अमर उजाला
सपेरा कीर्तन (सपेरा)
सपेरे कीर्तन ने अदालत में मुख्य आरोपी अमरदीप की सीधे पहचान की। उसने बताया कि अमरदीप ने माता के जागरण में पूजा का बहाना बनाकर उससे 1,000 रुपये में सांप खरीदा था।
 

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आरोपी पत्नी रविता व प्रेमी अमरदीप - फोटो : अमर उजाला
रविता ने हाथ पकड़े, अमरदीप ने घोंटा गला
पुलिस द्वारा कोर्ट में दाखिल आरोप पत्र (चार्जशीट) के अनुसार, हत्या की रात बेहद खौफनाक थी। जब अमित गहरी नींद में थे तब रविता ने अमित के हाथ कसकर पकड़ लिए थे और प्रेमी अमरदीप ने उनका गला, नाक व मुंह दबाकर उसे मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद साक्ष्य छिपाने और हत्या को सांप से डंसने की दुर्घटना साबित करने के लिए उन्होंने शव के पास चारपाई पर सांप छोड़ दिया था।
 
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अमित, रविता और अमरदीप। - फोटो : अमर उजाला
86 दिन में 703 बार बातचीत
सीडीआर रिपोर्ट ने खोली पोल

टेलीकॉम कंपनियों के नोडल अधिकारियों के बयान और कोर्ट में पेश की गई कॉल डिटेल रिकॉर्ड से दोनों के प्रेम-प्रसंग की पूरी तरह पुष्टि हो गई। 18 जनवरी 2025 से 13 अप्रैल 2025 तक (86 दिनों में) रविता और अमरदीप के बीच कुल 703 बार फोन पर बातचीत हुई थी। रविता ने कोर्ट में खुद को बचाने के लिए यह झूठा दावा किया कि जिस मोबाइल से बातचीत हुई थी उसे उसका पति अमित इस्तेमाल करता था लेकिन अदालत ने इस बेतुकी दलील को सिरे से खारिज कर दिया।

 
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अमित हत्याकांड की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हत्या से पहले पति के साथ शाकुंभरी देवी के दर्शन
इस जघन्य हत्याकांड की पटकथा पहले ही तैयार की जा चुकी थी। इसके तहत 12 अप्रैल 2025 यानि वारदात से ठीक एक दिन पहले अमित और रविता माता शाकुंभरी देवी के दर्शन करने गए थे। योजना के तहत अमरदीप ने शाम को ही सपेरे से सांप का इंतजाम किया और उसे अकबरपुर सादात गांव के बाहर एक थैले में बंद कर झाड़ियों में छुपा दिया।
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आरोपी प्रेमी अमरदीप की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रात को रविता ने अपने पति अमित और सास मुनेश देवी को खाने में नींद की गोलियां दे दीं। हालांकि, सास मुनेश देवी पहले से कुछ अन्य दवाइयां खाती थीं, जिसके कारण उन पर नींद की गोली का ज्यादा असर नहीं हुआ और रात में उनकी नींद खुल गई, जिससे उन्होंने अमरदीप को घर में घुसते देख लिया।
 

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आरोपी पत्नी रविता की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऐसे हुई अमरदीप और रविता की दोस्ती
अमित के भाई मोनू कश्यप ने बताया कि अमित और अमरदीप दोनों साथ में टाइल्स लगाने (मिस्री) का काम करते थे। इसी काम के सिलसिले में अमरदीप का अमित के घर आना-जाना शुरू हुआ और रविता से उसकी नजदीकियां बढ़ गईं। अमित के कत्ल और रविता के जेल जाने के बाद अब उसकी दो छोटी बेटियों और एक बेटे का पालन-पोषण अमित की वृद्ध माता और भाई मोनू कर रहे हैं।

 

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meerut murder - फोटो : अमर उजाला
पर्ची में लिखकर दिया अपना मोबाइल नंबर
अमित के घर पर अमरदीप का काफी आना-जाना था। अमित के घर पर आकर वह कई बार दाल चावल और छोले भटूरे खाकर गया था। इसी दौरान उसकी रविता से नजदीकी बढ़ती गई। फिर कुछ दिन बाद उसने एक पर्ची में अपना मोबाइल नंबर लिखकर रविता को थमा दिया। इसके बाद दोनों की बातें कॉल पर शुरू हो गई और फिर मिलना-जुलना शुरू हो गया। 

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आरोपी पत्नी - फोटो : अमर उजाला
मामले में अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह
  • गवाह नंबर 1 : मोनू कश्यप (वादी मुकदमा / मृतक का भाई)
  • गवाह नंबर 2 : मुनेश (तथ्य साक्षी)
  • गवाह नंबर 3 : कृष्ण (सपेरे का धेवता)
  • गवाह नंबर 4 : प्रीतमनाथ (सपेरा कृष्ण का नाना)
  • गवाह नंबर 5 : दरोगा पंकज गौतम (पंचायतनामा भरने वाले दरोगा)
  • गवाह नंबर 6 : कांस्टेबल क्लर्क रामप्रवेश (चिक लेखक / एफआईआर दर्ज करने वाले)
  • गवाह नंबर 7 : डॉ० कपिल गर्ग (पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक)
  • गवाह नंबर 8 : उपनिरीक्षक इन्दु वर्मा (विवेचक / जांच अधिकारी)
  • गवाह नंबर 9 : शुभम शर्मा (नोडल अधिकारी - वोडाफोन)
  • गवाह नंबर 10 : लोकेश कुमार (नोडल अधिकारी - रिलायंस जियो)
  • गवाह नंबर 11 : सुखपाल (अमित की मृत्यु के बाद सांप पकड़ने वाला)
  • गवाह नंबर 12 : पिंटू (अमित की मृत्यु के बाद सांप पकड़ने वाला)

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आरोपी पत्नी - फोटो : अमर उजाला
रविता का कैदी नंबर 399 और अमरदीप का 400
रविता और अमरदीप को जेल प्रशासन ने क्रमश: कैदी नंबर 399 और 400 आवंटित किया है। दोनों को कैदियों की पोशाक सौंप दी गई है। जेल सूत्रों के अनुसार मानसिक तनाव के कारण दोनों ने रात का खाना वापस कर दिया जिसके बाद जेल में उनका ब्लड प्रेशर चेक कराया जा रहा है। अब उनसे जेल मैनुअल के तहत ही काम लिया जाएगा।

 

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अमित हत्याकांड में दोषियों को फांसी की सजा मिलने के बाद अमित की मां के छलके आंसू - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दूसरी ओर सौरभ हत्याकांड में मौत की सजा पाए दोषी मुस्कान और साहिल ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा को प्रार्थना पत्र देकर हाई कोर्ट में अपील करने की इच्छा जताई है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि दोनों के पास एक महीने के भीतर अपील करने का विकल्प है। चूंकि उनके परिजन पैरवी नहीं कर रहे हैं इसलिए जेल मैनुअल के अनुसार स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के माध्यम से जेल अपील दाखिल कराई जाएगी। इसके लिए कोर्ट से मृत्युदंड के आदेश और जरूरी पत्रावली (दस्तावेज) मांगी गई है।

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अमित हत्याकांड में दोषियों को सुनाई गई सजा एडीजे 12 जयबीर सिंह नागर की कोर्ट के बाहर लगी भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अदालत ने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के इन मामलों का दिया हवाला
बच्चन सिंह बनाम पंजाब राज्य (1980)

यह मृत्युदंड के मामलों में विरल से विरलतम के सिद्धांत को स्थापित करने वाला ऐतिहासिक संवैधानिक बेंच का मामला है। इसमें हत्या के अपराध में मृत्युदंड की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि मृत्युदंड केवल सबसे जघन्य और दुर्लभ मामलों में ही दिया जाना चाहिए जबकि आजीवन कारावास सामान्य नियम है।
 

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अमित हत्याकांड में दोषियों को सुनाई गई सजा एडीजे 12 जयबीर सिंह नागर की कोर्ट के बाहर लगी भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मच्छी सिंह बनाम पंजाब राज्य (1983)
इस मामले में एक ही परिवार के कई सदस्यों की बेरहमी से हत्या की गई थी जिससे पूरे समाज में दहशत और आक्रोश फैल गया था। सुप्रीम कोर्ट ने विरल से विरलतम सिद्धांत को व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए मृत्युदंड को बरकरार रखा था।

 

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निर्भया की मां आशा देवी - फोटो : एएनआई
मुकेश बनाम दिल्ली राज्य (निर्भया केस) (2017)
देश को झकझोर देने वाला जघन्य सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का मामला था जिसमें एक पैरामेडिकल छात्रा के साथ अमानवीय कृत्य कर उसकी हत्या कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड (फांसी) की सजा को सही ठहराया था।

 

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अमित हत्याकांड में दोषियों को फांसी की सजा मिलने के बाद अमित की मां के छलके आंसू - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रामनरेश एवं अन्य बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (2012)
यह जघन्य हत्या के मामलों में सजा के निर्धारण से जुड़ा प्रसिद्ध मामला है जिसमें अदालत ने सजा बढ़ाने और कम करने वाली परिस्थितियों की व्यापक सूची तैयार की थी। कोर्ट ने क्राइम टेस्ट और रेयरेस्ट ऑफ द रेयर के आधार पर यह तय किया कि अमानवीय और विश्वासघात वाले अपराधों में मृत्युदंड दिया जाना न्यायसंगत है।

 

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न्यायाधीश जयवीर सिंह नागर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राम सिंह बनाम सोनिया (2007)
इस मामले में एक ही परिवार के कई सदस्यों (बच्चों सहित) की सुनियोजित और शैतानी तरीके से बेरहमी से हत्या की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि इतनी क्रूरता और बिना किसी उकसावे के की गई हत्याओं के दोषियों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है इसलिए मृत्युदंड पूरी तरह उचित है।

 

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अमित हत्याकांड में दोषियों को फांसी की सजा मिलने के बाद अमित की मां के छलके आंसू - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शबनम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2015)
इस सनसनीखेज मामले में एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही परिवार के 7 सदस्यों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी महिला का महिला होना या उसकी कम उम्र होने के तर्कों को खारिज करते हुए मृत्युदंड को बरकरार रखा।

 

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अमित हत्याकांड में दोषियों को सुनाई गई सजा एडीजे 12 जयबीर सिंह नागर की कोर्ट के बाहर लगी भीड़ - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
स्टेट ऑफ पंजाब बनाम सौरभ बक्सी (2015)
यह लापरवाही से ड्राइविंग और अपराधों में अनुचित नरमी दिखाने से जुड़े न्याय प्रणाली के प्रभावों पर विचार करने वाला मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुचित सहानुभूति या कम सजा देने से न्याय प्रणाली कमजोर होती है और कानून के प्रति लोगों का विश्वास उठता है।

 
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अमित हत्याकांड में दोषियों को सुनाई गई सजा, किसी काम से कोर्ट आईं महिलाओं ने भी रविता और अमरदीप को ग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खाड़ा शशिकला बनाम स्टेट आफ आन्ध्र प्रदेश (2017)
यह भी सजा के सिद्धांतों और अपराध की गंभीरता के अनुपात में उचित सजा सुनिश्चित करने से संबंधित निर्णय है। अदालत ने कहा था कि कुछ मामलों में निवारक सजा देना अत्यंत आवश्यक होता है ताकि समाज में कानून का डर बना रहे।
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