जंग-ए-क्रांति का आगाज करने वाली मेरठ की माटी ने संगीत के कई दिग्गजों को जन्म दिया तो शब्दों के चितेरे भी इस भूमि से निकले। हिंदी फिल्मों को गीतकवि स्व. भारतभूषण से लेकर साहित्यकार स्व. वेदप्रकाश शर्मा और उपन्यासकार सुरेश जैन रितुराज जैसे नामचीन हीरे मेरठ की खान से निकले। इनकी सोच, कल्पनाएं जब शब्दों में ढली तो अद्भुत, अविस्मरणीय साहित्य बनकर दुनिया में छा गईं। निज उन्नति में हिंदी की मिठास बेशक हमें बोझिल महसूस होती हो, मगर मेरठ के साहित्य शिल्पियों की कृतियों ने बॉलीवुड से विदेश तक नाम कमाया। आज इस शहर के युवा अपनी हिंदी लेखन विधा से दुनिया में नाम कमा रहे हैं। हिंदी के जिस गुरुत्व को मेरठ के गीतकवि स्वर्गीय भारतभूषण और वेदप्रकाश शर्मा ने महसूस किया वो सम्मान आज भी मेरठ को युवा साहित्यकारों के माध्यम से मिल रहा है। यही नहीं अंग्रेजी के साथ डिजिटल क्रांति के दौर में मेरठ के शब्द चितेरों की रचनाएं विश्व पटल पर चमक रही हैं।