फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चौंकाने वाला दावा, 500 करोड़ से ज्यादा की छाप चुके एनसीईआरटी की नकली किताबें, पढ़िए पूरा अपडेट

Mon, 24 Aug 2020 06:06 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
1 of 6
फर्जी किताबों का गोदाम - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में करीब 500 करोड़ से भी अधिक कीमत की एनसीईआरटी की नकली किताबें भाजपा नेता संजीव गुप्ता और सचिन गुप्ता के टीएनएचके पब्लिकेशन में छप चुकी हैं। नई दिल्ली से जांच के लिए आई एनसीईआरटी की टीम ने अंदेशा जताया है कि काफी लंबे समय से नकली किताब छापने का धंधा चल रहा था।
विज्ञापन

2 of 6
किताबें बरामद - फोटो : अमर उजाला
वहीं, पुलिस का कहना है कि परतापुर के अच्छरौंडा गांव में करीब डेढ़ साल पहले किताबों को रखने के लिए गोदाम किराए पर लिया गया था। परतापुर पुलिस और एसटीएफ ने इस गोदाम के अलावा मोहकमपुर स्थित फैक्टरी को भी सील कर दिया है। हालांकि एनसीईआरटी की टीम का दावा है कि काफी लंबे समय से मशीनें नकली किताबें छाप रही है। ऐसे में यह भी सवाल सामने आ रहा है कि क्या अच्छरौंडा गांव से पहले भी कहीं दूसरी जगह एनसीईआरटी की नकली किताबें छापने का धंधा चल रहा था। 
विज्ञापन

3 of 6
नकली किताबें - फोटो : अमर उजाला
त्योहारों पर देते हैं स्कूल प्रबंधन को उपहार
शहर में एक मात्र प्रिंटिंग प्रेस संचालक ही हैं जो स्कूलों में शिक्षकों से लेकर स्कूल प्रबंधन को होली दीपावली और अन्य त्योहारों पर महंगे उपहार देते हैं। उपहार देने के पीछे स्कूल को अपने से जोड़कर रखना ही एकमात्र उद्देश्य होता है। इसके साथ कुछ शिक्षकों को महंगे उपहार इसलिए उपलब्ध कराए जाते हैं कि शिक्षक छात्रों को रेफरेंस के लिए उनकी किताबों को खरीदने के लिए बाध्य करें। इस पूरे खेल में मोटा मुनाफा कामना ही एक मात्र उद्देश्य होता है। नकली किताबें छापने से लेकर उनकी मार्केटिंग करने वाले इस पूरे नेटवर्क को चलाते हैं।

4 of 6
कई तरह की किताबें बरामद की गईं - फोटो : अमर उजाला
इसी साल की निकलीं 18 लाख किताबें
एसटीएफ द्वारा मेरठ और गजरौला में एनसीईआरटी की 18 लाख किताबें पकड़ी गईं हैं। जांच में सामने आया है कि ये किताबें सत्र 2020 की ही हैं। सूत्रों ने बताया कि मेरठ और गजरौला में प्रकाशित की गईं करीब 56 लाख नकली किताबें यूपी और दूसरे राज्यों में खपा दी गई हैं। मेरठ और गजरौला में बरामद किताबों की संख्या 18 लाख है। वहीं इनसे तीन गुना किताबें इस सत्र में अलग-अलग स्थानों पर सप्लाई की गई हैं। एसटीएफ की जांच पड़ताल में सामने आया है कि करीब नौ साल से यह गिरोह अलग-अलग स्थानों पर एनसीईआरटी की नकली किताबें छाप रहा था। प्रत्येक वर्ष की छात्रों की संख्या को देखते हुए एसटीएफ और पुलिस मान रही है कि करीब 8-9 साल में यह गिरोह छह करोड़ किताबें छाप चुका है। 
विज्ञापन

5 of 6
नकली किताबें - फोटो : अमर उजाला
दूसरे जिलों में गोदामों पर नजर 
एसटीएफ के अनुसार मेरठ और गजरौला के बाद दूसरे जिलों में भी इस गिरोह के गोदाम और प्रिंटिंग प्रेस हो सकती हैं। एसटीएफ की एक टीम गाजियाबाद में जांच कर रही है। वहीं, परतापुर पुलिस जांच के लिए प्रत्येक प्रकार की किताबों के दो-दो सैंपल एनसीईआरटी कार्यालय में भेजेगी। एनसीईआरटी की फोरेंसिक विंग किताबों की जांच करेगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
एसटीएफ मेरठ के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। करोड़ों रुपये के सामान की एक दिन में रिकवरी करना सराहनीय है। इस गिरोह का पर्दाफाश होना जरूरी था। - कुलदीप नारायण, एसपी एसटीएफ मेरठ यूनिट

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें