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आज मंगल का मीन राशि में प्रवेश, प्राकृतिक आपदा के योग, इन चार राशि के लिए रहेगा अच्छा

Thu, 18 Jun 2020 09:59 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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कल मंगल का मीन राशि में प्रवेश होगा - फोटो : सोशल मीडिया
ज्योतिष के अनुसार मई से जून माह के बीच छह ग्रह वक्री होने हैं। 11 मई को शनि, 13 मई को शुक्र और 14 मई को गुरु वक्री हुए। राहु, केतु तो हमेशा ही उल्टी चाल चलते हैं। आज 18 जून को सुबह 10:25 बजे से बुध ग्रह संवत्सर 2077 के राजा भी अपनी स्व राशि मिथुन में वक्री हो जाएंगे। यह परिवर्तन मेष, सिंह, मिथुन और कन्या राशि के लिए बहुत अच्छा है।
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मेष राशि
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब ग्रह वक्री होते हैं तो उनका व्यवहार उग्र हो जाता है। शनि 29 सितंबर तक वक्री चाल ही चलेंगे। ऐसे में प्राकृतिक आपदा, भूकंप, तूफान, दुर्घटना में जान-माल की हानि भी आशंका है।
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ग्रह - फोटो : Pixabay
मंगल का राशि परिवर्तन 
मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल 18 जून को मीन राशि में प्रवेश करेगा। यह कर्क, सिंह, मीन, कन्या राशि के लिए अच्छा नहीं होगा। मकर और कुंभ के लिए सामान्य स्थिति रहेगी। ऐसे हालातों में समाज में लड़ाई झगड़े बढ़ेंगे।

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ग्रह - फोटो : Pixabay
ग्रहों की वक्री और मार्गी गति 
आचार्य कौशल वत्स के अनुसार, ज्योतिषशास्त्र में नौ ग्रहों में सिर्फ सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री नहीं होते। जबकि दो ग्रह राहु और केतु कभी मार्गी यानी सीधी चाल नहीं चलते हैं। अन्य पांच ग्रह समय-समय पर उलटी और सीधी यानी वक्री और मार्गी चाल से चलते रहते हैं।
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ग्रह - फोटो : Social media
वक्री ग्रह बनाते हैं जीवट 
आचार्य भारत भूषण के अनुसार, कुंडली में ग्रहों का वक्री होना सामान्य रूप से अच्छा नहीं माना जाता है। इससे ग्रहों का शुभ प्रभाव और उनके परिणाम मिलने में कमी आ जाती है। ऐसे लोग जिनकी कुंडली में उग्र ग्रह मंगल, शनि, वक्री होते हैं, बहुत ही जीवट होते हैं। इनमें संघर्ष करने की क्षमता आ जाती है।
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ग्रह - फोटो : Pixabay
ज्योतिष विज्ञान में वक्री का अर्थ  
सभी ग्रह घड़ी की सुई की विपरीत दशा में सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। कभी-कभी इनकी गति विपरीत दिशा में अर्थात पश्चिम से पूर्व प्रतीत होती है, उसे ग्रह की वक्री अवस्था कहते हैं। हालांकि कोई भी ग्रह कभी भी पीछे की ओर नहीं चलता यह भ्रम मात्र है। घूमती हुई पृथ्वी से ग्रह की दूरी और पृथ्वी और उस ग्रह की अपनी गति के अंतर के कारण ग्रहों का उलटा चलना प्रतीत होता है।

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