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हैरान कर रहा कृषि कानूनों के विरोध का ये तरीका, खड़ी फसलों पर ट्रैक्टर चला रहे किसान, देखिए तस्वीरें

Fri, 26 Feb 2021 06:33 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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कृषि कानूनों के विरोध में अपनी फसल जोत रहे किसान - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के पश्चिमी यूपी में कृषि कानूनों का विरोध थम नहीं रहा है। अलग- अलग शहरों में किसान अपनी खड़ी फसलों को जोतकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं हैरान करने वाली ये तस्वीरें किसानों को कितना नुकसान पहुंचा रही हैं। इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।
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कृषि कानूनों के विरोध में किसान ने अपनी फसल जोत दी। - फोटो : अमर उजाला
मेरठ जनपद के रोहटा गांव में एक किसान ने अपनी गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया। किसान का कहना है कि सरकार को ये तीनों कानून वापस लेने होंगे। किसान ने कहा जब तक ये कानून वापस नहीं होंगे, किसानों का आंदोलन खत्म नहीं होगा।
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सहारनपुर में किसानों ने 21 बीघा गेहूं की फसल पर चलाया ट्रैक्टर

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कृषि कानूनों के विरोध में अपनी फसल जोत रहे किसान - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर के बेहट में गांव ढाबा माजरी के पांच किसानों ने कृषि कानूनों के विरोध में अपनी 21 बीघा भूमि पर खड़ी गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया। उधर, गागलहेड़ी के नन्हेड़ा गांव में फसल का उचित दाम नहीं मिलने से नाराज किसान ने गोभी की खड़ी फसल जोत दी। साथ ही कर्ज में डूबे किसान ने आत्मदाह की चेतावनी दी है।

तहसील के गांव कुतुबपुर भूकड़ी गांव के किसान राजकुमार ने बकाया गन्ना भुगतान नहीं मिलने और कृषि कानूनों के विरोध में तीन बीघा गेहूं की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया था। वहीं, गुरुवार को ढाबा माजरी गांव के किसानों ने भी अपनी 21 बीघा गेहूं की फसल की जुताई कर दी। किसान संजय ने पांच बीघा, अनिल ने सात बीघा व आदित्य, संजय पुत्र दिलेराम ने तीन-तीन बीघा जमीन में खड़ी गेहूं की फसल ट्रैक्टर से नष्ट की है। उनका आरोप है कि सरकार की नीतियों और कृषि कानूनों से किसान बर्बादी के कगार पर है। नलकूपों पर विद्युत मीटर लगा दिए गए, गन्ना मूल्य भुगतान समय से नहीं हुआ, धान की फसल औने पौने दामों में बेचनी पड़ रही है। 

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कृषि कानूनों के विरोध में अपनी फसल जोत रहे किसान - फोटो : अमर उजाला
उधर, गागलहेड़ी के नन्हेड़ा वेद बेगमपुर गांव में गुरुवार सुबह आफताब पुत्र शकूर ने सात बीघा गोभी की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया। आफताब ने बताया कि समिति व बैंक का कर्ज लगभग 10 लाख रुपए हो चुका है। गोभी की फसल बेचकर ब्याज चुकाने की उम्मीद थी लेकिन उचित दाम नहीं मिलने से परेशान होकर यह कदम उठाया। 
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खड़ी फसल जो रहे किसान - फोटो : अमर उजाला
कृषि कानूनों के विरोध में जोत दी सरसों की फसल 
मुजफ्फरनगर के चरथावल में विकास खंड क्षेत्र के ग्राम पावटी में किसान ने कृषि कानूनों के विरोध में पांच बीघा सरसों की फसल जोत दी। भाकियू चरथावल ब्लॉक अध्यक्ष ठाकुर कुशलवीर सिंह के साथ किसानों ने हंगामा किया। 
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कृषि कानूनों के विरोध में अपनी फसल जोत रहे किसान - फोटो : अमर उजाला
चरथावल सहकारी समिति के पूर्व सभापति प्रवीण त्यागी किसानों के साथ खेत पहुंचे और उन्होंने पकने को तैयार खड़ी सरसों की फसल में ट्रैक्टर चलाकर फसल को नष्ट कर दिया। उनका कहना था कि केंद्र सरकार किसानों पर थोपे गए कानूनों को वापस ले और एमएसपी पर खरीद की गारंटी के लिए कानून बनाया जाए। किसानों का कहना था कि बड़ी उम्मीद के साथ किसानों ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनवाई थी, लेकिन सरकार किसानों का हक कुचलना चाहती है।
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किसानों ने पांच-पांच बीघा गेहूं की फसल जोती

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बिजनौर में किसान ने अपनी फसल जोत दी। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर के हल्दौर में गांव भरैरा निवासी अतर सिंह ने कृषि सुधार कानूनों का विरोध जताते हुए पांच बीघा गेहूं की फसल जोत दी। उनका कहना है कि कृषि कानूनों से किसानों को बहुत नुकसान होगा।

अतर सिंह ने गुरुवार को अपने पांच बीघा गेहूं की फसल को जोत दिया। उन्होंने बताया कि उनके पास 50 बीघा जमीन है। 16 बीघा जमीन में उन्होंने गेहूं बोया था। उन्होंने बताया कि सरकार कृषि कानूनों से किसानों की जमीन को पूंजीपतियों के यहां पर गिरवी रखना चाहती है। उन्होंने बताया कि दो साल पहले वह सरकारी क्रय केंद्र पर अपनी फसल बेचने गए थे। लेकिन उनकी फसल कर्मचारियों ने नहीं खरीदी। एक दो दिन बाद आने की बात कहकर उन्हें टरकाते रहे। मजबूरी में उन्हें फसल मंडी में बहुत कम दाम पर बेचनी पड़ी थी। अगर बिल लागू हो गए तो पूंजीपति किसानों से अपनी मर्जी पर फसल खरीदेंगे। उन्होंने अपनी फसल जोतकर कानूनों के खिलाफ आंदोलन को अपना समर्थन दिया है।
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किसान ने फसल जोत दी। - फोटो : amar ujala
उधर, हल्दौर के गांव शादीपुर कलां में भाकियू के मंडल उपाध्यक्ष कुलबीर सिंह ने पांच बीघा गेहूं की फसल जोत दी। कुलबीर सिंह का कहना है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को किसानों पर थोपना चाहती है। जबकि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। मजबूर किसान के पास अपनी फसल बर्बाद करने के और कोई चारा नहीं है। मौके पर भाकियू के जिला संगठन मंत्री राजेंद्र चौधरी, हल्दौर ब्लॉक उपाध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी, अंकित चौधरी, लोकेंद्र सिंह, शौवीर सिंह, राजपाल सिंह, नरेश कुमार, ओमपाल सिंह, गजेंद्र सिंह मौजूद रहे।

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