मेरठ कोरोना की मार झेल रहे मरीजों और उनके तीमारदारों को एक-एक बेड के लिए जंग लड़नी पड़ रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड पाने के लिए मारामारी है। इमरजेंसी के फर्श और स्ट्रेचर पर मरीज तड़प रहे हैं। शनिवार को भी हालात में कोई सुधार नजर नहीं हुआ।
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मेडिकल कॉलेज में बिलखते परिजन।
- फोटो : amar ujala
मेडिकल कॉलेज में कोई इमरजेंसी के फ़र्श पर तो कोई स्ट्रेचर पर है। कोई मरीज कार में ही उपचार ले रहा है। मरीज के तीमारदार बाहर ऑक्सीजन के इंतजाम में भटक रहे हैं। तीमारदारों को अपनों का हाल तक पता नहीं चल रहा है। कोविड वार्ड में जो खाना भिजवा रहे हैं, वह खाना भी मरीज तक नहीं पहुंच रहा है। एक बुजुर्ग मरीज तो इमरजेंसी की पार्किंग में खाना खाते मिले। कोई चाहकर भी मदद नहीं कर पा रहा है।
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मेडिकल अस्पताल में व्हीलचेयर पर पड़ा महिला का शव और विलाप करता युवक। फोटो : सुनील कैथवास
- फोटो : amar ujala
ऐसा रहा मरीजों और तीमारदारों का हाल
केस एक : शताब्दीनगर के महेश चंद को कहीं बेड नहीं मिला तो मेडिकल इमरजेंसी में एक कोना पकड़ लिया। घंटों इंतजार किया। कोई सुनवाई नहीं हुई। रात ढाई बजे मेडिकल से निकले और एक निजी अस्पताल में बेड की व्यवस्था हुई।
केस दो : अमित कुमार मेडिकल के कोविड वार्ड में भर्ती हैं। शनिवार को उनकी ऑक्सीजन कम हो रही थी। तीमारदार हेल्पलाइन पर फोन करते रहे, मगर कोई सुनवाई नहीं हो पाई।
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मेडिकल कॉलेज में तड़प रहे मरीज।
- फोटो : amar ujala
फेसबुक लाइव कर बताया अव्यवस्था का हाल
एक युवक ने मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी वार्ड का फेसबुक लाइव करके वहां फैली अव्यवस्था के बारे में बताया। किसी की सांस फूल रही है मगर ऑक्सीजन नहीं है, तो किसी के तीमारदार खुद ही ऑक्सीजन देने की कोशिश कर रहे हैं।
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ऑक्सीजन ले जाते परिजन।
- फोटो : amar ujala
मरीज को बेड चाहिए, ऑक्सीजन कम है
दिल्ली निवासी राहुल के परिजनों ने मेरठ का कोई अस्पताल नहीं छोड़ा, मगर बेड नहीं मिला। ऐसी संख्या बहुत से मरीजों और तीमारदारों की है। ऐसे में ऑक्सीजन की कमी जिंदगी की मुश्किल और बढ़ा रही है।
मेडिकल कॉलेज में तड़प रहे मरीज।
- फोटो : amar ujala
जूनियर डॉक्टर बोले, जितने बेड, उतने ही मरीज करेंगे भर्ती
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में बेड कम हैं और मरीज ज्यादा हैं। जूनियर डॉक्टरों ने प्राचार्य से साफ कह दिया है कि बे उतने ही मरीज भर्ती करेंगे, जितने बेड हैं। उससे ज्यादा मरीजों को वे ठीक से नहीं देख पाएंगे। शनिवार दोपहर प्राचार्य इमरजेंसी पहुंचे और व्यवस्था बनाने की कोशिश की। प्राचार्य का कहना है कि जूनियर डॉक्टरों से बात की जा रही है।