indian army
अरुण खेत्रपाल के भाई ने साझा की यादें
पूना होर्स रेजीमेंट के सेंकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के छोटे भाई मुकेश खेत्रपाल भी समारोह में आए। मुकेश ने बताया कि अरुण बसंतर के मोर्चे पर थे। घर में छोटी मोटी सूचनाएं बस रेडियो से मिलती थीं। युद्ध के बाद 18 दिसंबर को घर पर टेलीग्राम आया कि अरुण खेत्रपाल शहीद हो गए। यह पढ़ते ही मां बेहोश हो गई। वह मुझसे एक साल बड़े थे। मुकेश ने कहा कि सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने बसंतर में मोर्चा संभाला। इस दौरान उन्होंने दुश्मन के कई टैंक बर्बाद किए। उनके टैंक पर आग लग जाने की वजह से कमांडर ने अरुण खेत्रपाल को टैंक छोड़ने का आदेश दिया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। रेडियो पर अरुण के आखिरी शब्द थे, सर मेरी गन अभी फायर कर रही है। जब तक ये काम करती रहेगी, मैं फायर करता रहूंगा। अरुण 1967 में एनडीए में शामिल हुए थे।