परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
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मां कुसुमवती बार-बार बच्चों और बहू को देखकर रोने लगतीं हैं तो पिता भोपाल तोमर निशब्द हैं। परिवार इस पहाड़ जैसे गम को कैसे सहन करे, परिचित रिश्तेदार भी ये ढाढ़स नहीं बंधा पा रहे हैं। पूरे गांव में मातम पसरा है। हर कोई बस यही कह रहा है कि अनिल तुमको तो घर वालों को किए बहुत वादे निभाने थे...सबकों बीच राह में छोड़कर चले गए।