फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बेटी के तलाक पर पिता का जश्न: कोर्ट से घर तक बजवाए ढोल, बोले- मेरी लड़की है, कोई सामान नहीं; देखें Video

Sun, 05 Apr 2026 04:43 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मोदीपुरम

सार

इस पहल ने यह साफ कर दिया कि बदलते समाज में अब बेटियां बोझ नहीं, बल्कि सम्मान और आत्मविश्वास की प्रतीक हैं और उनका साथ देने वाले अभिभावक ही असली बदलाव की नींव रखते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
मेरठ में पिता ने बेटी के तलाक पर ढोल बजवाए - फोटो : अमर उजाला
यूपी के मेरठ स्थित शास्त्रीनगर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने समाज में बेटियों को लेकर सोच पर नई बहस छेड़ दी है। उत्तराखंड कैडर के सेवानिवृत्त जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता वशिष्ठ के तलाक को दुख नहीं, बल्कि स्वाभिमान की जीत के रूप में मनाया।
विज्ञापन

2 of 5
मेरठ में पिता ने बेटी के तलाक पर ढोल बजवाए - फोटो : अमर उजाला
कोर्ट से घर तक ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ लेकर आए
तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद डॉ. शर्मा अपनी बेटी को कोर्ट से घर तक ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ लेकर आए। इस दौरान नाच-गाना हुआ, फूल-मालाओं से बेटी का स्वागत किया गया और पूरे रास्ते यह संदेश दिया गया कि बेटी का सम्मान किसी रिश्ते से बड़ा होता है।
विज्ञापन

3 of 5
जश्न बनाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
‘मेरी बेटी कोई सामान नहीं’
डॉ. शर्मा ने साफ कहा कि उन्होंने न तो कोई एलिमनी मांगी और न ही किसी तरह की आर्थिक मांग रखी। उनका कहना था, 'मैं सिर्फ अपनी बेटी को वापस लाया हूं। मेरी बेटी कोई सामान नहीं है कि उसे कहीं भी छोड़ दिया जाए। उसका सम्मान सबसे पहले है।' उन्होंने यह भी कहा कि ससुराल में प्रताड़ना सहना मजबूरी नहीं, बल्कि उससे बाहर निकलना ही असली हिम्मत है।

4 of 5
बेटी के तलाक पर पिता का जश्न - फोटो : अमर उजाला
सक्षम और आत्मनिर्भर है बेटी
प्रणिता वशिष्ठ मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और वर्तमान में तेजगढ़ी चौराहे स्थित ‘प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी’ में फाइनेंस डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। वर्ष 2022 में उनके भाई, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रणव वशिष्ठ का चंडीगढ़ में एक हादसे में निधन हो गया था। उनकी स्मृति में ही इस अकादमी की स्थापना की गई, जो आज शिक्षा और न्याय के क्षेत्र में जरूरतमंदों के लिए काम कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
बेटी के तलाक पर पिता का जश्न - फोटो : अमर उजाला
समाज के लिए मजबूत संदेश
डॉ. शर्मा के इस कदम की शहरभर में चर्चा हो रही है। कई सामाजिक संगठनों ने इसे नारी सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत पहल बताया है। यह घटना उन परिवारों के लिए एक संदेश बनकर उभरी है, जो समाज के डर से अपनी बेटियों को अपमानजनक रिश्तों में जीने के लिए मजबूर कर देते हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें