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दिग्विजय भाटी मामला: बेअंदाजगी अविनाश पांडेय को पड़ी भारी, महज पांच महीने में छिनी कप्तानी, अब तक ये कार्रवाई

Sat, 22 Aug 2026 10:23 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में किसान नेताओं दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव की कथित पिटाई के मामले में सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है। जांच डीआईजी सहारनपुर रेंज को सौंपी गई है।
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दिग्विजय भाटी मारपीट प्रकरण - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में किसान नेताओं दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव की कथित पिटाई के मामले में पुलिस विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। नवागत एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने कार्यभार संभालने के बाद सिविल लाइंस थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया।

मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए पुलिस उपमहानिरीक्षक सहारनपुर रेंज अभिषेक सिंह को जांच सौंपी गई है। यह कार्रवाई दिग्विजय भाटी की ओर से तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और पुलिसकर्मियों पर लगाए गए मारपीट के आरोपों के बाद हुई है।

सपा नेता अतुल प्रधान ने उठाए सवाल
मेरठ के सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि जो बर्बरता एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइन इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ ने की, वह चिंताजनक है। सरकार को पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर मुकदमा दर्ज करना चाहिए। जिस तरह का कृत्य एक जिम्मेदार पद पर बैठने के बाद एसएसपी ने किया, उससे साफ पता चलता है कि वह मानसिक रूप से बीमार हैं। सरकार को अविनाश पांडेय का स्वास्थ्य परीक्षण कराना चाहिए। ताकि भविष्य में वह स्वयं को भी गोली मारकर विभाग की छवि खराब न कर दें।

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सपा नेता दिग्विजय भाटी - फोटो : अमर उजाला

दिग्विजय भाटी ने लगाए थे गंभीर आरोप
किसान नेता दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया था कि उन्हें और मोहित जाटव को पुलिस ने हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया। भाटी का दावा था कि एसएसपी कार्यालय में उनके साथ मारपीट की गई और बाद में एसओजी कार्यालय में भी पिटाई की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर ने जांच डीआईजी सहारनपुर रेंज अभिषेक सिंह को सौंपी थी। फिलहाल तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय मुख्यालय से संबद्ध हैं।

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सिविल लाइंस थाना प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार गौड़ - फोटो : अमर उजाला

अखिलेश गौड़ समेत इन आठ को किया गया लाइन हाजिर
नवागत एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने जांच को निष्पक्ष रखने के लिए आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया है। इनमें सिविल लाइंस थाना प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार गौड़, उपनिरीक्षक मुलायम सिंह, मुख्य आरक्षी हरि ओम, आरक्षी मुकेश कुमार, मुख्य आरक्षी श्याम बाबू, आरक्षी सुमित कुमार, महिला आरक्षी नीलम लौर और चालक ललित कुमार शामिल हैं।

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एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति और अविनाश पांडेय। - फोटो : अमर उजाला

एसएसपी बोले- बिना दबाव होगी जांच
एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने कहा कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस महानिदेशक के आदेश पर जांच डीआईजी सहारनपुर रेंज को सौंपी गई है। जांच को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी दबाव के कराने के लिए संबंधित पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है।

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अविनाश पांडेय-एसएसपी मेरठ - फोटो : अमर उजाला

अविनाश पांडेय के कार्यकाल में बढ़े थे विवाद
मेरठ के तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय करीब पांच महीने ही जिले की कप्तानी संभाल सके। उनके कार्यकाल के दौरान ललिता गौतम प्रकरण को लेकर हुए प्रदर्शन में एक प्रदर्शनकारी को पुलिस वाहन के अंदर थप्पड़ मारने का मामला सामने आया था। इसका वीडियो भी सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हुआ था। बाद में दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने भी पुलिस पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद अविनाश पांडेय को डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया और झांसी के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति को मेरठ की जिम्मेदारी दी गई।

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अविनाश पांडेय-एसएसपी, दिग्विजय राठी - फोटो : अमर उजाला

अखिलेश यादव ने कहा- किसान नेताओं से मारपीट निंदनीय
सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने किसान नेताओं के साथ कथित मारपीट की निंदा करते हुए इसे भाजपा सरकार में पुलिस कार्रवाई और किसानों के प्रति रवैये से जोड़कर निशाना साधा। उन्होंने मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

 

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अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद। - फोटो : अमर उजाला
चंद्रशेखर आजाद ने बताया वर्दी की ताकत का दुरुपयोग
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुलिस हिरासत में कथित बर्बरता को गंभीर बताते हुए कहा कि यह पुलिसिंग नहीं, बल्कि वर्दी की ताकत का खुला दुरुपयोग है। उन्होंने पूरे प्रकरण में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई।
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