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यूपी: बेबसी और आंसू, धूल के गुबार में समाए सपने, मेरठ मार्केट में बुलडोजर चलता देख फूट-फूटकर रोए लोग; तस्वीरें

Thu, 17 Sep 2026 01:00 PM IST
Sharukh Khan संकल्प रघुवंशी, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण में बुलडोजर चलता देख लोग फूट-फूटकर रोते दिखाई दिए। सेक्टर-दो और छह में एक-एक भवन ध्वस्त हुए। धूल के गुबार में समाने लगे सपने तो लोग बिलख पड़े। उनके आंसू छलकने लगे। मेरठ के शास्त्रीनगर के गुरुद्वारा रोड व सेंट्रल मार्केट में सील किए गए 44 भवनों में से छह को बुधवार को भारी फोर्स की मौजूदगी में बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।
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Meerut central market demolition - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
मेरठ के शास्त्री नगर गुरुद्वारा रोड व सेंट्रल मार्केट में बुधवार को छह अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए। इनमें सेक्टर-तीन में भवन संख्या 492, 498, 1314 और 697, सेक्टर-दो में भवन संख्या 12 और सेक्टर-छह में भवन संख्या 670 शामिल रहे। सील किए गए 44 भवनों में ये भवन ऐसे हैं जिनका नक्शा ही दाखिल नहीं किया गया था।

सेक्टर-2 में जब कॉम्प्लेक्स को जेसीबी से ध्वस्त किया जाने लगा तो शिवम और उनकी पत्नी बिलख पड़े। अपनी दुकानों पर बुलडोजर चलता देख दोनों रोते रहे। सोशल मीडिया पर दोनों के रोने का भावुक वीडियो साझा कर लोग अधिकारियों को कोसते रहे।
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सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान दुकान को तोड़ता बुलडोजर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों को इसके लिए जिम्मेदार बताते हुए लोग उनकी संपत्ति पर भी बुलडोजर चलाने की मांग कर रहे हैं। आरोप लगाया कि अधिकारियों की शह पर निर्माण हुए। जब बाजार बस रहा था तब इसे क्यों नहीं रोका गया। 

 
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सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान दुकान को तोड़ता बुलडोजर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लोगों का कहना है कि पिछले 30-40 साल रात-दिन मेहनत और मशक्कत कर बाजार को बसाया गया और अब यह पूरी तरह बर्बाद हो रहा है, जबकि अधिकारियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा।

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सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान प्रशासन लोगों को लगातार हटाते रहे - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आवासीय और व्यावसायिक दोनों संपत्तियां
शास्त्रीनगर आवासीय योजना संख्या 7 में आवासीय और व्यावसायिक दोनों ही संपत्तियां रखी गई थी। विभाग के लेआउट में 230 व्यावसायिक भूखंड रखे गए थे। वहीं योजना में कुल 6379 संपत्तियां हैं, जिनमें 5409 ऐसी हैं जिनमें वास्तविक प्रयोग हो रहा है। योजना में कॉमर्शियल प्लॉट में भी नियमों का उल्लंघन करते हुए सेटबैक छोड़े बिना शोरूम और कॉम्प्लेक्स तैयार कर दिए गए।


 
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सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सेक्टर-2 में सबसे ज्यादा भवन
स्कीम नंबर सात योजना के अंतर्गत सेक्टर-2 में सबसे ज्यादा 1325 भवन हैं, जिनमें 985 वास्तविक उपयोग वाले हैं, जबकि 293 में परिवर्तित उपयोग किया जा रहा है। इसी सेक्टर में सबसे ज्यादा 47 व्यावसायिक प्लॉट हैं। सेक्टर-3 में कुल 96 आवासीय संपत्ति में 813 में वास्तविक उपयोग है, जबकि 132 परिवर्तित उपयोग में हैं और 15 व्यावसायिक प्लॉट हैं। 
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मेरठ सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
स्कीम नंबर सात के तहत सेक्टर-एक से 13 तक आते हैं। इनमें कुल 6379 आवासीय भवन हैं, जिनमें 5409 का ही वास्तविक प्रयोग हो रहा है, जबकि सभी सेक्टर में 293 का परिवर्तित प्रयोग हो रहा है। मौजूदा समय में इनमें से अधिकांश को बंद किया जा चुका है।

 
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मेरठ सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान फफक पड़ी महिला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छह सेक्टरों में 230 व्यावसायिक प्लॉट
व्यावसायिक प्लॉट के अंतर्गत योजना के सेक्टर-दो में 47, सेक्टर-तीन में 15, सेक्टर-छह में 48, सेक्टर-नौ में 7, सेक्टर-12 में 30 और सेक्टर-13 में 83 प्लॉट रखे गए थे। इस तरह कुल 230 व्यावसायिक प्लॉट थे।

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मेरठ सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान रोती हुई महिला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ध्वस्त कॉम्प्लेक्स में सीलिंग से पहले होता था कारोबार
आवास एवं विकास परिषद ने 8 अप्रैल को ध्वस्त किए गए परिसरों में सील लगाई थी। 14 जुलाई को इनका सर्वे हुआ। आवंटियों को अवैध निर्माण खुद ध्वस्त करने के लिए 15 दिन का नोटिस दिया गया था, लेकिन ध्वस्तीकरण नहीं हुआ था। 

 

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सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान दुकान को तोड़ता बुलडोजर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बुधवार को इन परिसरों को ध्वस्त किया गया। सीलिंग से पहले इन परिसरों में पाहवा गारमेंट्स, हंगेरिया भोजनालय, दवा दुकान, व्यायामशाला और जूतों का शोरूम चलते थे। गुरुद्वारा रोड पर स्थित ध्वस्त भवन में एम्पायर पैलेस बेक्वेट हॉल भी शामिल था।

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सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान दुकान को तोड़ता बुलडोजर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मलबा हटाने में जुटा निगम
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान नगर निगम और मेरठ विकास प्राधिकरण की टीमें दिनभर सक्रिय रहीं। आवास विकास ने ध्वस्तीकरण का कार्य किया। इसके बाद निगम ने मलबा हटाना शुरू कर दिया है। दोनों विभागों की संयुक्त मौजूदगी से क्षेत्र में हलचल बनी रही। 

 

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सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान दुकान को तोड़ता बुलडोजर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ध्वस्तीकरण के बाद काफी मात्रा में मलबा जमा हो गया था। लोगों को परेशानी न हो इसके लिए निगम की टीम उसे हटाने में जुटी गई। अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर निगम द्वारा कार्रवाई की जा रही है।
 

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सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान रोती हुई महिला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शास्त्रीनगर में फिर चला बुलडोजर, छह अवैध कॉम्प्लेक्स किए ध्वस्त
मेरठ के शास्त्रीनगर के गुरुद्वारा रोड व सेंट्रल मार्केट में सील किए गए 44 भवनों में से छह को बुधवार को भारी फोर्स की मौजूदगी में बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। ये सभी आवासीय संपत्तियां थीं, जिन्हें बिना नक्शा स्वीकृत कराए बनाया गया था। ध्वस्त की गई छह संपत्तियों में एक बैंक्वेट हॉल समेत छह कॉम्प्लेक्स शामिल थे। कॉम्प्लेक्स में करीब 35 दुकानें थीं।

 

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सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण के दौरान फफक पड़ी महिला - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कार्रवाई के दौरान सुबह छह बजे ही शास्त्रीनगर से जुड़े रास्तों को बैरिकेडिंग करके बंद कर दिया गया। इससे स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हुई। बिजली आपूर्ति भी काट दी गई थी। सुबह सवा सात बजे से ध्वस्तीकरण शुरू किया गया। 

 

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सेंट्रल मार्केट में बुलडोजर कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट में 21 सितंबर को होने वाली सुनवाई से पहले 14 जुलाई के ध्वस्तीकरण आदेश के अनुपालन में आवास एवं विकास परिषद की ओर से कार्रवाई की गई। सुबह से ही भारी फोर्स तैनात कर बुलडोजर लगाए गए। 
 
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बेबस रहे व्यापारी और देखते रहे लोग। - फोटो : अमर उजाला
छह संपत्तियों का नक्शा स्वीकृत नहीं
उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने बताया कि 44 संपत्तियों में से छह ऐसी हैं, जिनका नक्शा स्वीकृत नहीं है। ये सभी आवासीय संपत्तियां हैं। नक्शा स्वीकृत कराए बिना अवैध निर्माण किया गया था। बुधवार को इन्हीं छह संपत्तियों को ध्वस्त किया गया। 21 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई से पहले परिषद कंप्लायंस रिपोर्ट दाखिल करेगी।
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