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सौरभ हत्याकांड: मृत्युदंड के बाद बदलेगी मुस्कान-साहिल की जिंदगी, बैरक-कपड़े-मुलाकात के अलग होंगे नियम

Thu, 15 Oct 2026 12:01 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

Meerut Blue Drum Case : मुस्कान को मेरठ जेल की बैरक नंबर 12बी और साहिल को बैरक नंबर 15 में रखे जाने की जानकारी दी गई है। सजायाफ्ता कैदियों के नियम लागू होंगे। मथुरा जिला कारागार में महिला फांसीघर मौजूद है, लेकिन मृत्युदंड पर अमल से पहले उच्च न्यायालय की पुष्टि और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जरूरी हैं।

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मेरठ नीला ड्रम केस में साहिल मुस्कान का फांसी की सजा - फोटो : अमर उजाला
सौरभ हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा के बाद मुस्कान बैरक नंबर 12बी और साहिल बैरक नंबर 15 में रहेगा। अब उन्हें सजायाफ्ता वाले कपड़े पहनने होंगे। मुस्कान क्रीम कलर की साड़ी या सूट पहनेगी और साहिल सफेद रंग का कुर्ता और पाजामा पहनेगा। उन्हें कैदियों का नंबर भी मिलेगा।

अगर न्यायालय के आदेश में सश्रम कारावास लिखा होगा तो उन्हें मजदूरी करनी होगी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जिला जज का आदेश मिलने के बाद दोनों दोषियों के लिए जेल के नियम बदल जाएंगे। अब उन्हें सजायाफ्ता कैदी की तरह रहना होगा।

फिलहाल जिला कारागार में कुल 1983 बंदी हैं। इनमें 378 सजायाफ्ता कैदी हैं। इनमें 16 सजायाफ्ता महिलाएं हैं। दो महिला बैरक हैं। ये एक ही बैरक के दो पार्ट हैं। बैरक नंबर 12ए में विचारधीन बंदी रहती हैं और 12बी में सजायाफ्ता महिला बंदियों को रखा जाता है। साहिल फिलहाल 17 नंबर बैरक में रह रहा है। उसे 15 नंबर बैरक में शिफ्ट किया जाएगा। दोनों के मुलाकात के दिन भी एक माह में 12 से घटाकर चार कर दिए जाएंगे।
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सौरभ हत्यकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाए जान के बाद सौरभ के भाई की आंखों में आए आंस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अब तक उनसे परिजन एक माह में 12 बार मुलाकात कर सकते थे। अब एक माह में दो बार मुलाकात और दो बार फोन पर बात या फिर चार बार मुलाकात कर सकेंगे। हालांकि मुस्कान से मिलने अब तक कोई परिजन नहीं पहुंचा है।

साहिल से मिलने उसका भाई दिव्यांश और नानी पुष्पा देवी अक्सर जिला कारागार आते हैं। जेल अधीक्षक का कहना है कि दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों दोषियों ने खाना कम कर दिया है। वह अब लगभग आधा खाना खा रहे हैं। दोनों तनाव में हैं और चिंतित हैं। वे अन्य बंदियों से अब बात भी कम करते हैं।

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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा में होगी फांसी, प्रदेश का इकलौता फांसीघर
सौरभ राजपूत की हत्या की दोषी पत्नी मुस्कान को मथुरा जेल में फांसी दी जाएगी। यहां प्रदेश का एकमात्र महिला फांसी घर है। हालांकि मृत्युदंड के मामले में सत्र न्यायालय के फैसले की उच्च न्यायालय से पुष्टि आवश्यक होती है।

इसके बाद अपील और दया याचिका जैसी कानूनी प्रक्रियाएं भी हो सकती हैं। इसलिए फांसी की तारीख और सजा पर अमल की स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया है कि अगर कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़चन नहीं आई तो मुस्कान को यही फांसी दी जाएगी। 

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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रदेश का इकलौता महिला फांसीघर, अभी तक नहीं लगी किसी को फांसी
मथुरा जिला कारागार में महिला बंदियों को फांसी देने के लिए फांसीघर मौजूद है। आजादी के बाद से यहां किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है। अगर मुस्कान को फांसी लगी तो यह पहली महिला होगी जिसको आजादी के बाद फांसी होगी। हालांकि अमरोहा जिले के बावनखेड़ी में वर्ष 2008 में सात लोगों के नरसंहार मामले में दोषी शबनम को फांसी की सजा सुनाई गई थी, पर अभी उसकी दया याचिका लंबित है।

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सौरभ हत्यकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाने के बारे बताते उनके वकील - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जेल मैनुअल के तहत अभी मुस्कान के साथ रहेगी बच्ची
मेरठ जिला अदालत द्वारा मुस्कान रस्तोगी को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद जेल में उसके साथ रह रही 10 महीने की मासूम बच्ची के भविष्य को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस बीच वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने स्पष्ट किया है कि बच्ची की स्थिति में तत्काल कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। दरअसल मुस्कान ने नवंबर 2025 में जेल में ही अपनी छोटी बेटी को जन्म दिया था। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल मैनुअल के नियमों के मुताबिक, कोई भी बच्चा छह साल की उम्र तक अपनी मां के साथ जेल में रह सकता है।

मुस्कान की 10 महीने की बेटी राधा फिलहाल उसके साथ ही रहेगी और जब उसकी फांसी की तारीख तय होगी, तब बच्ची के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मुस्कान और साहिल को मेरठ जेल में ही रखा जाएगा या कहीं और स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जाएगा, इस पर कोर्ट का विस्तृत आदेश मिलने के बाद फैसला होगा।

जेल अधिकारियों के मुताबिक, मुस्कान अपनी 10 महीने की बेटी के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित है और अक्सर इस बारे में सवाल पूछती है। इसके साथ ही वह पिछले तीन-चार दिनों से अपनी 7 साल की बड़ी बेटी (पीहू) से मिलने की गुजारिश कर रही है, लेकिन जेल नियमों के कारण अभी तक बड़ी बेटी को उससे मिलवाने जेल नहीं लाया गया है। 
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सौरभ पक्ष की अधिवक्ता रैखा जैन - फोटो : अमर उजाला
हम हाईकोर्ट में करेंगे अपील : रेखा जैन
जेल के बंदियों का केस विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से नियुक्त अधिवक्ता लड़ते हैं। मुस्कान और साहिल के केस में मैं पैरवी कर रही थी। अभी कोर्ट ने सजा सुनाई है। अभी हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। हाईकोर्ट में एक कमेटी बैठती है, वह भी इसका संज्ञान लेगी। - रेखा जैन, मुस्कान और साहिल की सरकारी अधिवक्ता

ऐसे जघन्य अपराध में ऐसी ही सजा होनी चाहिए
सौरभ की हत्या के मामले में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड की सजा दिए जाने का फैसला स्वागत योग्य है। ऐसे जघन्य अपराध में इस तरह की सजा जरूर होनी चाहिए। यह सजा पूरे देश में नजीर बनेगी। - एसके दीक्षित, एडवोकेट
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गवाह अमित जोशी बोले- बड़ा फैसला, समाज में होगा सुधार
खैरनगर में उषा मेडिकल स्टोर से मुस्कान ने नशीली दवाएं खरीदी थी। जो सौरभ को देने के बाद हत्या की गई थी। इस मामले में उषा मेडिकल स्टोर के मालिक ब्रह्मपुरी निवासी अमित जोशी को पुलिस ने गवाह बनाया था। इनकी कोर्ट में गवाही भी हुई थी। मृत्युदंड का फैसला आने के बाद अमित जोशी ने कहा कि दोनों दोषियों के साथ सही हुआ। इससे समाज में बदलाव होगा। 

मुस्कान मेरठ की पहली महिला, जिसे फांसी की सजा सुनाई
साैरभ हत्याकांड में मुस्कान मेरठ की ऐसी पहली महिला है, जिसे अदालत ने दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। कचहरी में माैजूद कई लोगों का कहना था कि जिले में यह घटना भी बिल्कुल अलग तरह की थी। अदालत में सुनवाई के समय से ही यह चर्चा थी कि क्या मुस्कान को सजा में कुछ राहत मिलेगी या फिर अदालत फांसी जैसा फैसला लेगी।
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