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उम्मीदों पर ताला: सड़कें सूनीं, शटर डाउन, मेरठ बंद ने बयां की नाराजगी, 2.50 लाख व्यापारियों का मिला समर्थन

Fri, 10 Apr 2026 04:27 PM IST
Dimple Sirohi जेपी शर्मा, अमर उजाला, मेरठ

सार

सेंट्रल मार्केट सीलिंग के विरोध में मेरठ बंद का व्यापक असर देखने को मिला। 665 व्यापारिक संगठनों और करीब 2.50 लाख व्यापारियों ने बंद का समर्थन किया, जिससे शहर के अधिकांश बाजार बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।

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सेंट्रल मार्केट - फोटो : अमर उजाला
मेरठ सेंट्रल मार्केट के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हुई सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में आयोजित मेरठ बंद का व्यापक असर पूरे शहर में देखने को मिला। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और हालिया आदेश के बाद व्यापारियों की बची-खुची उम्मीदों पर भी विराम लग गया है। इसी मायूसी और आक्रोश के बीच संयुक्त व्यापार संघ के आह्वान पर हुआ बंद पूरी तरह सफल रहा। इस दौरान शहर की अधिकांश दुकानों के शटर बंद रहे और सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दिया।
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मेरठ सेंट्रल मार्केट - फोटो : अमर उजाला
बंद को शहर की 665 व्यापारिक एसोसिएशनों का समर्थन मिला। दोपहर तक पेट्रोल पंप, चिकित्सकों के क्लिनिक, मेडिकल स्टोर और प्रमुख बाजार बंद रहे, जिससे व्यापारिक एकता का मजबूत संदेश गया। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक सेंट्रल मार्केट धरना स्थल पर व्यापारियों की बड़ी संख्या जुटी रही, जहां उन्होंने प्रशासन और आवास विकास परिषद के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।

बंद को प्रभावी बनाने के लिए व्यापारिक नेता सुबह 5 बजे से ही सक्रिय हो गए थे। शारदा रोड, सदर बाजार, दिल्ली रोड और कोटला सहित शहर के अधिकांश हिस्सों में शत-प्रतिशत प्रतिष्ठान बंद रहे। हालांकि आबूलेन, बेगमपुल और गढ़ रोड पर स्थित ब्रांडेड शोरूम सुबह करीब 11:30 बजे तक बंद रहे और उसके बाद कुछ स्थानों पर धीरे-धीरे दुकानें खुलनी शुरू हो गईं। दोपहर बाद शहर के लगभग 75 प्रतिशत बाजार क्रमशः खुल गए।
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चाय की दुकान बंद कराते व्यापारी - फोटो : अमर उजाला
चाय की दुकानों तक को कराया बंद
संयुक्त व्यापार संघ (नवीन गुट) के अध्यक्ष नवीन गुप्ता, महामंत्री संजय जैन, कोषाध्यक्ष विजय आनंद अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज मित्तल, उपाध्यक्ष तरुण गुप्ता, मनीष शर्मा, विकास गिरधर और लल्लू मक्कड़ ने अपने-अपने क्षेत्रों में बंद को सफल बनाने की जिम्मेदारी संभाली। व्यापारिक नेताओं ने हलवाई और चाय की दुकानों तक को बंद कराया।

वहीं संयुक्त व्यापार संघ (अजय गुट) के अध्यक्ष अजय गुप्ता, अंकित गुप्ता मनु, संदीप रेवड़ी, अश्वनी और पवन मित्तल स्कूटरों पर टोली बनाकर शहर में भ्रमण करते हुए व्यापारियों से बंद का समर्थन करने की अपील करते हुए सेंट्रल मार्केट धरना स्थल पहुंचे।

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मेरठ सेंट्रल मार्केट - फोटो : अमर उजाला
आम जनता को आवश्यक वस्तुओं में राहत
संयुक्त व्यापार संघ के महामंत्री दलजीत सिंह ने कहा कि व्यापारियों ने एकजुटता दिखाकर यह साबित कर दिया कि पूरा व्यापारिक वर्ग सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के साथ खड़ा है। उपाध्यक्ष तरुण गुप्ता और मंत्री विकास गिरधर ने बताया कि मेरठ के करीब 2.50 लाख व्यापारी शास्त्रीनगर के व्यापारियों के समर्थन में खड़े हैं।

हालांकि आवश्यक सेवाओं को देखते हुए शहर के बाहरी क्षेत्रों जैसे कंकरखेड़ा, रोहटा रोड, गंगानगर, जागृति विहार और नौचंदी में फल, सब्जी, डेयरी और कन्फेक्शनरी की कुछ दुकानें खुली रहीं, जिससे आम जनता को रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए राहत मिली।
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मेरठ सेंट्रल मार्केट - फोटो : अमर उजाला

इन प्रमुख संगठनों ने दिया समर्थन
बंद को कई प्रमुख संगठनों का समर्थन मिला, जिनमें उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल, नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा), मेरठ पेपर ट्रेडर्स एसोसिएशन, मेरठ बार एसोसिएशन, सदर बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन, आबूलेन व्यापार संघ, सदर व्यापार मंडल, मेरठ टेंट डेकोरेटर्स हायर्स एसोसिएशन, जिला मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, सर्वहित व्यापार संघ, किला रोड व्यापार संघ, सदर चौक बाजार व्यापार मंडल, गांधी आश्रम दुर्गा व्यापार संघ, कागजी बाजार और सराफा व्यापार मंडल सहित कई संगठन शामिल रहे।

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मेरठ सेंट्रल मार्केट प्रदर्शन करते व्यापारी - फोटो : अमर उजाला
‘एक झटके में लुट गई जीवनभर की पूंजी’
सेंट्रल मार्केट में सीलिंग की कार्रवाई के अगले दिन बाजार में मायूसी का माहौल नजर आया। कई दुकानदार अपने सील हुए प्रतिष्ठानों के बाहर बेबस बैठे दिखाई दिए। प्रवीन मेडिकल स्टोर के संचालक संजीव रस्तोगी ने बताया कि वह 20 वर्ष की आयु से इस दुकान पर बैठ रहे हैं और अब उनकी उम्र 58 वर्ष हो गई है। उन्होंने कहा कि इसी बाजार में मेहनत कर किराए की दुकान से शुरुआत की और बाद में दो दुकानें खरीदीं, लेकिन अब उन पर भी ताला लग गया है।

वहीं पिछले 25 वर्षों से गारमेंट्स का कारोबार करने वाले निक्की ने बताया कि उन्होंने स्कूल के समय से ही काम शुरू किया था और परिवार के सहयोग से दुकान खड़ी की थी, जिसे अब अदालत के आदेश के बाद बंद करना पड़ा है।

बाजार बंद होने का असर केवल दुकानदारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी सहायक सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। कैटरिंग का काम करने वाले दिनेश ने बताया कि बाजार में होने वाले छोटे आयोजनों से उनका काम चलता था, जो अब पूरी तरह ठप हो गया है।

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