शहीद मेजर केतन शर्मा जब भी घर पहुंचते तो आते ही बेटी कैरा को गोद में उठाकर चूमने लगते। सबसे घंटों बातें करते रहते लेकिन इस बार वह आए तो सही लेकिन साथियों के कांधों पर सवार होकर, इस बार उन्होंने न तो किसी से बात ही की और न ही अपनी पाच साल की मासूम बेटी कैरा को गोद में उठाया बल्कि वह तिरंगे में लिपटकर घर आए और महज चंद मिनट में हर किसी को अलविदा कह गए।