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महाभारत सर्किट: यहां जीवंत है कौरव-पांडवों की गाथा, सरकार की अनदेखी ने दर्शनीय को बना दिया दयनीय

Sun, 08 Mar 2020 12:10 PM IST
Dimple Sirohi रैना पालीवाल, अमर उजाला, मेरठ
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महाभारत कालीन सुरंग। फोटो : संजू - फोटो : अमर उजाला
वारणावत और लाक्षागृह की कथा सबको याद है। कौरवों ने पांडवों को लाक्षागृह में मारने का षड़यंत्र बनाया था। महाभारत का यह अहम अध्याय भी यहीं खुलता है। वारणावत जो आज बरनावा है, में लाक्षागृह के अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। अफसोस! जिसे दर्शनीय बनाना चाहिए था, उसे दयनीय बना दिया। महाभारत कालीन सुरंग झाड़-झक्कड़ से अटी है। टीले पर भी उदासीनता हावी है। पुरातत्व विभाग के संरक्षण के चलते इस स्थान के सौंदर्यीकरण की हर संभावना दम तोड़ चुकी है।
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hastinapur - फोटो : अमर उजाला
मेरठ से करीब 38 किलोमीटर दूर स्थित बरनावा में प्राचीन टीला है। यहीं लाक्षागृह के अवशेष है। टीला 33 एकड़ में फैला है। यहां महानंद संस्कृत विद्यालय भी संचालित है। यहां से थोड़ी दूर हिंडन और कृष्णा नदी का संगम है। एक साल पहले टीले पर उत्खनन हुआ था। वह स्थान भी झाड़ियों से घिरा है। वहां भी म्यूजियम नहीं बनाया गया। 

 
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hastinapur - फोटो : अमर उजाला
खेतों से निकलकर नीचे की ओर जाते हैं जहां महाभारत कालीन सुरंग है। कहा जाता है कि पुरोचन के कक्ष में आग लगाकर पांडव इसी सुरंग से बाहर निकले थे। लाक्षागृह पर पर्यटकों की भीड़ नहीं है। यह स्थान सुनसान पड़ा है। लोगों के नाम पर एक प्रेमी जोड़ा ही दिखाई दिया। टीला भी कुछ खंडहरों को खामोश लिए खड़ा है। 

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hastinapur - फोटो : अमर उजाला
संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य विनोद कुमार ने बताया कि पर्यटन मंत्रालय द्वारा इस स्थान के विकास के लिए एक करोड़ 40 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। विकास कार्यों के शिलान्यास के शिलापट तैयार हो गए पुरातत्व विभाग ने इसमें रोक लगा दी।  

 
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hastinapur - फोटो : अमर उजाला
नहीं मिली पुरातत्व विभाग की अनुमति 
क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी अंजू चौधरी ने बताया कि करीब तीन साल पहले केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत लाक्षागृह में विकास कार्य किया जाना था लेकिन एएसआई से इसकी अनुमति नहीं मिली। 
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इतिहासकार केके शर्मा - फोटो : अमर उजाला
उत्खनन में मिले महाभारत कालीन अवशेष 
इतिहासकार केके शर्मा ने बताया कि करीब एक साल पहले लाक्षागृह के टीले पर हुए उत्खनन में अनेक युगों की सभ्यता के अवशेष मिले। उनमें महाभारत से लेकर मुगल काल तक शामिल है। बरनावा और हस्तिनापुर में साइट म्यूजियम बनाकर पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता था। 
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