मन में कंच तालाब देखने की उत्कंठा थी। गांव के शेरपाल और शुभम हमें लेकर चल दिए। काफी दूर तक खेतों की पगडंडियों पर पैदल चलते रहे। आखिर में उन्होंने एक खेत की ओर इशारा कर दिया। बोले, यही तालाब है। तालाब का स्वरूप तक खत्म हो चुका है। खेत में नाम मात्र का पानी है। देखकर लगता है कि तालाब पर अतिक्रमण हो गया। चर्म रोग से मुक्ति पाने के लिए लोग आज भी इसके जल से स्नान करते हैं और यहां प्रसाद चढ़ाते हैं।