फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पश्चिम के आठ गढ़ों पर सजी चुनावी रणभूमि, अधिकतर पर सीधे मुकाबले, देखें कहां क्या समीकरण

Tue, 26 Mar 2019 02:29 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
1 of 9
हाजी याकूब कुरैशी, राजेंद्र अग्रवाल, तब्बसुम हसन, इमरान मसूद
पश्चिमी उप्र के आठ द्वारों पर चुनावी व्यूह तैयार है। सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर ये वो आठ दरवाजे हैं, जहां से पिछले चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत का रास्ता खुला था। इस बार समीकरण बदले हैं और मुकाबले कड़े हैं। इस बार पश्चिम में जाट, मुस्लिम और अनुसूचित जाति सभी सीटों पर प्रभावी भूमिका में है। इनके वोट बड़े से बड़े नेता की जमीन खिसका सकते हैं। देखें किस सीट पर क्या बना रहा समीकरण: -
विज्ञापन

2 of 9
हाजी याकूब कुरैशी, राजेंद्र अग्रवाल, हरेंद्र अग्रवाल
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट: भाजपा और गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला
भाजपा ने अपने दो बार के लगातार विजेता राजेंद्र अग्रवाल को ही मैदान में उतारा है। सामने गठबंधन से हाथी पर सवार होकर हाजी याकूब कुरैशी मैदान में हैं। कांग्रेस ने टिकट बदला और हरेंद्र अग्रवाल पर दांव खेला है। इस बार भाजपा की राह आसान नहीं है और मुकाबला कड़ा है। बसपा दलित मुस्लिम वोटों पर दांव खेल रही है। उसके लिए बाकी वर्गों को अपने साथ लाना बड़ी चुनौती है।

भाजपा अन्य वर्ग के अलावा वैश्य, ब्राह्मण, अति पिछड़ों के सहारे चुनावी मैदान में है। दो अन्य अहम बिंदू हैं। एक कांग्रेस का हरेंद्र अग्रवाल पर दांव लगाना जो वैश्य मतों में खासी सेंध लगा सकते हैं। राजेंद्र अग्रवाल से लोगों की नाराजगी। हालांकि यह अब कम होती जा रही है पर यदि भितरघात हुआ तो भाजपा को नुकसान हो सकता है। बहरहाल यहां सीधा मुकाबला भाजपा और गठबंधन प्रत्याशी के बीच है। उधर प्रसपा ने नासिर अली को टिकट दिया है पर मुस्लिम या अन्य वोटों में बड़ी सेंध लगाना उनके लिए बड़ी चुनौती है।

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 532981, बसपा : 300655, सपा : 211759
विज्ञापन

3 of 9
अजित सिंह, संजीव बालियान - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट: दांव पर चौधरी अजित सिंह की प्रतिष्ठा
पहली बार चौधरी अजित सिंह परंपरागत सीट बागपत छोड़कर मुजफ्फरनगर से लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला भाजपा के डॉ. संजीव बालियान से है। संजीव ने 2014 में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद हुए चुनाव में चार लाख वोटों से बसपा के कादिर राणा को हराया था।

इस बार समीकरण बदले हुए है। तब सपा, बसपा और कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी उतारे थे। इस बार सपा, बसपा का रालोद के साथ गठबंधन है और कांग्रेस ने भी अजित सिंह के सामने कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। जाट राजनीति की दिशा यहां का चुनाव तय करेगा। इस सीट पर देशभर की नजरें टिकी हैं।  

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 653391, बसपा : 252241, सपा : 160810

4 of 9
सत्यपाल सिंह, जयंत चौधरी - फोटो : फाइल
बागपत लोकसभा सीट: सत्यपाल और जयंत में कड़ा मुकाबला
इस सीट पर भाजपा के केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह और रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच सीधा मुकाबला है। आईपीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए सत्यपाल सिंह ने 2014 बागपत से पहला चुनाव लड़ा था और चौधरी अजित सिंह को हराया था। जयंत चौधरी 2009 में मथुरा सीट से सांसद चुने गए थे, 2014 में हेमा मालिनी से हार गए थे।

इस बार वह रालोद की परंपरागत बागपत सीट से मतदाताओं के बीच हैं। वर्ष 1977 से अब तक दो अवसरों को छोड़ दें तो यहां जयंत के परिवार का ही कब्जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह तीन और रालोद अध्यक्ष अजित सिंह छह बार यहां से सांसद चुने गए। 

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 423475, रालोद : 199516, सपा : 213609
विज्ञापन

5 of 9
तब्बसुम हसन व प्रदीप चौधरी
कैराना लोकसभा सीट: कैराना के रण में त्रिकोणीय मुकाबला
साढ़े 16 लाख मतदाताओं वाली कैराना सीट पर इस  बार त्रिकोणीय मुकाबला है। यह सीट भाजपा के पूर्व नेता स्व. हुकुम सिंह की परंपरागत सीट मानी जाती है। इस बार भाजपा ने उनकी बेटी मृगांका सिंह की जगह गंगोह से विधायक प्रदीप चौधरी पर दांव खेला है। यहां सपा ने मौजूदा सांसद तबस्सुम हसन को ही प्रत्याशी बनाया है।

2014 में इस सीट से हुकुम सिंह सांसद चुने गए थे। उनके निधन के बाद हुए उप चुनाव में रालोद के चुनाव चिह्न पर तबस्सुम बेगम चुनाव लड़ी थीं और उन्होंने मृगांका सिंह हराया था। कैराना उप चुनाव से परिणाम के बाद ही गठबंधन ने सियासी आकार लिया और एक नया समीकरण बनाया। इस बार प्रदीप चौधरी और तबस्सुम बेगम के बीच होने वाले मुकाबले को कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र सिंह ने त्रिकोणीय बना दिया है।

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 565909, सपा : 329081, बसपा : 160414 
विज्ञापन

6 of 9
इमरान मसूद, राघव लखनपाल, हाजी फजलुर्रहमान
सहारनपुर लोकसभा सीट: मुस्लिम मतदाताओं का रुख तय करेगा परिणाम
भाजपा के राघव लखनपाल, कांग्रेस के इमरान मसूद और बसपा के हाजी फजलुर्रहमान के बीच मुकाबले में एक कोण बनने का प्रयास आप प्रत्याशी योगेश दहिया भी कर रहे हैं। 2014 में भाजपा के राघव लखनपाल ने कांग्रेस के इमरान मसूद को हराकर यह सीट जीती थी। इस बार गठबंधन ने भाजपा की चुनौती बढ़ा दी है। इमरान मसूद भी तगड़ी टक्कर देंगे।

इस सीट पर करीब छह लाख मुस्लिम मतदाता हैं। वह गठबंधन के साथ जाएंगे या इमरान मसूद या फिर दोनों के बीच बटेंगे, इसी पर परिणाम का निर्भर है। कांग्रेस, बसपा और भाजपा में अनुसूचित जाति के मतों को लेकर भी होड़ है। बसपा का परंपरागत वोट रहे यह मतदाता पिछले चुनाव में भाजपा के साथ चले गए थे। इस बार शब्बीरपुर कांड के बाद बदले माहौल में यह भाजपा से नाराज चल रहे हैं। भीम आर्मी भी भाजपा के खिलाफ काफी मुखर है। कांग्रेस प्रत्याशी को भीम आर्मी के साथ का भरोसा है।

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 472999, कांग्रेस : 407909,    बसपा : 235035
विज्ञापन

7 of 9
भारतेंद्र सिंह, नसीमुद्दीन सिद्दकी, मलूक नागर
बिजनौर लोकसभा सीट: नसीमुद्दीन के आने से बदले समीकरण
इस सीट पर भाजपा के भारतेंद्र सिंह, बसपा के मलूक नागर और कांग्रेस प्रत्याशी नसीमुद्दीन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। 2014 में भारतेंद्र सिंह ने सपा प्रत्याशी शाहनवाज राणा को दो लाख मतों के अंतर से हराया था।
मलूक नागर 2014 में इस सीट से चुनाव लड़े थे। सपा-बसपा और रालोद के बीच गठबंधन होने के कारण समीकरण बदले हुए हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी बड़ा मुस्लिम चेहरा हैं और पहले बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती थी। मुकाबला रोचक होगा।

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 486913, सपा : 281139, बसपा : 230124

8 of 9
डॉली शर्मा व वीके सिंह
गाजियाबाद लोकसभा सीट: कांटे का त्रिकोणीय मुकाबला
भाजपा से जनरल वीके सिंह दूसरी बार प्रत्याशी हैं। इन्होंने 2014 में कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर को हराया था। इस बार वीके सिंह के सामने गठबंधन से पूर्व विधायक सुरेश बंसल मैदान में हैं, तो कांग्रेस ने डॉली शर्मा को उतारा है। त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं।

लोकसभा क्षेत्र में करीब 25 लाख मतदाता हैं। इसमें ब्राह्मण व मुस्लिम मतदाता करीब छह-छह लाख हैं। वैश्य और अनुसूचित जाति के मतदाता तीन से साढ़े तीन लाख हैं। इस वोट बैंक में सेंधमारी के लिए कांग्रेस ने ब्राह्मण और गठबंधन से वैश्य कार्ड खेला है। 

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 758482, कांग्रेस : 191222, बसपा : 173085 
विज्ञापन

9 of 9
सत्यवीर सिंह महेश शर्मा
गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट:  यहां भी त्रिकोणीय टक्कर 
19 लाख वोटरों वाली गौतमबुद्धनगर सीट पर भाजपा के डा. महेश शर्मा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। महेश शर्मा ने पिछले चुनाव में सपा के नरेंद्र भाटी को हराया था। यहां मुकाबला त्रिकोणीय है। महेश शर्मा ब्राह्मणों, वैश्य अन्य के अलावा शहरी वोटरों के दम पर चुनाव लड़ रहे हैं।

वहीं गठबंधन के बसपा प्रत्याशी सत्यवीर नागर की गुर्जर वोटों में तगड़ी पैठ रहेगी। चार लाख से ज्यादा गुर्जर वोटर हैं। कांग्रेस से डा. अरविंद कुमार भी मजबूती से चुनावी मैदान में उतरे हैं। ठाकुर वोटरों की यहां खासी संख्या है, कांग्रेस के परंपरागत वोटर तो हैं ही। आम आदमी पार्टी से प्रो. श्वेता वर्मा भी चुनावी मैदान में ताल ठोंक रही हैं।

2014 में पार्टियों को मिले मत : भाजपा : 599702, सपा : 319490, बसपा : 198237 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें