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Muzaffarnagar: कवाल कांड मामला, नौ साल इंतजार, सात घंटे कटघरे में खड़े रहे गुनहगार

Wed, 12 Oct 2022 11:14 AM IST
Dimple Sirohi मदन बालियान, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर दंगा मामला। - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में नौ साल पहले कवाल गांव में हिंसा भड़की तो मुजफ्फरनगर जल उठा था। वर्तमान विधायक विक्रम सैनी पर भी भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा। अब नौ साल बाद एक ही गांव के दोनों वर्गों के आरोपी अदालत पहुंचे तो तस्वीर बदल गई। अदालत के कठघरे में आरोपी करीब सात घंटे तक इकट्ठे ही खड़े हुए। जमानत मिली तो सभी लोग अपने-अपने घरों को शांत स्वभाव से लौट गए। 

मुजफ्फरनगर दंगे की जड़ में कवाल कांड ही रहा है। जानसठ कोतवाली क्षेत्र के इस गांव में सचिन और गौरव की हत्या के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों में तनाव बढ़ना शुरू हो गया था। 29 अगस्त को कवाल में दोबारा से दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए थे। पुलिस का भी विरोध हुआ। तब पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए मामला संभाल लिया और दोनों पक्षों के 28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इनमें मौके पर 12 आरोपी पुलिस ने पकड़े थे, जिनमें खतौली के वर्तमान विधायक विक्रम सैनी भी थे। बाद में विक्रम सैनी पर एनएसए की कार्रवाई भी की गई थी।
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कवाल कांड - फोटो : अमर उजाला
सात घंटे अदालत में खड़े रहे गुनहगार
समय का फेर देखिए। नौ साल पहले कवाल गांव में 28 लोगों पर एक-दूसरे के सामने आने, जानलेवा हमले, सरकारी कार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज किया गया था। दोनों वर्गों के आरोपी मंगलवार सुबह करीब 11 बजे अदालत पहुंचे। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने पैरवी की। फैसला दोपहर बाद आया और जमानत की प्रक्रिया शाम करीब साढ़े छह बजे तक चली। यानी करीब सात घंटे तक दोनों पक्ष अदालत के कठघरे में बिल्कुल शांत और एक साथ ही खड़े रहे।

 
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कवाल कांड - फोटो : अमर उजाला
सांप्रदायिक दंगों की वजह बने भड़काऊ नारे
अभियुक्तगण की ओर से दो दिन पूर्व हुई हत्या की प्रतिक्रिया में एक-दूसरे पक्षों के साथ पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया। मौके पर फायरिंग की तथा उत्तेजक नारे लगाए। अभियुक्तगण के इस कृत्य से गांव के सांप्रदायिक सद्भाव और शांति व्यवस्था पर असर पड़ा। ऐसे ही कुछ कृत्यों के कारण जिला मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगे हुए, जिसमें कई जाने गईं और जनपद का माहौल खराब हुआ था। अत: वाद के तथ्य और परिस्थितियों में अभियुक्तगण को प्रथम अपराध या प्रोबेशन का लाभ दिया जाना उचित नहीं है। 

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मुजफ्फरनगर- जानसठ मार्ग पर कवाल गांव का मुख्य द्वार - फोटो : amar ujala
भाजपा विधायक विक्रम सैनी सहित अदालत ने इन्हें सुनाई सजा, मिली जमानत
कवाल गांव के विक्रम सैनी, धर्मवीर, सलेकचंद, रविंद्र,  रोहताश, सोनू, दीपक पुत्र बिजेंद्र, प्रदीप, नूर मोहम्मद, मौलाना मुकर्रम, दीपक पुत्र चंद्रबोस, फारूख को सजा सुनाई गई है। इसके बाद जमानत मिल गई।
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कवाल के दिगंबर जैन मंदिर पर लिखा अहिंसा परमो धर्म का संदेश - फोटो : amar ujala
अदालत ने इन्हें दोषमुक्त करार दिया
उस्मान, शाहजेब, मनोज, राकेश सैनी, अक्षय, धीरज, गुलशन, रफीक, अनीस, शाहनवाज, फैसल, मौलाना मुकर्रम, अबरार, इमरान को दोष मुक्त करार दिया गया है। ट्रायल के दौरान सतीश की मौत हो गई थी।
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मुजफ्फरनगर दंगा मामला। - फोटो : amar ujala
अदालत के बाहर पहुंच गए भाजपाई
विधायक विक्रम सैनी के कोर्ट में होने की जानकारी मिलते ही भाजपा नेता भी अदालत के बाहर पहुंच गए। पूर्व विधायक अशोक कंसल, पूर्व विधायक उमेश मलिक, जिलाध्यक्ष विजय शुक्ला, भाजपा नेता संजय अग्रवाल अदालत के बाहर खड़े रहे। जमानत मिलने के बाद खुशी जताई। विधायक की ओर से अधिवक्ता भारतवीर अहलावत ने पैरवी की। 
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मुजफ्फरनगर दंगा मामला। - फोटो : amar ujala
किस धारा में सुनाई गई क्या सजा
धारा    सजा

147    एक साल
148    दो साल, पांच हजार जुर्माना
149    दो माह
353    एक साल
504    एक साल
506    दो साल, पांच हजार जुर्माना
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मुजफ्फरनगर दंगा मामला। - फोटो : amar ujala
यह भी जान लीजिए
सभी आरोपियों को सेवन क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट में छह-छह माह की सजा सुनाई गई। आरोपी फारूख को आर्म्स एक्ट में एक साल की सजा अलग से सुनाई गई है। अदालत में नौ गवाह पेश किए गए।
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