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पुरा महादेव में परशुराम को मिला था शिव का वरदान, यहां मौजूद है रंग बदलने वाला अनूठा शिवलिंग

Tue, 30 Jul 2019 01:15 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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पुरा महादेव - फोटो : अमर उजाला
चलो पुरा महादेव, जहां रहते हैं देवों के देव, मिटने लगेगी पीड़ा, बोलो तो हर हर महादेव...की गूंज के साथ कांवड़िए शिव के जलाभिषेक के लिए बढ़ रहे हैं। आस्था और देशभक्ति के रंग के साथ कांवड़ यात्रा अपने चरम पर पहुंच गई है।

आज शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर भक्तों की यात्रा पूर्ण होगी। वहीं लाखों श्रद्धालु बागपत के पुरा महादेव पर शिव का जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। जहां भोलेशंकर अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। आगे जानें आखिर क्यों खास है पुरा महादेव: -
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पुरा महादेव - फोटो : अमर उजाला
पुरा गांव आने वाला हर रास्ता इन दिनों आस्था और देशभक्ति के रंग में रंगा है। सबकी मंजिल एक है और सब शिव नाम का जाम करते हुए आगे बढ़ते जा रहे हैं। शिव के जयघोष के साथ देश की आन बान और शान तिरंगे लहराते हुए जलाभिषेक करने के लिए कतारों में खड़े हैं। 

 
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पुरा महादेव - फोटो : अमर उजाला
पैदल से लेकर डाक कांवड़िए के साथ दो ही रंग है, जिनमें एक आस्था और दूसरा देशभक्ति। सब एक सुर और एक नाद के साथ पुरा के श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर की ओर बढ़े चले जा रहे हैं। शिवभक्त तिरंगा लेकर भारत माता के जयकारे लगाते हुए पहुंच रहे हैं। पुरा गांव में दूर तक केसरयिा रंग दिखाई दिया। भोले के भजनों के साथ देशभक्ति के गीत भी बज रहे हैं। 

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पुरा महादेव - फोटो : अमर उजाला
शिव ही सत्य है और सत्य ही शिव है। कई रूप और कई रंग हैं। महादेव दुष्टों का संहार करते हैं, लेकिन भक्तों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले हैं। हिंडन नदी के किनारे बसे पुरा गांव पर भी नागेश्वर की कृपा बरसती है। श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में रंग बदलने वाला अनूठा शिवलिंग है। यहां जल चढ़ाने के लिए दूर दूर से शिवभक्त शिवरात्रि पर जल चढ़ाते हैं। 

 
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पुरा महादेव - फोटो : अमर उजाला
इसलिए खास है पुरा महादेव
बुजुर्ग बताते हैं कि हिंडन नदी के किनारे कजरी वन में ऋषि जमदग्नि अपनी पत्नी रेणुका के साथ रहते थे। एक दिन हस्तिनापुर के राजा सहस्रबाहु शिकार खेलते हुए कजरी वन पहुंचे। कुटिया पर पहुंचे तो ऋषि मौजूद नहीं थे। राजा रेणुका के रूप पर मोहित हुए और जबरन उसे अपने साथ हस्तिनापुर ले गए। एक दिन राजा की पत्नी ने रेणुका को बंधन मुक्त कर दिया।

 
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पुरा महादेव - फोटो : अमर उजाला
रेणुका दोबारा कजरी वन पहुंची तो ऋषि ने यह कहते हुए रखने से इंकार कर दिया कि वह पर पुरुष के साथ रहकर आई है। रेणुका नहीं मानी। ऋषि ने अपने चारों बेटों को बुलाया और अपनी मां का सिर धड़ से अलग करने का आदेश सुना दिया। तीन बेटे पीछे हट गए, लेकिन चौथे बेटे परशुराम ने मां का सिर धड़ से अलग कर दिया। 
 
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कांवड़ यात्रा 2019 - फोटो : अमर उजाला
जमीन पर पड़े मां के सिर को देख परशुराम विचलित हो गया। वहीं पर बैठकर शिव की तपस्या शुरू कर दी। शिव प्रसन्न और प्रकट हुए। परशुराम ने अपनी मां को दोबारा जिंदा कराने का वचन मांगा। बताते हैं कि भगवान शिव ने परशुराम को फरसा दिया। इसी फरसे से परशुराम ने राजा सहस्रबाहु का वध किया।

 
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kanwad, kawad - फोटो : अमर उजाला
एक कथा यह भी...
श्री परशुरामेश्वर महादेव मंदिर को लेकर लोककथा प्रचलित हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि लंढ़ौरा की राजकुमार वन में घूमने आई। हाथी जंगल में आकर रूक गया, सेना ने आगे बढ़ाने का प्रयास भी किया, लेकिन हाथी आगे नहीं बढ़ा। राजकुमार ने जगह की खुदाई के आदेश दिए। कथा है कि यहां पर खुदाई से शिवलिंग निकला। यह वही शिवलिंग है जो मंदिर में वर्तमान में विराजमान है। यहीं पर जगदगुरु शंकराचार्य ने भी कभी तपस्या की थी। 
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