विलाप करते परिजन
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करीब सुबह करीब नौ बजे बनत गांव में शहीद प्रदीप की अंतिम यात्रा शुरू हुई। गांव की गलियों में जब तक सूरज चांद रहेगा प्रदीप तेरा नाम रहेगा। हिंदुस्तान जिंदाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद और जवानों की शहादत का बदला लो बदला लो के नारे गूंज रहे थे। श्मशान घाट पर पूरे राजकीय और सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। प्रदीप के बडेे़ बेटे सिद्धार्थ ने मुखाग्नि दी। सीआरपीएफ के जवानों की गारद ने फायर किए और सशस्त्र सलामी दी।