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Holi in Meerut: ऐतिहासिक है बिजौली की होली, नुकीले औजारों से शरीर बेधकर गांव में तख्त निकालते हैं युवक

Thu, 09 Mar 2023 06:42 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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Holi in Bijauli - फोटो : amr ujala
मेरठ के खरखौदा में सैकड़ों वर्ष से चली आ रही परंपरा के दौरान इस वर्ष भी क्षेत्र के गांव बिजौली में ऐतिहासिक होली मनाते हुए होली का रंग खेलने के बाद ग्रामीणों ने अलग-अलग मोहल्लों से पांच तख्त निकाले। सुरक्षा को लेकर कई थानों की फोर्स मौजूद रही।



मेरठ मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर खरखौदा के गांव बिजौली में पिछले सैकड़ों वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक परंपरा को ग्रामीण आज भी संजोए हैं। ग्रामीणों के अनुसार मराठा राजे रणविजय सिंह द्वारा बताए गए इस गांव में अनेकों प्राकृतिक आपदा आई। इन सभी आपदाओं से बचने के लिए राजा ने गांव में आए महात्मा गंगा पुरी नाम के महापुरुष से गांव सहित आसपास के क्षेत्र को आपदाओं से बचाव के बारे में पूछा। महात्मा ने सभी ग्रामीणों व राजा के साथ एक यज्ञ का आयोजन किया। होली के दिन रंग खेलने के बाद गांव के ही तीन युवकों को देव रूपी वस्त्र पहनाकर सोने-चांदी व धातु के नुकीले औजार से उनके शरीर को बेधकर तख्त पर सवार कर पूरे गांव में घुमाया गया। उसी परंपरा को आज भी संजोते हुए ग्रामीण आगे बढ़ा रहे हैं। बुधवार को भी रंग खेलने के बाद गांव में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अलग-अलग मोहल्लों से पांच तख्त निकाले गए।
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Holi in Bijauli - फोटो : amr ujala
कैसे निकलते हैं तख्त
तख्त यात्रा से पहले होलिका की पूजा के साथ जिस युवक को भेजा जाता है उस युवक के पूरे शरीर पर होली की राख मली जाती है। उसके बाद उस युवक के शरीर के विभिन्न अंग जिसमें गाल, बाजू व पेट को नुकीले औजारों से बेधा जाता है। एक तक की यात्रा के लिए तीन युवक बेधे जाते हैं। बेधे गए तीनों युवकों को तख्त पर सवार कर गांव के युवक अपने कंधों के सहारे बैंड बाजों व युवक के हुड़दंग के साथ पूरे गांव में घुमाया जाता है। इस दौरान जगह-जगह ग्रामीण अपनी मनोकामना पूरी होने पर गुड़ का प्रसाद, साड़ी व नगदी का भी चढ़ावा चढ़ाते हैं। यात्रा गांव के मुख्य चौक से होते हुए बाबा गंगापुरी की समाधि पर समाप्त होती है। इसके बाद बेधे गए सभी युवकों के घाव पर होलिका की राख मली जाती है। जिससे मान्यता है कि आज तक किसी भी युवक के के शरीर पर कोई निशान वह घाव नहीं होते।

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Holi in Bijauli - फोटो : amr ujala
हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है यह यात्रा
तख्त यात्रा मूल रूप से हिंदू समाज से जुड़ी है। इस यात्रा में बिधने वाले युवक भी हिंदू समाज के ही होते हैं। लेकिन इस यात्रा में मुस्लिम समाज का भी सहयोग कम नहीं है। युवकों को बेधने वाले धातु के सभी औजार मुस्लिम समाज द्वारा ही तैयार किए जाते हैं। जिन की तैयारी वह लोग त्योहार से एक माह पहले से ही करना शुरू कर देते हैं।

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Holi in Bijauli - फोटो : amr ujala
ग्रामीणों ने इस ऐतिहासिक होली को बरसाने की होली जैसा मनाने की की मांग
ग्रामीण जिला पंचायत सदस्य ऋषि त्यागी, सुरेंद्र त्यागी, ब्रह्मदत्त फौजी, ओंकार त्यागी, कानेश्वर त्यागी व धीरज त्यागी सहित सभी ग्रामीणों ने इस यात्रा के दौरान मौके पर पहुंचे पुलिस प्रशासन की टीम से इस तख्त यात्रा को भी बरसाने की होली जैसी मान्यता दिलाने की मांग की है।
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Holi in Bijauli - फोटो : amr ujala
एक वर्ष प्रथा छूटी तो आ गई प्राकृतिक आपदाएं
वृद्ध ग्रामीणों के अनुसार इस प्रथा को ग्रामीणों ने विडंबना व अंधविश्वास बताते हुए एक वर्ष नहीं मनाया। जिससे गांव बिजौली व आसपास के क्षेत्र में अनेकों प्राकृतिक आपदाएं, अकारण पशुओं में मौत व फसलों में आगजनी सहित गांव में कई बीमारियां भी फैल गई।
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Holi in Bijauli - फोटो : amr ujala
हर वर्ष बढ़ाई जा रही है सुरक्षा व्यवस्था
सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस प्रथा में आज तक गांव में इतने बड़े आयोजन में कोई विवाद नहीं हुआ। केवल 2017 में ही तख्त निकलने के दौरान दो पक्षों में जमकर मारपीट पथराव व फायरिंग हुई थी। जिसमें पुलिस की ओर से बलवा में मामला दर्ज हुआ था। उधर तख्त निकलने के दौरान तलवार, त्रिशूल व लठ बाजी का करतब दिखाने के दौरान विवाद बढ़ने की आशंकाएं होती हैं । उसी को लेकर अब प्रतिवर्ष इस यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है।
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