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हस्तिनापुर अभ्यारण्य के वन्य जीवों को इंसानों से खतरा, 33 साल से तय नहीं हो पाई सेंक्चुरी की सीमा

Tue, 03 Mar 2020 01:30 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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Hastinapur Wildlife Sanctuary - फोटो : अमर उजाला
दुनियाभर में वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर हर कोई जागरूक है। सरकारें इसको लेकर तमाम प्रयास भी कर रही हैं, लेकिन हस्तिनापुर सेंक्चुरी का क्षेत्र बनने के 33 साल बाद भी अधर में है। सालों से यहां रहने वाले जीव जंतुओं का घर तय नहीं हो पाया है। सेंक्चुरी का इलाका 2073 वर्ग किमी रहेगा या फिर इसे 450 वर्ग किमी कर दिया जाएगा। सीमा तय न होने से क्षेत्र में इंसानों का ज्यादा दखल है। ऐसे में वन्य जीवों को सुरक्षित रखना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।
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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी,Wetland Day 2020, Hastinapur wildlife sanctuary - फोटो : अमर उजाला
सन् 1986 में गंगा नदी के दोनों तटों पर अवस्थित खादर मैदानों एवं खोला पहाड़ियों को मिलाकर 2073 वर्ग किमी क्षेत्रफल को हस्तिनापुर वन्य जीव विहार के रूप में संरक्षित करने का निर्णय लिया गया था। धारा 18 ए के तहत वन विभाग ने सेंक्चुरी के अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी किया, लेकिन बीते 33 सालों में फाइनल नोटिफिकेशन नहीं किया गया। इसको लेकर एनजीटी में याचिका भी दायर की गई थी।

 
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Hastinapur Wildlife Sanctuary - फोटो : अमर उजाला
हस्तिनापुर अभयारण्य  में मेरठ के साथ बिजनौर और अमरोहा जिले की सीमा लगती है। सरकार की ओर से अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण अभयारण्य क्षेत्र का विकास नहीं हुआ। वन विभाग भी विकास एवं औद्योगिक गतिविधियों को रोकने में सख्ती नहीं कर पाता है। इन्हीं कारणों से बारहसिंघा समेत विभिन्न प्रजाति के हिरण और तेेंदुए खतरे में हैं।

 

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Hastinapur Wildlife Sanctuary - फोटो : अमर उजाला
भौगोलिक स्थिति को लेकर आ रही परेशानी
वन विभाग अधिकारियों के मुताबिक, हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य की भौगोलिक स्थिति को लेकर परेशानी है। इसके एक ओर शहर और उद्योग धंधे चल रहे हैं, दूसरी तरफ वन्यजीव अभ्यारण्य है। इनमें बहुत से 1986 से पहले के हैं। इस पूरे प्रकरण को लेकर वन विभाग की तरफ से गंगा किनारे और जंगली पशुओं की आवाजाही वाले स्थल तक का सर्वे कराकर सीमा का निर्धारण कराया गया।
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हस्तिनापुर बर्ड सेंक्चुरी,Wetland Day 2020, Hastinapur wildlife sanctuary - फोटो : अमर उजाला
वन विभाग और वाइल्ड लाइफ की तरफ से बारहसिंघा को लेकर सेंक्चुरी में सर्वे कराया गया था। इस सर्वे के मुताबिक बारहसिंघा का रहवास गंगा किनारे के अलावा उन इलाकों में भी मिला, जहां पर पास में आबादी है। ऐसे में समस्या यह है कि किस तरह से क्षेत्र को संरक्षित किया जाए। 

 
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DFO aditi sharma - फोटो : अमर उजाला
जीव जंतुओं के संरक्षण को लेकर वन विभागजागरूक है। सेंक्चुरी के क्षेत्र को लेकर बड़ी समस्या है। मई माह में इसको लेकर जवाब दाखिल किया जाएगा। जीवों को बचाने के लिए पेड़ों की संख्या बढ़ाई जा रही है। -अदिति शर्मा डीएफओ 

 
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तेंदुआ - फोटो : पेक्सेल्स
मेरठ में ये हैं वन्य जीव जंतु 
तेंदुआ     छह
चीतल     74
बारहसिंघा     13
नीलगाय     715
सियार     337
वन गाय     29
जंगली बिल्ली     66
बिज्जू     48
सेही     129
गोह     59
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चंबल नदी में घड़ियाल और उसके बच्चे - फोटो : अमर उजाला
ये भी हैं मौजूद
शूकर हिरन (पाड़ा)     175
कछुए     तीन हजार से ज्यादा  
घड़ियाल     सात सौ से ज्यादा 
डॉल्फिन - बिजनौर 
बैराज से गढ़मुक्तेश्वर तक      30  
नोट : वर्ष 2019 की गणना के मुताबिक
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