विलाप करते परिजन
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यूं तो रविवार शाम को ही जिसे पता लगा, वह शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाने पहुंचता रहा, लेकिन सोमवार सुबह पांच बजे से ही जनाजों में शामिल होने के लिए लोगों की भीड़ मृतकों के घरों पर जुटने लगी थी। मृतक फरमान और फारूक के आवास पर हजारों लोग सुबह से ही जमा थे। यही हाल गांव पंजीठ में मृतक शबनूर और अकबरपुर सुन्हेटी में मृतक सरवेज के आवास का भी था। बेहद गमगीन माहौल और हर किसी की आंखों में आंसू थे।