ट्रिपल मर्डर
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शीबा को बनाया था हत्या के लिए उकसाने का आरोपी
शीबा को हत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में 16 साल बाद दो अगस्त को अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट एंटी करप्शन-2 पवन कुमार शुक्ला ने इजलाल कुरैशी पुत्र इकबाल, अफजाल पुत्र इकबाल, महराज पुत्र मेहताब, कल्लू उर्फ कलुआ पुत्र हाजी अमानत, इजहार, मुन्नू ड्राइवर उर्फ देवेंद्र आहूजा पुत्र विजय, वसीम पुत्र नसरुद्दीन, रिजवान पुत्र उस्मान और बदरुद्दीन पुत्र इलाहीबख्श और शीबा सिरोही पर लगाए गए आरोपों को सही मानते हुए दोषी करार दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद कश्यप ने बताया कि भारतीय दंड संहिता के अनुसार उम्रकैद में दोषी व्यक्ति को शेष बचे जीवनकाल के लिए जेल में रहना होगा, जब तक कि अच्छे व्यवहार या कार्यकारी क्षमादान जैसे कुछ आधारों पर उनकी रिहाई का प्रावधान न हो। दंड प्रक्रिया संहिता 14 साल की कैद पूरी होने के बाद उम्रकैद की सजा की समीक्षा की अनुमति देती है।