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वर्दी में डकैती: बशीर खान ने बुना था लूट का ताना-बाना, ये था जीआरपी इंस्पेक्टर का मकसद

Wed, 15 May 2019 04:39 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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जीआरपी में गिरोह बना लिया था ललित ने - फोटो : अमर उजाला
सहारनपुर गेहूं खरीद फरोख्त करने वालों के यहां डकैती डालने का ताना बाना आगरा के बशीर ने बुना था, लेकिन आगरा के जीआरपी इंस्पेक्टर को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। दरअसल, बशीर ने इंस्पेक्टर को अपने विश्वास में लेकर उसे इस लूट के लिए उकसाया था। जानें आखिर क्या था वर्दी में की गई इस लूट का मकसद: -
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पुलिस द्वारा गिरफ्तार इंस्पेक्टर व अन्य आरोपी - फोटो : अमर उजाला
जीआरपी के इंस्पेक्टर और उसकी टीम के साथ मिलकर गेहूं व्यापारी को उठाकर दबाव बनाने और फिर अवैध वसूली करना इनका मकसद था, लेकिन वारदात के समय हल्ला मचने पर इनकी प्लानिंग फेल हो गई और आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गए। 

 
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एसएसपी दिनेश कुमार, सहारनपुर - फोटो : अमर उजाला
दरअसल, आगरा के शहीदनगर निवासी बशीर खान काफी समय से गेहूं खरीद-फरोख्त करने वालों के संपर्क में रहता है। यह बात उमाही गांव में डकैती के शिकार हुए मोहम्मद अख्तर निवासी मंडावली सैदू बिजनौर ने पुलिस को वारदात के बाद बताई। 

 

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एसएसपी दिनेश कुमार, सहारनपुर - फोटो : अमर उजाला
अख्तर ने पुलिस को बताया कि आगरा निवासी बशीर खान को वह पहले से जानता है, क्योंकि बशीर खान गेहूं खरीद फरोख्त करने वालों से अवैध वसूली करता है। अवैध वसूली क्यों करता है, इस बारे में अख्तर ने बताया था कि कुछ लोग गेहूं खरीदने बेचने में पलटेबाजी (धोखाधड़ी) करते हैं, जिसमें किसान से खरीदने और व्यापारी को गेहूं बेचने में गड़बड़ी कर दी जाती है। यह बात बशीर को पता थी कि गेहूं खरीदने-बेचने वालों के पास मोटी धनराशि होती है। 
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एसएसपी दिनेश कुमार, सहारनपुर - फोटो : अमर उजाला
मोहम्मद अख्तर ने पुलिस को बताया कि सोमवार तड़के जब आरोपियों ने उसके यहां डकैती डाली और रुपये लेने के बाद उसको भी कार में डालकर जबरन ले जाने लगे, तो उसने शोर मचा दिया था। इस पर उमाही गांव के निकट मुल्लाजी का ढाबे पर बैठे लोग इकट्ठा हो गए थे। इस कारण आरोपी उसको कार में डालकर नहीं ले जा पाए थे। 

 
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आरोपियों को लेकर जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
मोहम्मद अख्तर ने पुलिस को बताया था कि आरोपियों में आगरा निवासी बशीर था और कुछ लोग पुलिस की वर्दी में थे। उधर, गिरफ्तारी होने पर आरोपी बशीर खान ने भी पुलिस को यही कहानी बताई कि गेहूं खरीदने बेचने वाले अख्तर को उठाकर दबाव बनाकर अवैध वसूली करनी थी। आगरा से वह छह लोग कार में सवार होकर सहारनपुर के लिए निकले थे और वारदात को अंजाम देकर लौट गए थे। 

 
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एसएसपी दिनेश कुमार - फोटो : अमर उजाला
आगरा में पुलिस का दामन कई बार हो चुका है दागदार 
इंस्पेक्टर ललित त्यागी की लूट जैसे संगीन जुर्म में गिरफ्तारी से पुलिस के दामन पर दाग लगा है लेकिन यह पहला दाग नहीं है। आगरा में ही पुलिस वाले कई बार जेल जा चुके हैं। लूट में ही नहीं, डकैती और चौथ वसूली में भी। पिछले साल पुलिसवालों ने गिरोह बनाकर हाईवे पर कारोबारी को लूटा था।

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बदमाशों ने इसी घर में डाली डकैती - फोटो : अमर उजाला
वारदात वाटर वर्क्स पर हुई थी। तारीख थी 14 जुलाई, 2018। बल्केश्वर निवासी कारोबारी चंदन गुप्ता से 15 लाख रुपये लूटे गए। सीसीटीवी फुटेज से घटना का खुलासा हुआ। सिपाही मनीष चाहर और राहुल जेल गए। राहुल कासगंज के अमांपुर के विधायक देवेंद्र का गनर था। दोनों लंबे समय जेल में रहे। उनके खिलाफ चार्जशीट लगी। बाद में जमानत हो गई। इससे और पीछे चलें तो नोटबंदी के दौरान नवंबर, 2016 में पुलिसवालों ने लूट की दो बड़ी वारदात कीं। पहली आगरा में पंचकुइयां पर हुई। 

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प्रेस वार्ता करते एसएसपी दिनेश कुमार - फोटो : अमर उजाला
यूपी 100 के सिपाहियों ने मथुरा के बलदेव के कारोबारी कन्हैया अग्रवाल से 4.25 लाख रुपये लूट लिए। सिपाही भानू प्रताप, केशव दास, मुकेश के खिलाफ केस दर्ज किया गया। भानू और केशव की गिरफ्तारी हुई। नोटबंदी के दौरान ही आगरा ट्रैफिक पुलिस के दो सिपाहियों ने खुद को ईडी का अधिकारी बताकर सिरसागंज में दिल्ली के बिल्डर से 25 लाख रुपये लूट लिए। सिपाहियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

 
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जीआरपी आगरा का इंस्पेक्टर ललित त्यागी - फोटो : अमर उजाला
बर्खास्त सिपाही भी कर रहे अपराध
जेल में बंद बर्खास्त सिपाही देवेंद्र और विनोद जाट ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है। दोनों जैसे ही जेल से बाहर आते हैं, वारदात करने लग जाते हैं। विनोद जाट को हाल ही में पुलिस ने जानलेवा हमले के आरोप में गिरफ्तार किया। उसने दो साल पहले झांसी के दो कारोबारियों का अपहरण कर दो करोड़ की फिरौती मांगी थी। वह जब पुलिस में था, तब लूटपाट करता था। उसे बर्खास्त कर दिया गया लेकिन जुर्म का रास्ता नहीं छोड़ा।

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