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संगीत सोम के घर पर ग्रेनेड हमले की नहीं सुलझी गुत्थी, विदेशी खोखे ने फोरेंसिक एक्सपर्ट को भी चौंकाया

Sat, 29 Sep 2018 12:31 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
भाजपा विधायक संगीत सोम के घर पर बुधवार को हुए हमले की गुत्थी अभी तक नहीं सुलझी है। वहीं फोरेंसिक टीम और पुलिस फोर्स जिस भी थ्यौरी को लेकर चल रही है, उसमें कोई दम नजर नहीं आ रहा है। हमले की जांच करने गाजियाबाद से फोरेंसिक एक्सपर्ट को बुलाया गया। सात घंटे तक तीन एक्सपर्ट ने जांच पड़ताल की। लेकिन ये जांच अब तक एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी।अफसरों के सामने सवाल खडे़ हैं, हमला क्यों हुआ, किसने किया और टारगेट क्या है। जानें किन सवालों में उलझी है जांच:-
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क्राइम ब्रांच समेत कई वरिष्ठ अधिकारी जांच में लगे

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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
विधायक संगीत सोम के आवास पर बुधवार की रात हुए हमले के मामले की जांच में सीआरपीएफ, आईबी, एटीएस, एसटीएफ व क्राइम ब्रांच समेत कई अधिकारी लगे है। लखनऊ और गाजियाबाद से फोरेंसिक एक्सपर्ट बुलाए गए, ताकि कोई सुबूत हाथ लगे। तीन दिन से पुलिस और अन्य विभागों की टीम हवा में तीर चला रहे है। विधायक के आवास पर हमला सरकारी सुरक्षा के बीच हुआ है। जिसको लेकर अधिकारी खामोश हैं। सीआरपीएफ कमांडेंट, आईबी, एटीएस, एसटीएफ हमले के बाद से जांच करने में जुटी है। शुक्रवार को आईजी मेरठ रेंज रामकुमार वर्मा विधायक के आवास पर जांच करने पहुंचे। आईजी ने बताया जांच में स्पष्ट होगा कि आखिर हमले के पीछे क्या मकसद है। अभी कुछ बोलना जल्दबाजी होगा। फोरेंसिक टीम से भी आईजी ने जानकारी ली। 
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गाजियाबाद से बुलाए एक्सपर्ट, हर बिंदुओं को देखा  

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हमले की जांच करने गाजियाबाद से फोरेंसिक एक्सपर्ट को बुलाया गया। सात घंटे तक तीन एक्सपर्ट ने जांच पड़ताल की। हर बिंदुओं को बारीकी से देखा। एक्सपर्ट ने ग्रेनेड, पिस्टल के खोखे और बुलेट की जांच की। गोलियां कहां से चली और कहां कहां लगी। इसकी गहनता से जांच हुई। शनिवार को आगरा से बेलेस्टिक टीम भी जांच करने पहुंची। फोरेंसिक से सीनियर साइंटिस्ट शफीक अहमद, संजय कुमार व अरुण कुमार दोपहर करीब 12 बजे कैट स्थित संगीत सोम के आवास पर पहुंचे। अत्याधुनिक यंत्रों से गोलियों के निशान व मौके से बरामद हुए छह खोखो की जांच की। नमूने भी लिए जिनकी फोरेंसिक लैब में जांच की जाएगी।

सीआरपीएफ जवानों की भी जांच 

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विधायक के आवास पर ग्रेनेड फेंकने व फिर गोलियां चलाने के मामले में पुलिसकर्मियों पर तो कार्रवाई हो गयी। सवाल ये भी है कि एक सिपाही के हवाले सुरक्षा छोड़कर सीआपीएफ के जवान क्या कर रहे थे। सीआरपीएफ कमांडेंट ने मेरठ पहुंचकर हमले के दौरान तैनात जवानों से जानकारी ली। साथ ही जांच भी बैठा दी कि हमले के दौरान जवान कहां थे। बेलेस्टिक टीम लाइसेंसी और सरकारी असलहों की भी जांच करेंगी। पुलिस का दावा है कि दो पुलिसकर्मियों के पास इंसास व तीन सिपाहियों के पास राइफल थी। जबकि सीआरपीएफ के जवानों के अत्याधुनिक हथियार है।
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खोखा 10-12 दिन पुराना

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पुलिस का दावा है कि आवास पर मिला खोखा विदेशी है। इसकी जांच करने आगरा से बेलेस्टिक टीम बुलाए जा रही है, जोकि लाइसेंसी और सरकारी हथियारों की भी जांच करेगी। गुपचुप तरीके से पुलिस अपने ही सिपाहियों के मोबाइल की सीडीआर निकाल रही है। बीटीएस भी उठाया है, जिसमें आठ हजार नंबर आए हैं। पुलिस का कहना है कि 9 एमएम का कारतूस सिर्फ सरकारी हथियारों में चलता है। उत्तर प्रदेश पुलिस के पास अधिकांश 9 एमएम कानपुर फैक्ट्री के होते हैं। जबकि यह खोखा विदेशी है। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल पर बुधवार देर रात चार खोखे मिले थे। जिसमें दो 9 एमएम और दो 32 बोर के थे। पांचवां खोखा बृहस्पतिवार सुबह विधायक के आवास में अंदर मिला। यह खोखा चेक रिपब्लिक पूर्वी यूराेप की कंपनी जैनेक ऑफ बैरल का है। इससे पहले भी बदमाशों पर इस कंपनी के कारतूस मिले हैं। शनिवार को बेलेस्टिक टीम आगरा से आ रही है।  
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पुलिस जांच में जुटी थी कि हमलावरों ने गोलियां बाहर से चलाई तो खोखा अंदर कैसे पहुंच गया। ये बात शुक्रवार को विधायक संगीत सोम ने साफ कर दी। संगीत सोम ने बताया है कि जो खोखा मिला था, वह हमने ही पुलिस को दिया। 10-12 दिन पहले दिल्ली से एक टीम उनके लाइसेंसी हथियारों की सफाई करने आई थी। लाइसेंसी हथियारों की जांच के लिए गोलियां चलाई गई थी। तभी का एक खोखा पड़ा रह गया था। पुलिस ठीक जांच कर रही है। पुलिस हमलावरों को पकड़ ले। 
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हैंड ग्रेनेड का ढक्कन जिप्सी की छत पर मिला   

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हमले के तीन दिन बाद ग्रेनेड का ढक्कन एस्कार्ट की जिप्सी की छत पर मिला है। जब ग्रेनेड मिला तो न तो उसमे डेटोनेटर था और न रिंग। ढक्कन भी नहीं था। ग्रेनेड पर 1983 की तिथि लिखी है।  तीन दिन बाद ढक्कन जिप्सी की छत पर मिलने से पुलिस जांच पर सवाल खडे़ होते हैं कि पुलिस ने बारीकी से जांच क्यों नहीं की।

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