मेरठ निवासी अवनी चार परिवारों की लाड़ली थी और वह इंजीनियर बनना चाहती थी। इंटर की पढ़ाई के साथ-साथ वह जेईई मेंस की तैयारी कर रही थी। प्री-बोर्ड की परीक्षा में कम नंबर पर आने पर वह अवसाद में चली गई। यह बात उसके माता-पिता को मालूम थी। माता-पिता बेटी को बार-बार समझाते थे। उसे हिल स्टेशन पर घुमाकर भी लाए और उसे उपहार भी दिए, बावजूद इसके उसकी जिंदगी नहीं बचा पाए।
शास्त्रीनगर में गोल्डन टावर की पांचवीं मंजिल से कूदकर अवनी ने जान दे दी। बेटी की आत्महत्या के बाद अवनी के शव का परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। उसके शव का अंतिम संस्कार बृज घाट पर किया गया और चाचा चिराग ने चिता को मुखाग्नि दी।
मूल रूप से मुंडाली के गांव आड़ के रहने वाले व्यापारी बृजभूषण के चार पुत्र हैं। बड़े बेटे रोहित परिवार के साथ शास्त्रीनगर स्थित गोल्डन टावर में फ्लैट रहते हैं। परिवार में पत्नी आकांक्षा, बेटा शिवा है और बेटी अवनी थी। रोहित के तीन भाई चिराग, आशु और विशाल खरखौदा में रहते हैं। अवनी इन चारों भाइयों की लाड़ली थी। रोहित, चिराग के साथ कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं जबकि आशु और विशाल हार्डवेयर व्यापारी हैं। शिवा कैंट स्थित दीवान स्कूल का छात्र है।