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तस्वीरें: छुट्टियों की खुशी और एक पल में उजड़ गई पांच जिंदगियां, एक ही परिवार के थे चार लोग

Fri, 09 Aug 2019 02:03 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर जनपद में चार मजदूरों व टैंकर चालक को पलभर में ही मौत ने लील लिया। मृतक अपने मासूम बच्चों को रोता बिलखता छोड़ गए। चारों लोग एक साथ मजदूरी करने के लिए मुजफ्फरनगर की पेपर मिल में गए थे। जहां भी जाते थे सब एक साथ ठेके पर मजदूरी करने जाते थे। दस दिन की छुट्टियां लेकर वे खुशी से घर आ रहे थे, लेकिन उनके आने की जानकारी परिजनों को नहीं थी। घर पर तो उनकी मौत की सूचना गई। यह सुनकर परिजनों सन रह गए। चालक को छोड़कर चारों मृतक एक ही परिवार के थे।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
धामपुर थाने के गांव मिलक मुकीमपुर निवासी जौनी तीन भाई बहनों में दूसरे नंबर का था। वह अपने पीछे चार व एक साल का बेटा रोता बिलखता हुआ छोड़ गया है। राहुल भी तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। उसके तीन साल का लड़का है। प्रमोद चार भाइयों में सबसे छोटा था। उसके चार साल की पुत्री व दो साल का पुत्र है। रघुवीर तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उनके दो पुत्री हैं, दोनों की शादी हो गई। चालक पदम उर्फ पंकज के चार व एक साल के दो बेटे हैं। मासूम बच्चों को ये अपने पीछे रोता बिलखता छोड़ गए। पलभर में ही मौत ने उन्हें गले लगा लिया। ये पेपर मिल से दस दिन की छुट्टी पर खुशी के साथ रवाना हुए थे। लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि सही सलामत घर नहीं पहुंचेंगे। रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है।
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हादसे के बाद क्षतिग्रस्त टैंकर - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि मुजफ्फरनगर से शीरे से भरा ट्रक धामपुर शुगर मिल आ रहा था। गांव के सातों मजदूर घर जाने के लिए टैंकर में सवार हो गए। हादसे की रात में ही सूचना परिजनों को दी गई। वे रोते बिलखते हुए मौके की ओर दौड़े। परिजनों के मुताबिक चारों मृतक व घायल एक साथ ठेके पर मजदूरी करने के लिए जाते थे। मुजफ्फरनगर की पेपर मिल में 10-15 दिन पहले ये मजदूरी करने गए थे।

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फंसे हुए लोगों को बाहर निकालते पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
घायलों के लिए देवदूत बने एसपी
एसपी संजीव त्यागी घायलों के लिए देवदूत बनकर आए। एसपी ने आग की परवाह किए बगैर टैंकर के अंदर घुस गए व खुद मृतक व घायलों को निकालने लगे। यह देख पुलिसकर्मी हक्के-बक्के रह गए। तब जाकर पुलिसकर्मी भी मदद के लिए दौड़े। एसपी साहस नहीं दिखाते तो अन्य घायलों की भी जान जा सकती थी।
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हादसे के बाद क्षतिग्रस्त ट्रक - फोटो : अमर उजाला
जॉनी ने मांगा था बैंक का खाता नंबर 
जॉनी के बड़े भाई रामकुमार के मुताबिक बुधवार की शाम पांच बजे जॉनी का फोन आया था। उसने बैंक में पैसे डालने के लिए एकाउंट नंबर मांगा था, पर ये नहीं बताया था कि वह रात में घर आ रहा है। अगर घर आने की बात बताता तो वह इंतजार करते।
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घायलों को अस्पताल ले जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
बुधवार को मिला था मजदूरी का पैसा 
परिजनों के मुताबिक सातों को बुधवार को ही उनकी मजदूरी का पैसा मिला था। तभी इन सभी ने घर आने का प्लान बनाया था। पर किसी को नहीं बताया। मजदूरी का पैसा नहीं मिलता तो वह नहीं आते। रात में 11 बजे के बाद उन्हें हादसे का पता चला तब वह दौड़कर बिजनौर आए।

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