पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी
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जांच में सामने आया कि ज्ञानेंद्र चौधरी ने किराए के भवन में तेल चोरी के लिए सेंधमारी कर रखी थी। आईओसीएल के लोगों को मौके पर ट्रक में जो टैंकर मिला, उसकी क्षमता करीब आठ हजार लीटर बताई गई। प्रतिदिन दो टैंकर डीजल यहां से निकाला जा रहा था। इसकी कीमत 2014 में आठ से दस लाख रुपये बताई गई। रोजाना दो टैंकर के हिसाब से 15 दिन में करीब डेढ़ करोड़ रुपये का तेल चोरी कर लिया गया। यदि पेट्रोल की बात करें, तो यही कीमत डेढ़ गुना ज्यादा बताई गई। हालांकि, कंपनी की ओर से चोरी हुए तेल की गणना नहीं की गई थी। मामला लखनऊ तक गूंजा था।