दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण में 37500 हजार पेड़ बाधा बन रहे हैं। इनमें 461 संरक्षित वन क्षेत्र, 689 ग्राम पंचायतों और अन्य सरकारी विभागों के हैं। अन्य पेड़ जिन किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है, उनके हैं। यह पेड़ हटेंगे, तभी इस कॉरिडोर का निर्माण शुरू हो पाएगा।
दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के पर्यावरण विशेषज्ञों की टीम मनीष चौधरी व राघव कुमार, वन विभाग के कार्यवाहक वन क्षेत्राधिकारी रविकांत चौधरी ने विभिन्न स्थलों पर खड़े पेड़ों का निरीक्षण किया। टीम में शामिल मनीष चौधरी ने बताया कि बागपत में बड़ौत-अमीनगर सराय मार्ग, बड़ौत-मुजफ्फरनगर मार्ग, बडौत-मेरठ मार्ग, गांगनौली बिजली घर के अलावा शामली, सहारनपुर सहित अन्य जगहों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंप दी है। पेड़ हटाने और दूसरी जगह लगाने और नए पौधे लगाने का पूरा खर्च एनएचएआई उठाएगी। समझौते के तहत नए पौधों का रखरखाव भी एनएचएआई के जिम्मे होगा।