आपाकाल 1975
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वहीं ऐसे हाल में भी बिजनौर जनपद में काफी लोगों ने आपात काल का विरोध किया और सत्याग्रह किए। खराब भोजन को लेकर जेल में आंदोलन किया, लेकिन लोग डरे नहीं। 25 जून को लगी एमरजेंसी में केंद्र सरकार के आदेश पर जिले के 140 राजनीतिक और विभिन्न संगठन के कार्यकर्ताओं को जेल की हवा खानी पड़ी थी। काफी तादाद में कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए तो अनेक ने आंदोलन करते हुए गिरफ्तारी दी। इन 140 में से 48 लोकतंत्र सेनानी आज भी जीवित हैं। सरकार द्वारा इन लोकतंत्र सेनानियों को 20 हजार रुपया प्रतिमाह सम्मान राशि दी जा रही है, किंतु ये केंद्र सरकार से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की तरह सुविधा पाने का इरादा रखते हैं। आपातकाल में डीआईआर (डोमेस्टिक इंसीडेंट रिपोर्ट) और मीसा के तहत कांग्रेस विरोधी राजनीतिक और अन्य संगठन के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई हुई। डीआईआर में अपील की व्यवस्था थी। आप अपनी बात कह सकते थे, किंतु मीसा में कोई व्यवस्था नहीं थी। जिस पर मीसा लगी वह एमरजेंसी हटने के बाद ही रिहा हुआ।