इकनॉमिक कोरिडोर के लिए उत्तर प्रदेश के बागपत में अधिग्रहीत की गई भूमि पर कब्जा लेने पहुंची टीम का किसानों ने विरोध कर दिया। यहां गांगनौली और टीकरी में प्रशासनिक टीम भूमि पर कब्जा लेने पहुंची थी। वहीं मौके पर मौजूद पुलिस ने विरोध कर रहे किसानो को लाठियां फटकारकर दौड़ाया। बताया गया कि पुलिस कार्रवाई से किसान और भी नाराज हो गए और कई गांव के किसान एकत्र होकर मौके पर पहुंच गए और कार्रवाई का विरोध जताया। इस दौरान किसानो ने जेसीबी की चाबी निकालकर विरोध किया। अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। फिलहाल किसानों ने मौके पर धरना शुरू कर दिया है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत में मवीकलां से मुजफ्फरनगर की सीमा तक 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन भी अधिगृहीत की गई है। किसानों को जमीन का 824 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है।
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Economic Corridor का विरोध करते किसान
- फोटो : अमर उजाला
मार्च 2021 को पहले चरण की हुई थी शुरुआत
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण की शुरुआत मार्च 2021 में हुई थी। इसमें ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से दिल्ली यूपी बॉर्डर तक करीब 17 किमी लंबी छह लेन की एलिवेटेड रोड का निर्माण होना है।
यहां बनेंगें इंटरचेंज
हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली, यमुनानगर, बागपत, मेरठ व बड़ौत को जोड़ने के लिए सात इंटरचेंज बनेंगे।
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Economic Corridor का विरोध करते किसान
- फोटो : अमर उजाला
अधिग्रहण की गई जमीन
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत के 27 गांवों, मुजफ्फरनगर के सात और शामली के 22 गांवों, सहारनपुर के 25 गांवों की 1100 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। यह जमीन ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से सहारनपुर तक है। इसमें बागपत की 350 हेक्टेयर जमीन शामिल है।
अधिकांश किसानों को दिया जा चुका है मुआवजा
अधिकारियों का कहना है कि कुछ किसानों को छोड़कर अधिकांश किसानों को संतोषजनक मुआवजा प्राप्त हो चुका है। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए टीकरी में जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई शुरू कर कार्यालय खोल दिया गया है। जहां आसपास के गांवों के किसानों की समस्या का समाधान होगा। उनके मुआवजे की फाइलों को पूरा कराया जाएगा। तहसील बड़ौत के लेखपाल धर्मेंद्र को कार्यालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। धर्मेंद्र ने बताया कि गांव की 88 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है। 18 किसानों ने मुआवजा ले लिया है। उन्होंने कहा कि किसान उनसे संपर्क कर फाइल तैयार करा लें। जिससे समय पर उन्हें मुआवजा मिल सके।