पैर बच जाने से हो गई शिनाख्त
आरोपियों को अंदाजा था कि राकेश यादव का शव पूरी तरह जल जाएगा, जिससे उसकी पहचान भी नहीं हो सकेगी और वह साफ बच जाएंगे। मगर राकेश के दोनों पैर नहीं जल सके, जिससे उसके परिवार ने पहचान कर ली। शिनाख्त होने के बाद ही देनदारी का विवाद सामने आया और हत्या की गुत्थी सुलझ सकी।