नगर निगम टीम ने पुलिस फोर्स के साथ बेगमपुल स्थित आबू नाले किनारे बनी अवैध दुकानों को ध्वस्त किया। दुकानदारों ने टीम का विरोध किया। इतना ही नहीं बल्कि इस दौरान एक महिला ने टीम का सामना करते हुए जमकर विरोध किया। टीम के सदस्यों से महिला की तीखी नोंकझोक भी हुई। लेकिन पुलिस के सामने उनकी एक नहीं चली। सभी दुकानों को जेसीबी से गिरा दिया गया। हालांकि यह मामला बृहस्पतिवार का है। लेकिन आगे जो हुआ।
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व्यापारी को पकड़ती पुलिस
बेगमपुल स्थित आबू नाले के ऊपर तिब्बती नाम के बाजार में लोगों ने अतिक्रमण कर दुकानें बना ली थीं। इन दुकानों का मामला हाईकोर्ट में चला गया था। पिछले दिनों हाईकोर्ट ने नगर निगम के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बाद से ही निगम प्रशासन अवैध दुकानों के ध्वस्तीकरण की तैयारी में जुटा था।
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नगर निगम ने की कार्रवाई
बृहस्पतिवार को निगम दस्ते ने पुलिस फोर्स दुकानों को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी। यह देखकर दुकानदार और उनके परिजनों ने टीम का विरोध किया। एक दुकानदार दुकान के अंदर से नहीं निकला तो उसे इंस्पेक्टर लाल कुर्ती पकड़कर बाहर लाए। दुकानदारों ने जेसीबी के आगे खड़े होकर कार्रवाई को रोकने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के सामने किसी की नहीं चली।
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नगर निगम ने की कार्रवाई
करीब दो घंटे अभियान चलाने के बाद निगम दस्ता लौट गया। निगम टीम में संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार, कर निरीक्षण अधिकारी दिनेश यादव, अधिशासी अभियंता एके सिंह, कर अधीक्षक नरेश सिवालिया, लेखपाल कुंवरपाल और राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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नगर निगम ने की कार्रवाई
जनपद में एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स गठित हुए दो माह बीत चुके हैं। अधिकांश विभाग अपनी जमीनों पर कब्जा करने वालों की सूचनाएं भी उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन नगर निगम की तरफ से अभी तक एक भी ब्यौरा नहीं दिया गया है। ऐसे में एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स की कार्रवाई नगर निगम की सूचना बगैर अटकी पड़ी है।
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नगर निगम ने की कार्रवाई
वहीं डीएम एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स की अब तक तीन बैठकें ले चुके हैं। इसमें वह सभी विभागों से उनकी जमीनों पर कब्जा करने वालों और अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दे चुके हैं।
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नगर निगम ने की कार्रवाई
कई विभाग अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को दे चुके हैं। लेकिन नगर निगम रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। नगर निगम की कई जमीनें और संपत्ति शहरी क्षेत्र में आती हैं। वर्तमान स्थिति में नगर निगम की अधिकांश भूमि पर कब्जे हो चुके हैं। इनमें कई भूमि और संपत्ति बेशकीमती हैं। इनमें जमीनों के साथ तालाब भी शामिल हैं। इन जमीनों पर कालोनी, कांप्लेक्स, कॉलेज, अस्पताल आदि बन चुके हैं।
इसी तरह निगम की दुकानों आदि पर भी अवैध कब्जे के साथ उन पर अवैध निर्माण भी हो चुके हैं। नगर निगम की जमीनों पर कब्जे के लिए निगम प्रशासन ही दोषी रहा है। इन कब्जों के दौरान अधिकारी भी यहां आते जाते रहे, लेकिन कार्रवाई नहीं गई। इन कब्जों के पीछे इनका ही अहम रोल रहा है। ऐसे में यदि नगर निगम अपनी संपत्ति पर हुए कब्जों की सूची तैयार करता है तो उसे कब्जेधारकों के नाम और उन पर अब तक की गई कार्रवाई का भी ब्यौरा देना होगा। वहीं डीएम शुक्रवार को फिर से एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स की बैठक लेंगे।
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