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सेंट्रल मार्केट: 15 दिन में ध्वस्त करने होंगे 44 निर्माण, 1468 अवैध निर्माणों पर भी लटकी कार्रवाई की तलवार

Tue, 14 Jul 2026 10:12 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

Meerut News: मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट से व्यापारियों को कोई राहत नहीं मिली। 15 दिन में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। स्थानीय व्यापारियों व महिलाओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ रोष जताया।
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मंगलवार को धरने पर बैठी महिलाओं से बात करते उनके वकील। - फोटो : अमर उजाला
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से व्यापारियों और आवंटियों को कोई राहत नहीं मिली। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि ऐसे निर्माण को न तो वैध घोषित किया जा सकता है और न ही कंपाउंडिंग के दायरे में लाया जा सकता है।
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सूना पड़ा सेंट्रल मार्केट। - फोटो : अमर उजाला
अदालत ने आठ अप्रैल को आवास एवं विकास परिषद की ओर से सील की गईं 44 संपत्तियों (जिनमें पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं) को ध्वस्त करने के आदेश दिए। लोकेश खुराना बनाम राजेंद्र बड़जात्या की याचिका पर अधिवक्ताओं ने अल्प और दुर्बल आय वर्ग के मकानों के लिए रियायत की मांग की तो अदालत ने इस पर एतराज जताया। 
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दिन में भगवान से प्रार्थना करती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
खंडपीठ ने कहा कि अवैध निर्माण को किसी भी तरह की छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने सेटबैक के मामले में भी कोई राहत नहीं दी। आवंटियों को 15 दिन के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाने का समय दिया गया है। तय अवधि में कार्रवाई न होने पर परिषद ध्वस्तीकरण कर उसका खर्च संबंधित आवंटियों से वसूलेगी। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। इससे पहले परिषद को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

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फैसला आने के चलते पुलिस भी तैनात रही। - फोटो : अमर उजाला
आदेश के बाद मायूसी, भाजपा के खिलाफ नारेबाजी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद क्षेत्र में मायूसी छा गई। सेक्टर-2 में पिछले 89 दिनों से धरने पर बैठीं महिलाओं और व्यापारियों ने सुबह हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया। आदेश की जानकारी मिलते ही धरनारत महिलाओं की आंखें नम हो गईं और लोगों ने भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की। एहतियात के तौर पर पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा। धरनारत महिलाओं का कहना है कि अल्प एवं दुर्बल आय वर्ग के छोटे मकानों में सेटबैक लागू होने पर पूरा भवन गिर सकता है। इससे आसपास के मकान भी प्रभावित होंगे।
 
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धरनारत महिलाओं के लिए खाना बनाने आए हलवाई। - फोटो : अमर उजाला
1468 अवैध निर्माणों पर भी मांगा जवाब
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने परिषद की ओर से प्रस्तुत 1468 अवैध निर्माणों की सूची पर भी संज्ञान लिया और प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद को सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
 
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धरने पर बैठी महिलाएं हनुमान चालीसा का पाठन करते हुए। - फोटो : अमर उजाला
अस्पताल भवनों से जांच मशीन निकालने की छूट
सुनवाई के दौरान सील किए गए नर्सिंग होम के संचालकों की ओर से राहत की मांग की गई। नर्सिंग होम संचालकों के अधिवक्ता ने कहा कि सील किए गए भवन में डायग्नोस्टिक सेंटर चल रहे हैं जो लोगों की सेहत से जुड़ा मामला है। इस पर अदालत ने कहा कि आवासीय भवनों में इस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती। व्यापारी नेता एवं अधिवक्ता विपुल सिंघल ने बताया कि अदालत ने सभी अनाधिकृत अस्पतालों के विरुद्ध समान कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही अस्पताल संचालकों को परिषद से अनुमति लेकर अपनी मशीनें निकालने की छूट दी गई है।

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