चंद्रशेखर उर्फ रावण
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जब रावण से पूछा गया कि रासुका में अवधि से पहले योगी सरकार के रिहा कराने के फैसले को किस रुप में लेते हैं? तो मैं रावण ने जबाव दिया कि वजह कुछ नहीं कह सकता, क्योंकि उनकी दिली इच्छा हुई तो उठाकर बंद कर दिया था, उनकी इच्छा हुई छोड़ दिया। मैं तो सरकार का अंग नहीं हूं, आम आदमी हूं। जब आदमी तानाशाह हो जाता है तो उसका जो मन आता है करता है। एससी एसटी एक्ट पर पूरा सवर्ण समाज विरोधी हो गया तो भाजपा सरकार ने सोचा कि दलित को रिझाने के लिए चंद्रशेखर को रिहा कर दो। ताकि दलितों को गुमराह कर उनका वोट हासिल किया जा सके। सरकार ने सोचा कि रावण को नवंबर में तो बाहर आना ही है। ऐसे में अभी रिहा करके दलितों को रिझा लो। हो सकता है कि उन्हें बाहर लाकर फिर से फंसा दिया जाए। उनकी मंशा तो वो ही जाने।