बागपत के सिंगौली तगा गांव के अंकित प्रजापति और उसके दोस्त पेंटर इसरार की हत्या में नया खुलासा हुआ है। हत्या के दूसरे आरोपी कृष्ण यादव ने कई खुलासे किए हैं। आरोपी साधु सट्टे के नंबर और तंत्र क्रिया से साम्राज्य बढ़ा रहा था। वहीं, अंकित और इसरार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारणों का पता नहीं चला है।
बागपत जिले के रटौल के सिंगौली तगा गांव के अंकित और इसरार की हत्या करने का आरोपी साधु नरेश नाथ को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दोहरे हत्याकांड में शामिल आरोपी कृष्णा यादव ने बताया कि एक साल पहले साधु नरेशनाथ सिंगौली तगा गांव के मंदिर में रहता था और वहां की वीडियो अपनी इंस्टाग्राम आईडी पर अपलोड करता रहता था। वीडियो देखकर उसने साधु नरेशनाथ को मैसेज भेजकर बातचीत शुरू की। शादी के सात साल बाद उसकी बहन को बच्चा नहीं होने की समस्या साधु को बताई तो साधु ने तंत्र क्रिया से समाधान कराने का भरोसा दिया।
इसके बाद साधु के पास अपनी बहन को लेकर आया। कृष्णा ने बताया कि साधु का आशीर्वाद मिलने पर उसकी बहन गर्भवती हो गई और बच्चे को जन्म दिया। साधु से प्रभावित होकर वह भी उसका शिष्य बन गया। इसके बाद साधु के साथ मंदिर में रहने लगा।
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इसरार का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत के कारणों का पता नहीं चला
गाजियाबाद से आए फोरेंसिक एक्सपर्ट बिशन सिंह मान और जिला अस्पताल के चिकित्सक ने अंकित व इसरार के शवों का पोस्टमार्टम किया, जिसमें मौत होने के कारणों का पता नहीं चला। इसके चलते दोनों के शवों से बिसरा सुरक्षित कर लिया गया, जिसकी प्रयोगशाला में जांच कराई जाएगी।
सट्टे के नंबर और तंत्र क्रिया से साम्राज्य बढ़ा रहा था साधु
आरोपी साधु सट्टे के नंबर और तंत्र क्रिया से अपना साम्राज्य बढ़ा रहा था। सट्टे के नंबरों को लेकर साधु के पास अक्सर दिल्ली, हरियाणा समेत कई राज्यों से लोग आते रहते थे, जिनके साथ सट्टे की रकम को लेकर विवाद भी हुआ।
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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सिंगौली तगा के रहने वाले अंकुश, विकास आदि ने बताया कि दिसंबर 2025 में साधु नरेशनाथ बाबा हरनामदास महाराज के डेरे पर आया था। नरेशनाथ ने डेरे में आने के बाद वहां सबसे पहले सीसीटीवी कैमरे, एसी और एलईडी, वाशिंग मशीन समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की।
साधु के डेरे में आने का पता चलने पर उसके परिचित भी वहां आने लगे। दिनभर बाहरी लोगों का आना और रात में महिलाओं को बुलाना ग्रामीणों को अखरने लगा था। इसके अलावा गांव के कई वीरपाल समेत कई लोगों से तंत्र क्रिया के नाम पर रुपये भी लिए। रुपये वापस मांगने पर लोगों के साथ झगड़ा भी हुआ।
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लहचौड़ा-रटौल मार्ग स्थित गणेश मंदिर के परिसर में हुआ गड्ढा जिसमें इसरार व अंकित के शव निकाले गए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दो किलोमीटर दूर दबे थे शव, 200 किलोमीटर दूर तक तलाशते रहे
बागपत के सिंगौली तगा गांव के अंकित प्रजापति और उसके दोस्त पेंटर इसरार के शव घर से दो किलोमीटर दूर रटौल मार्ग पर स्थित श्रीगणेश मंदिर परिसर में दबे हुए थे और परिवार वाले उन्हें 200 किलोमीटर दूर तक तलाशते रहे। बुधवार देर रात शव मिलने के बाद दोनों के परिजनों पुलिस पर तलाशने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
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गड्ढे में जांच करते एएसपी व सीओ
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सिंगौली तगा गांव निवासी शेखर ने बताया कि उसके कुनबे के भाई अंकित और उसके दोस्त इसरार के लापता होने की शिकायत चांदीनगर पुलिस से की। उन्होंने पुलिसकर्मियों को दोनों को तलाशने के लिए कहा तो पुलिसकर्मी उनके खुद ही वापस आने की बात कहने लगे। पुलिसकर्मियों के कार्रवाई नहीं करने पर उन्होंने इसरार के परिवार वालों के साथ मिलकर खुद भी तलाश शुरू कर दी थी।
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इसरार का शव मिलने के बाद सिंगौली तगा गांव में विलाप करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने दिल्ली, हरिद्वार, ऋषिकेश, मेरठ, बुलंदशहर समेत अन्य जगहों पर तलाश की। 18 दिन तक तलाशने के बाद थककर बैठ गए थे। आरोप लगाया कि उन्होंने साधु पर हत्या करने का शक भी जताया, लेकिन पुलिस ने सख्ती से पूछताछ नहीं की, जिसकी वजह से साधु बचकर भाग गया। उन्होंने बताया कि अगर पुलिस सख्ती से पूछताछ करती तो दोनों के शव पहले ही मिल जाते।
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सिंगौली तगा में पुलिस से नोकझोंक करते मृतक इसरार के परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था नरेशनाथ
सिंगौली तगा गांव के विकास ने बताया कि साधु कहां का रहने वाला है, इसके बारे में किसी भी ग्रामीण को नहीं पता। कुछ दिन बाद गांव के एक जनप्रतिनिधि के साथ मिलकर साधु नरेशनाथ ने अपने आधार कार्ड में पता बदलवाकर सिंगौली तगा का करवा लिया था। बातचीत के दौरान नरेशनाथ सिंगौली तगा गांव से चुनाव लड़ने की बात भी कहता था और गांव के लोगों से मिलकर तैयारी करने की बात भी करता था।
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सिंगौली तगा में विलाप करते इसरार के परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पूजा की जोत और रुई भी उठाकर ले गया
विकास ने बताया कि नरेशनाथ को मंदिर से भगा दिया गया। इसके कई दिन बाद अपने कुछ साथियों के साथ गाड़ी लेकर वहां आया और डेरे में घुसकर अपना सामान लेकर चला गया। बताया कि अपने सामान के साथ डेरे में पहले से लगे पंखे, लोहे के सामान, बर्तन, भंडारे से कई लाख रुपये का सामान भी ले गया और कोठरी की चौखट उखाड़ने का प्रयास भी किया। ग्रामीणों के विरोध करने पर चौखट उखाड़ नहीं पाया और वहां से चला गया।
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सिंगौली तगा में पुलिस से नोकझोंक करते मृतक इसरार के परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
झूठ बोलकर जीत रहा था भरोसा
ग्रामीण विकास ने बताया कि सिंगौली तगा और लहचौड़ा गांव ब्राह्मण बाहुल्य है, इसलिए नरेशनाथ ने खुद को ब्राह्मण कुल का होना बताकर लोगों का भरोसा जीतना शुरू कर दिया। इसके बाद लोगों के सामने खुद को दूसरी जाति का बताने लगा था। लेकिन सही जानकारी किसी को नहीं दी। नरेशनाथ खुद को अविवाहिता बताता था, जबकि उसकी पत्नी और बेटा भी उसके आसपास ही रहते थे।
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सिंगौली तगा में इसरार का शव मिलने के बाद हंगामा करते परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आठ-दस दिन तक साधु की पत्नी डेरे में ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में रही, जिसे लोगों के आने से पहले ही कमरे में भेज देता था। साधु की पत्नी के कपड़े देखकर ग्रामीणों ने आपत्ति भी जताई थी। इसके बाद पास के किसी गांव में कमरा किराये पर लेकर दोनों को वहां भेज दिया।
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सिंगौली तगा में इसरार का शव मिलने के बाद घर के बाहर लगी लोगों की भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पहले करता था मेहनत-मजदूरी, बाद में बन गया महंत रमेशनाथ
काशीपुर के कुंडेश्वरी के पच्चावाला में सात साल पहले तक रमेश मेहनत मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता था। अचानक महंत रमेश नाथ बन गया और कुंडेश्वरी छोड़कर चला गया। बागपत में दो युवकों की हत्या के मामले में उनका नाम सामने आने से स्थानीय लोग हैरत में है। किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि रमेश ऐसा भी कर सकता है।
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कृष्ण यादव
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुंडेश्वरी पच्चावाला में रमेश मेहनत मजदूरी और ई रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। बेहद शांत स्वभाव का रमेश कभी किसी से लड़ता-झड़ता नहीं था। कब वह महंत बन गया, इसकी किसी को जानकारी नहीं है। वह सात साल पहले जमीन बेचकर अपने एक बेटे को साथ लेकर कहीं चला गया, इसके बाद से वह कभी यहां नहीं दिखा जबकि उसकी पत्नी रेखा और बेटा कुंडेश्वरी क्षेत्र में कहीं किराये के मकान में रहते हैं। लोगों ने बताया कि बीते कई वर्षों से उसको देखा नहीं है। अब दोहरे हत्याकांड में उसका नाम आने के बाद से हर कोई हैरत में है। अब स्थानीय लोगों को पता चला कि रमेश नाथ महंत बन गया है।
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मौके पर एकत्र लोग।
- फोटो : अमर उजाला
यह है बागपत का हत्याकांड
अनैतिक संबंधों के विरोध पर दो दोस्तों को जहर का इंजेक्शन देकर जिंदा दफना दिया
बागपत के सिंगौली तगा के दिव्यांग अंकित प्रजापति (28) और उसके दोस्त इसरार (30) को साधु नरेशनाथ निवासी कुंडेश्वरी ऊधमसिंह नगर ने दो शिष्यों और एक नाबालिग के साथ जहर के इंजेक्शन लगाने के बाद लहचौड़ा के धर्मस्थल परिसर में जिंदा दफना दिया। दोनों के शव जहां दबे थे, उसके ऊपर ही धूनी जमाने के बाद साधु 14 दिन तक बैठकर पूजा करता रहा।
पुलिस ने हत्यारोपी उज्ज्वल निवासी पूरनपुर नवादा को गिरफ्तार किया तो घटना का खुलासा किया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने चार फीट गहरे गड्ढे की खोदाई कर क्षत-विक्षप्त शव निकाले। घटना में शामिल दूसरे आरोपी कृष्णा निवासी धुम्मा भुलंदी जिला जौनपुर को घर से गिरफ्तार करके लाया गया, जबकि साधु आठ अगस्त से गायब है।
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सबूत एकत्र करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
बागपत के सिंगौली तगा निवासी दिव्यांग अंकित (28) और इसरार (32) आपस में दोस्त थे और घर में वॉल पुट्टी का काम करते थे। 25 जुलाई को दोनों दोस्त मोटरसाइकिल से रटौल के लिए निकले थे लेकिन वापस घर नहीं पहुंचे।
सिंगौली तगा गांव की युवती ने बताया कि भाई अंकित पेंटर दोस्त इसरार के साथ 25 जुलाई को रटौल जाने के लिए बाइक से निकला था। वापस नहीं आया तो 27 को थाने में तहरीर दी। पुलिस ने 29 को गुमशुदगी दर्ज कर मोबाइल की सीडीआर से लोकेशन निकाली तो लहचौड़ा गांव के धर्मस्थल के आसपास मिली।
बागपत में वारदात, शवों के ऊपर धूनी रमाता था साधु
एसपी के अनुसार, नरेशनाथ के शिष्य उज्वलाने बताया कि अंकित की बहन के नरेशनाथ के अनैतिक संबंध थे। इसका अंकित विरोध करता था। 25 जुलाई को अंकित इसरार के साथ आया तो परिसर में साधु, शिष्य कृष्ण यादव और एक नाबालिग मौजूद था। साधु ने दोनों को चाय में नशीली गोलियां मिलाकर पिला दी। बेहोश होने पर जहर के इंजेक्शन लगाकर परिसर में दफना दिया। इसरार की बाइक मवीकलां-सांकरौद के पास यमुना नदी में फेंक दिए गए।