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दुर्लभ तस्वीरें: अटल जी ने 1 दिन में की थी 13 सभाएं, भीड़ देख बोले-जिंदगी में नहीं भूलूंगा यह प्यार

Fri, 17 Aug 2018 02:22 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
13 का संयोग अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मेरठ से ही शुरू हुआ था। यहां उन्होंने एक ही दिन में 13 सभाएं की। सभी में भीड़ देखकर न केवल गद्गद् हुए बल्कि बोले कि इन 13 सभाओं को मैं भूलने वाला नहीं।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
वाकया सन 1985 का है जब एक ही दिन में अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 सभाएं की। उस समय प्रदेश अध्यक्ष कल्याण सिंह थे। मोहनलाल कपूर जिलाध्यक्ष और प्रोग्राम कभनवीनर ब्रजगोपाल गुप्ता था। ब्रजगोपाल बताते हैं कि 13 सभाओं के आयोजन की बात सुनकर एक बार तो अटल जी की पेशानी पर बल पड़ गए। कहा कि एक दिन में 13 सभा। इससे अच्छा तो मुझे पैदल ही शहर में घुमा देते। खैर कार्यकर्ताओं ने मनाया तो वे बोले शर्त यह है कि मैं शाम सात बजे वहां से निकल जाऊंगा। कार्यक्रम समय पर रखना। सभा छूटे या रहे यह आपकी जिम्मेदारी।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
उनकी पहली सभा सिसौली में हुई। दूसरी माछरा, तीसरी किठौर, परीक्षितगढ़, मवाना, लावड़, दौराला, सरधना, बिनौली, बड़ौत, बागपत और सबसे आखिर में खेकड़ा। इससे पहले जिमखाना में बैठक हो चुकी थी। चूंकि उस समय यह पूरा जिला एक ही था। खेकड़ा  की सभा में वह पहुंचे तो साढ़े साज बज गए पर कार्यकर्ताओं का प्यार देखकर न केवल सभा बल्कि दस बजे तक रुके रहे।

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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
खीर बनवाकर खाई
खेकड़ा में उन्होंने कहा कि अब भोजन यही होगा। इन सभी सभाओं में कार्यकर्ताओं ने उन्हें पार्टी चंदे के रूप में सिक्कों की थैलियां भेंट की थी। सभी जगह से लगभी दो लाख रुपया दिया गया था। खैर, उन्होंने खेकड़ा में भोजन किया और अपनी मनपसंद खीर कहकर बनवाई।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
अजय मित्तल से कराया था अनुवाद
सन 1975 की बात है। अटल बिहारी की मेरठ में पूरी जनसंघ की टीम थी। वह खंदक बाजार में चंपालाल जैन के यहां आए हुए थे। साथ ही लाकृष्ण आडवाणी, विजय मलहोत्रा आदि सभी जनसंघ के नेता थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचार प्रमुख अजय मित्तल वाकया याद करते हैं। बताते हैं कि वह दो दिन यहां रुके। अजय दसवीं के छात्र थे। उन्हें चंपालाल जैन ने बुलाया। अटल जी के हाथ में दो कागज। एक हिंदी और एक अंग्रेजी में लिखा हुआ। उन्होंने इसका अनुवाद करने के लिए अजय मित्तल को दिया। अजय ने दस मिनट में ही इसका अनुवाद कर दे दिया। उन्होंने इसे खुद पढ़ा और आडवाणी को भी पढ़वाया।  वह खुश हुए और अजय मित्तल की पीठ थपथपाई।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
जब बोलने दोगे तभी तो बिहारी बोलेगा
वर्ष 1971 की बात है। लोकसभा चुनाव के दौरान ैंसाली मैदान में बडी सभा थी। जैसे ही वह मैदान में पहुंचे तो जनता ने नारा लगाना शुरू कर दिया.... ‘अटल बिहारी बोल रहा है, इंदिरा शासन डोल रहा है ।’ कई मिनट तक नारे लगते रहे तो वह माइक पर बोले, रुको। जनता रुकी तो बोली अटल बिहारी कहां बोल रहा है? जब आप बोलने दोगे तभी तो बोेलेगा। रैली में ठहाका गूंज उठा औ उसके बाद उन्होंने अपना भाषण शुरू किया।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
मेरठ की गज्जक के  शौकीन थे अटल: अमित
अटल जी जैसा व्यक्तित्व सदियों में पैदा होता है। वह सहृदय थे और कार्यकर्ताओं की बात ध्यान से सुनकर उसका निराकरण करते थे। मेरी कई बार भेंट हुई। जब विधायक था तब एक दिन विधानसभा में वह राज्यपाल दीर्घा में आ गए। उसी दिन शाम को हमारी पूरी टीम को बुलवाया और कहा कि हाय हुल्लड़ क्यों करते हो। सदन की गरिमा का ध्यान रखो। धैर्य से काम करो। कई बार आए सानिध्य मिला। 2002 में मेरा टिकट कटा। उस चुनाव में उन्होंने विक्टोरिया पार्क में 9 फरवरी 2002 में रैली की थी।

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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
उसके बाद मेरठ नहीं आए। इससे पहले मैं सन 1996 में उनके पास गया। कहा मेरा टिकट कट रहा है। उन्होंने आंकड़े देखकर का कि तुम्हारा टिकट कौन काट सकता है। जाओ मेहनत करो। मैं वापस चला तो बोले गज्जक नहीं लाए। दरअसल वे मेरठ की गज्जक के शौकीन थे। मैने कहा लाया हूं पर सुरक्षा कारणों से भीतर नहीं ला सकता। उन्होंने तत्काल अपने एक कर्मी को बुलाया और मेरी गाड़ी में रखी गज्जक मंगवाई।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पुरानी तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
मुझे याद नहीं पर चाचा लक्ष्मीकांत वाजपेयी और परिवार के सभी लोग बताते हैं। सन1980 में भाजपा का मुंबई अधिवेशन हुआ था। हमारा पूरा परिवार वहां गया था। मैं उस समय डेढ़ साल का था। जैसे ही सब बाहर निकले तो अटल जी ने मुझे गोद में ले लिया। बोले कि यह हमारा सबसे छोटा कार्यकर्ता है।

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