सरधना के महाभारतकालीन इतिहास से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, सरधना नगर में वर्तमान में देवी मंदिर पर स्थित श्री महादेव मंदिर में कुंती पुत्र पांडवों ने आज से करीब साढ़े 5000 वर्ष पूर्व शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर के पुजारी शंकर का कहना है कि दुर्योधन व पांडवों के बीच जब विवाद हो रहा था इसी दौरान दुर्योधन ने पांडवों को जिंदा दफन करने के लिए बरनावा में लाक्षाग्रह का निर्माण कराया था।
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शिवलिंग पर जलाभिषेक
हस्तिनापुर से लाक्षागृह के लिए कुंती और पांडव पुत्र के रास्ते होते हुए बरनावा जा रहे थे इसी बीच सरधना में उन्हें शाम हो गई। सरधना के वनखंडी बन में उन्होंने रात्रि विश्राम किया। उस स्थान पर आज महादेव मंदिर बना हुआ है। रात्रि के समय कुंती को स्वपन दिखाई दिया जिस जगह आप जा रहे हो वहां तुम्हारे साथ बहुत बड़ी दुर्घटना होने वाली है। यदि आप इसी जगह पर शिवलिंग की स्थापना कर अपनी यात्रा का शुभारंभ करेंगे तो उस लाख से गृह में तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होगा।
कुंती ने यह जानकारी अपने पुत्रों को दी। पांडवों ने इसी जगह पर शिवलिंग की स्थापना की और अपनी मंजिल की तरफ बढ़े। कुंती को जो स्वप्न में दिखाई दिया वह हकीकत में बदलता चला गया। पांडुपुत्र वहां से सकुशल लौटे तो उन्होंने मंदिर में फिराकर जलाभिषेक किया है तभी से यहां प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है 40 दिन नित्य शिवलिंग पर जलाभिषेक करने वाले की भोलेनाथ हर मनोकामना पूरी करते हैं।