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मथुरा नाव हादसा: अफसरों ने रिवर फ्रंट निर्माण के दौरान न जांचे मानक; लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन? अफसर मौन

Sun, 12 Apr 2026 10:02 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मथुरा

सार

मथुरा में यमुना रिवर फ्रंट परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। निर्माण कार्य क्षेत्र में न तो संकेतक बोर्ड लगाए गए हैं और न ही यमुना नदी में नौकाओं के आवागमन पर कोई प्रतिबंध लगाया गया, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ था। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है, यह सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
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mathura boat accident - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
मथुरा के वृंदावन के केसी घाट पर हुए मोटरबोट हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, तीन लोग अब भी लापता हैं। शनिवार को एक और शव निकाला गया।  जबकि, रविवार को दो शव निकाले गए। स्थानीय गोताखोरों के अलावा पीएसी के गोताखोर, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और सेना की टुकड़ी भी बचाव अभियान में जुटी है। रिवर फ्रंट के कार्य में लगी एजेंसी के ठेकेदार नारायण शर्मा और बोट चालक पप्पू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके गिरफ्तार किया गया है।

केसी घाट के नजदीक यमुना में डूबे लोगों की 14 किमी के दायरे में तलाश कराई गई लेकिन लापता हुए छह लोगों में से शनिवार सुबह मानिक टंडन (25) निवासी पंजाब का शव निकाला गया। शव मिलते ही देवरहा बाबा घाट पर खड़े परिजन फफककर रोने लगे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रविवार को यमुना नदी से एक युवक का शव बरामद हुआ है। उसकी पहचान ऋषभ शर्मा के रूप में हुई है। उसका शव हादसे की जगह से तीन किलोमीटर दूर अक्रूर घाट के पास मिला है। वहीं, एक महिला का शव देवरहा बाबा घाट के पास मिला है। तीन लोग लापता हैं, उनकी तलाश में सर्च ऑपरेशन जारी है।
 
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यमुना में चल रहे राहत एवं बचाव कार्य का निरीक्षण करते अधिकारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यमुना में डूबे लोगों की तलाश गत शुक्रवार की दोपहर के बाद से जारी है। अभियान में लगे गोताखोरों को खाना-पानी भी नावों में ही मुहैया कराया जा रहा है। पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी देर रात तक डेरा डाले रहे। डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय, डीएम सीपी सिंह स्टीमर में बैठकर यमुना में लोगों को तलाशने के लिए पहुंचे।
 
 
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रेस्क्यू के दौरान यमुना में डूबे श्रद्वालु का शव निकालते एसडीआरएफ के जवान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ठेकेदार व नाविक पर गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज
मोटरबोट हादसे में मांट थाने में उपनिरीक्षक आकाश सिंह ने रिवर फ्रंट का कार्य करा रही यूपीपीसीएल के ठेकेदार नारायण शर्मा निवासी मांट और मोटरबोट का संचालन कर रहे नाविक पप्पू उर्फ दाऊजी निषाद के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।

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मानिक टंडन का शव मिलने के बाद विलाप करते परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्राथमिकी में कहा गया है कि ठेकेदार ने नियमों की अनदेखी करके बिना अनुमति और पूर्व सूचना के पांटून पुल को हटाने का काम शुरू कर दिया था। नावों का संचालन बंद नहीं कराया। वहीं, नाविक ने श्रद्धालुओं के मना करने के बाद भी मोटरबोट को आगे बढ़ा दिया।
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घटना के बाद संचालन बंद होने के कारण यमुना किनारे खड़ी नाव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बोट में क्षमता से ज्यादा सवारियों को बैठाया। एसपी सिटी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि हादसे के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और नाविक को गिरफ्तार किया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। प्रकरण की अन्य पहलुओं से भी जांच की जा रही है।
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हादसे के बाद मौके पर पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक और युवती लापता
लापता लोगों की संख्या भी बढ़ गई है। शनिवार को एक युवती डिंकी के परिजन ने पुलिस से संपर्क किया है। उनका कहना है कि डिंकी अपनी मां मीनू बंसल के साथ नाव में सवार थी। मीनू बंसल का शव शुक्रवार को बरामद कर लिया गया था। 

 
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मानिक टंडन का शव मिलने के बाद विलाप करते परिजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
डिंकी का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है। ऐसे में मोटरबोट पर सवार श्रद्धालुओं की संख्या अब 38 हो गई है। इनमें से 10 लोगों के शव शुक्रवार को निकाले गए थे। एक शव शनिवार तो दो शव रविवार को निकाले गए। 22 लोगों को बचा लिया गया था। तीन लोग लापता हैं। 

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mathura boat accident - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन... अफसर मौन
मथुरा में यमुना रिवर फ्रंट परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। निर्माण कार्य क्षेत्र में न तो संकेतक बोर्ड लगाए गए हैं और न ही यमुना नदी में नौकाओं के आवागमन पर कोई प्रतिबंध लगाया गया, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ था। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है, यह सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

 

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मथुरा में हादसे के बाद पांटुन पुल के पास तलाशी अभियान चलाते गोताखोर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नियमों के अनुसार, किसी भी बड़े निर्माण स्थल पर सुरक्षा संकेतों का होना अनिवार्य है, ताकि आम नागरिक और श्रमिक संभावित खतरों के प्रति सतर्क रहें। रिवर फ्रंट जैसे संवेदनशील क्षेत्र में, जहां गहरी खुदाई और भारी मशीनरी का उपयोग हो रहा है, वहां प्रवेश निषेध या कार्य प्रगति पर है जैसे बोर्ड नदारद हैं। यमुना घाटों पर नौकाओं के बेरोटोक आवागमन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। 
 

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मथुरा हादसे के बाद यूपी एसडीआरएफ के जवान - फोटो : पीटीआई
यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि परियोजना के प्रबंधन में सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। सवाल यह उठता है कि इन सुरक्षा खामियों के लिए कौन जिम्मेदार है... क्या यह निर्माणदायी एजेंसी की ओर से चूक थी, या फिर परियोजना की निगरानी कर रहे अफसरों ने लापरवाही बरती। हालांकि जिम्मेदार अफसर इस सवाल का जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं।

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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ और पुलिस - फोटो : पीटीआई
दो पर फोड़ा ठीकरा, बाकी...
अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अफसरों ने ठेकेदार और नाविक पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ दिया है, जबकि घटना के बाद लुधियाना के रहने वाले रोहित बहल ने नाविक की गलती से इनकार किया है। घटना के बाद नाविक पप्पू और पुलिस कर्मियों के साथ खड़े रोहित का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वह कहते दिख रहे हैं कि पांटून पुल बुलडोजर की मदद खींचा जा रहा था। इसी दौरान नाव से टकराने के बाद हादसा हुआ था। नाविक ने बचाने का काफी प्रयास किया था।
 

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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ और बचाव अभियान चलाती पुलिस - फोटो : पीटीआई
डीएम एवं डीआईजी ने अस्पताल में हाल जाना
यमुना हादसे में घायल पंजाब के मां बेटे सहित पांच श्रद्धालुओं में से तीन को शनिवार को रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल में उपचार के बाद हालत में सुधार होने पर छुट्टी लेकर घर चले गए, जबकि दो श्रद्धालुओं का उपचार चल रहा है। इनका हाल जानने के लिए डीएम और डीआईजी पहुंचे। 
 

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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ और बचाव अभियान चलाती पुलिस - फोटो : पीटीआई
केसी घाट के समीप यमुना में डूबी नाव हादसे में पीड़ित पंजाब के लुधियाना के ख्वाजा बाजू जगरांव निवासी श्वेत जैन और उनकी मां रेखा जैन, लुधियाना ओमेक्स निवासी सरोज पत्नी राजेंद्र चौधरी, मंजू पत्नी सुरेंद्र कुमार एवं राधा पत्नी पवन को उपचार के लिए मथुरा मार्ग स्थित रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल में लाया गया था।

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मथुरा में बोट हादसे के बाद मौके पर जमा भीड़ - फोटो : पीटीआई
इनमें से उपचार के बाद हालत में सुधार होने पर तीन श्रद्धालु छुट्टी लेकर बले गए, जबकि श्वेत जैन और रेखा का उपचार चल रहा है। डीएम सीपी सिंह एवं डीआईजी शैलेश कुमार पांडेय ने अस्पताल पहुंचकर उनका हाल जाना। 
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मथुरा में बोट हादसे के बाद बचाए गए श्रद्धालुओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया - फोटो : पीटीआई
संस्था की जवाबदेही तय की जाएगी
सुरक्षा मानकों का पालन न करना किसी भी निर्माण परियोजना के लिए अस्वीकार्य है। रिवर फ्रंट परियोजना के निर्माण में अगर कोई लापरवाही बरती जा रही है तो कार्यदायी संस्था की जवाबदेही तय की जाएगी।-नवीन कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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